मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा स्पीकर के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें AIADMK के छह बागी विधायकों के इस्तीफे मंजूर किए गए थे. इन विधायकों ने बाद में सीएम सी. जोसेफ विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) का दामन थाम लिया था. कोर्ट ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ अयोग्यता की लंबित कार्यवाही दो महीने के भीतर पूरी हो जानी चाहिए.
चीफ़ जस्टिस एस.ए. धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को फैसला सुनाया कि वे इस्तीफे मंजूर करने के स्पीकर के फैसले में दखल नहीं दे सकते.
कोर्ट ने यह भी माना कि इस्तीफे मंजूर करने से पहले स्पीकर के लिए विधायकों को नोटिस जारी करना या उनसे स्पष्टीकरण मांगना जरूरी नहीं था.
यह फैसला AIADMK के व्हिप एग्री कृष्णमूर्ति और 'नेशनल पीपल्स शक्ति पार्टी' के नेता एम.एल. रवि की उन याचिकाओं पर आया, जिनमें स्पीकर के फैसले को चुनौती दी गई थी.
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कौन थे 6 बागी विधायक?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के कुछ दिन बाद ही AIADMK के 6 विधायक- मरगथम कुमारवेल (मदुरंतकम), सत्यभामा (धरापुरम), इसक्की सुब्बैया (अंबासमुद्रम), जयकुमार (पेरुंदुरई), एम.आर. विजयभास्कर (करूर) और सी. विजयभास्कर (विरालिमालई) ने अपनी पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करते हुए TVK सरकार के पक्ष में वोट किया था.
इसके बाद 25 सदस्यों वाले बागी समूह के हिस्से के तौर पर उनके खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू हुई थी.
इन छह विधायकों ने बाद में विधानसभा से इस्तीफा दे दिया और सत्ताधारी TVK में शामिल हो गए. स्पीकर का कहना था कि उनके इस्तीफे के पत्र सही थे और उन्होंने अपनी मर्जी से स्पीकर की मौजूदगी में उन्हें सौंपा था.
AIADMK ने स्पीकर के फैसले का किया था विरोध
इस्तीफे मंजूर किए जाने का विरोध करते हुए AIADMK के व्हिप एग्री कृष्णमूर्ति ने तर्क दिया कि स्पीकर को पहले अयोग्यता वाली याचिका पर फैसला करना चाहिए था.
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह पता लगाने के लिए कोई सार्थक जांच की गई थी कि इस्तीफे स्वेच्छा से दिए गए थे. उन्होंने इस बात की ओर इशारा किया कि पत्र सौंपने के कुछ ही मिनटों के भीतर विधायक एक मंत्री से मिले और TVK में शामिल हो गए.
स्पीकर ने तर्क दिया कि अपनी मर्जी से इस्तीफा देने के बाद किसी विधायक को पद पर बने रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता.
उन्होंने कहा कि हॉर्स-ट्रेडिंग या प्रलोभन के आरोपों की जांच अयोग्यता की कार्यवाही में की जा सकती है, लेकिन इस्तीफे अपनी मर्जी से दिए गए थे या नहीं, यह तय करने में वे प्रासंगिक नहीं थे.
बागी विधायकों ने भी कहा कि उनके इस्तीफे असली और मर्जी से दिए गए थे. छह विधायकों में से दो - सत्यभामा और मरगथम कुमारवेल ने हाल ही में उपचुनावों में TVK की टिकट पर जीत हासिल की है.
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