- भारत में LPG सिलेंडरों की कमी के बावजूद पाइप से मिलने वाली प्राकृतिक गैस (PNG) की सप्लाई बिना रुकावट जारी है.
- PNG नेटवर्क देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैला हुआ है तथा लगभग 1.59 करोड़ घर इससे जुड़े हैं.
- प्राकृतिक गैस की लगभग आधी घरेलू उत्पादन से पूरी करता है जबकि LPG की करीब 62 प्रतिशत आपूर्ति आयात पर निर्भर है.
भारत के कई इलाकों में इन दिनों LPG सिलेंडरों की कमी देखी जा रही है, जबकि पाइप से मिलने वाली नेचुरल गैस (PNG) की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी है. यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि दोनों ईंधनों की सप्लाई चेन, आयात पर निर्भरता और वितरण प्रणालियों में बड़ा अंतर है. खाना पकाने के लिए सालों से LPG सिलेंडर भारतीय घरों की पहली पसंद रहे हैं. लेकिन अब PNG—यानी पाइप से मिलने वाली प्राकृतिक गैस धीरे-धीरे पूरे देश में लोकप्रिय होती जा रही है. PNG पानी की तरह पाइप नेटवर्क के ज़रिए सीधे घरों और व्यवसायों तक पहुंचती है, जबकि LPG एक तरल ईंधन है जिसे सिलेंडरों में भरकर एजेंसियों के माध्यम से पहुंचाया जाता है.
'LPG पर दबाव कम करने के लिए PNG अपनाएं'
PNG नेटवर्क 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक फैल चुका है और लगभग 1.59 करोड़ घर इससे जुड़े हैं. सरकार का लक्ष्य 2034 तक इसे बढ़ाकर 12.63 करोड़ कनेक्शन करने का है. मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने भी हाल ही में उपभोक्ताओं से अपील की कि वे LPG पर दबाव कम करने के लिए PNG अपनाएं. PNG की स्थिर सप्लाई का एक बड़ा कारण इसका घरेलू उत्पादन है. भारत अपनी प्राकृतिक गैस की लगभग आधी जरूरत खुद पूरी करता है.

90% स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है
विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू गैस उत्पादन वैश्विक रुकावटों के समय सप्लाई को संभाले रखने में मदद करता है. साथ ही, नैचुरल गैस कई देशों—जैसे अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया से आयात की जाती है, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम रहती है. दूसरी ओर, LPG की आपूर्ति ज्यादातर आयात पर निर्भर है. भारत अपनी LPG जरूरत का लगभग 62% हिस्सा विदेशों से मंगाता है,और इसका करीब 90% स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है, जो अक्सर जियोपॉलिटिकल तनावों से प्रभावित रहता है. इसी कारण हाल के समय में LPG की सप्लाई कमज़ोर हुई है, और सरकार ने घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देते हुए कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई पर रोक भी लगाई है, जिससे रेस्टोरेंट और छोटे व्यापार सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं.

PNG उपयोगकर्ता कम परेशान
संकट के दौरान प्राथमिकता प्रणाली के तहत पहले घरेलू PNG उपभोक्ताओं को गैस दी जाती है, फिर ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए CNG को, जबकि कमर्शियल PNG में लगभग 30% कटौती की गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि उद्योगों में विकल्प मौजूद होते हैं, जैसे प्रोपेन या कोयला, लेकिन LPG पर निर्भर छोटे व्यवसायों के पास विकल्प बहुत कम हैं. PNG उपयोगकर्ता कम परेशान इसलिए हैं, क्योंकि इसकी सप्लाई पाइपलाइन आधारित है, घरेलू उत्पादन पर आधारित है, कई देशों से आयात होती है और सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है.

हालांकि, PNG भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है, क्योंकि भारत अपनी प्राकृतिक गैस का लगभग 50% अभी भी आयात करता है. अगर वैश्विक तनाव बढ़े, तो कमर्शियल सप्लाई में और कटौती करनी पड़ सकती है. मौजूदा स्थिति भारत के लिए एक अहम सबक है कि PNG नेटवर्क को और तेजी से बढ़ाया जाए, घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाया जाए और LPG पर अत्यधिक निर्भरता कम की जाए. विशेषज्ञों के अनुसार, PNG कनेक्टिविटी का विस्तार लंबे समय में ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई स्थिरता को मजबूत करेगा.
संकट के समय भी PNG ज़्यादा मजबूत
पाइपलाइन से डिस्ट्रिब्यूशन : PNG पाइपलाइन के ज़रिए लगातार बहती रहती है, जिससे सिलिंडर की लॉजिस्टिक्स पर निर्भरता कम हो जाती है.
घरेलू उत्पादन : भारत की नैचुरल गैस की आधी ज़रूरत घरेलू स्रोतों से पूरी होती है.
अलग-अलग देशों से इम्पोर्ट : नैचुरल गैस का इम्पोर्ट किसी एक इलाके से नहीं, बल्कि कई अलग-अलग देशों से किया जाता है.
सरकार की प्राथमिकता : सप्लाई सिस्टम में घरेलू PNG यूज़र्स को ज़्यादा अहमियत दी जाती है. लेकिन PNG पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है
GAIL के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हम प्राकृतिक गैस के मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर नहीं हैं. भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए आयात अभी भी ज़रूरी होगा."
भारत के लिए सबक क्यों?
विशेषज्ञों का तर्क है कि मौजूदा LPG संकट PNG इंफ्रास्ट्रक्चर के तेज़ी से विस्तार की ज़रूरत को दिखाता है. पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार करने, घरेलू गैस उत्पादन को बढ़ाने और आयातित LPG पर निर्भरता कम करने से भारत की ऊर्जा प्रणाली मज़बूत हो सकती है. वशिष्ठ ने बताया, "यह स्थिति एक याद दिलाती है कि पूरे देश में PNG कनेक्टिविटी का विस्तार करने से LPG आपूर्ति पर दबाव कम हो सकता है और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ सकती है."
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