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This Article is From Apr 24, 2024

लोकसभा चुनाव 2024 : जाने क्या है अमेरिका का वह विरासत कानून, जिस पर भारत में मचा है बवाल

कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा के उस बयान पर हंगामा मच गया है, जिसमें उन्होंने भारत में विरासत टैक्स पर चर्चा शुरू करने की बात कही थी. इस पर हमला करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस का पंजा आपसे आपकी विरासत छीन लेगा.

लोकसभा चुनाव 2024 : जाने क्या है अमेरिका का वह विरासत कानून, जिस पर भारत में मचा है बवाल

कांग्रेस (Congress)नेता सैम पित्रोदा (Sam Pitroda)के एक बयान पर देश में हंगामा मच गया है. पित्रोदा ने कहा था कि भारत में विरासत टैक्स (Inheritance Tax)लगाने पर बात होनी चाहिए.  उन्होंने कहा कि अमेरिका में विरासत टैक्स लगता है.उनके इस बयान को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर हमला कर दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi)ने मंगलवार को कांग्रेस पर हमला बोला. उन्होंने छत्तीसगढ़ में कहा कि कांग्रेस कहती है कि वो माता-पिता से मिलने वाली विरासत पर भी टैक्स लगाएगी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का पंजा आपसे आपकी विरासत छीन लेगा.

प्रधानमंत्री की ओर से मामला उठाए जाने और मामला उलटा पड़ता देख कांग्रेस ने पित्रोदा के बयान से किनार कर लिया. उसने इसे पित्रोदा का निजी बयान बताया है. इसके बाद भी मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है.कांग्रेस के बचाव में अभी इंडिया गठबंधन के किसी नेता का बयान सामने नहीं आया है. 

क्या है अमेरिका का विरासत कानून

आइए जानते हैं कि सैम पित्रोदा जिस अमेरिका के किस कानून का जिक्र कर रहे थे.दरअसल अमेरिका में संपत्ति दो तरह के कर लगाए जाते हैं. एक होता है संपत्ति कर और दूसरा है, विरासत कर. अमेरिका के 12 राज्यों में संपत्ति कर लगाया जाता है. वहीं केवल छह राज्य ही विरासत कर लगाते हैं. 

संपत्ति कर को 'डेथ टैक्स'के नाम से भी जाना जाता है. यह एक संघीय कानून है. यह किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसकी संपत्तियों के हस्तांतरण पर लगता है. माना जाता है कि यह कर संपत्तियों पर बकाया है, लाभार्थियों पर नहीं. संपत्ति कर 18 से 40 फीसदी के बीच हो सकता है. 

इसके उलट विरासत कर उस व्यक्ति पर लगता है, जिसे विरासत में पैसा, प्रापर्टी या कोई और धन-संपदा मिल रही है. यह किसी व्यक्ति की मौत पर उसकी संपत्तियों के हस्तांतरण पर लगता है. यह उसी राज्य में लगता है, जहां वह है, भले ही लाभार्थी किसी और राज्य में रह रहा हो. लाभार्थी को यह कर देना पड़ेगा. 

कितने राज्यों में लागू है अमेरिका का विरासत कानून

विरासत कर अमेरिका के केवल छह राज्यों में ही लागू है. ये स्टेट हैं- अयोवा. कैंटुकी , मैरीलैंड, नेब्रास्का, न्यू जर्सी और पेंसुलवेनिया. यह कर एक फीसदी से 20 फीसद तक हो सकता है.

आयोबा ने इस विरासत कर को खत्म करने का फैसला किया है. एक जनवरी 2025 के बाद से होने वाली मौतों के बाद लगने वाले कर को चरणबद्ध तरीके से धीरे-धीरे खत्म कर दिया जाएगा.

यह तो रही कानून की बात. आइए अब आपको बताते हैं कि इस पर राजनीति कब से शुरू हुई और किसने क्या कहा है. 

सैम पित्रोदा के बयान पर पीएम मोदी का कांग्रेस पर हमला

सैम पित्रोदा ने कहा था कि भारत में विरासत टैक्स लगाने पर बहस होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अमेरिका में विरासत टैक्स लगता है. अगर किसी शख्स के पास 10 करोड़ डॉलर की संपत्ति है तो उनकी मौत के बाद 45 फीसदी संपत्ति उनके बच्चों को मिलती है और 55 फीसदी संपत्ति पर सरकार को चली जाती है.उन्होंने कहा कि भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है. यहां अगर किसी के पास 10 अरब रुपए की संपत्ति है तो उसके मरने के बाद उनके बच्चों को सारी प्रॉपर्टी मिल जाती है. जनता के लिए कुछ नहीं बचता. उन्होंने पर चर्चा करने की बात की. 

पित्रोदा के बयान पर विवाद होने के बाद कांग्रेस ने उनके इस बयान से किनारा कर लिया. पार्टी ने इसे पित्रोदा का निजी बयान बताया है. 

सबसे पहले इस मामले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उठाया. उन्होंने मंगलवार को छत्तीसगढ़ में कहा कि कांग्रेस का कहना है कि वो माता-पिता से मिलने वाली विरासत पर भी टैक्स लगाएगी. आप जो अपनी मेहनत से संपत्ति जुटाते हैं, वो आपके बच्चों को नहीं मिलेगी. उसे कांग्रेस का पंजा आपसे छीन लेगा.उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मंत्र है, जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी. जब तक आप जीवित रहेंगे, कांग्रेस आपको ज्यादा टैक्स से मारेगी और जब आप जीवित नहीं रहेंगे, तो वो आप पर इनहेरिटेन्स टैक्स का बोझ लाद देगी. जिन लोगों ने पूरी कांग्रेस पार्टी पैतृक संपत्ति मानकर अपने बच्चों को दे दी, वो लोग नहीं चाहते कि एक सामान्य भारतीय अपने बच्चों को अपनी संपत्ति दे".

भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि कांग्रेस ने भारत को बर्बाद करने की ठान ली है. अब सैम पित्रोदा संपत्ति वितरण के लिए 50 फीसदी विरासत कर की वकालत कर रहे हैं. इसका मतलब यह है कि हम अपनी मेहनत से जो कुछ भी बनाएंगे, उसका 50 फीसदी छीन लिया जाएगा.

भाजपा नेता जयवीर शेरगिल ने कहा कि कांग्रेस को वोट देने का मतलब है अपनी 55 फीसदी संपत्ति खोना. पहले कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में फाइनेंशियल मैपिंग का जिक्र किया था. फिर राहुल गांधी ने हैदराबाद में धन वितरण के बारे में बात की. आज राहुल गांधी के मुख्य सलाहकार सैम पित्रोदा लोगों की 55 फीसदी संपत्ति हड़पने के लिए एक कानून चाहते हैं. 

सैम पित्रोदा की सफाई

अपने बयान पर विवाद बढ़ता देख सैम पित्रोदा ने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया.उन्होंने कहा कि किसने कहा कि 55 फीसदी संपत्ति छीन ली जाएगी? किसने कहा कि ऐसा कुछ भी भारत में किया जाएगा? भाजपा और मीडिया इतना घबराया क्यों हुआ है? उन्होंने कहा कि मैंने अमेरिका के विरासत टैक्स का उदाहरण अमेरिका के लिए ही दिया था. क्या मैं तथ्य नहीं बता सकता? इसका कांग्रेस सहित किसी भी पार्टी की नीति से कोई लेना-देना नहीं है.

पित्रोदा के विरासत कर वाले बयान पर कांग्रेस ने उनसे किनारा कर लिया है.कांग्रेस मीडिया सेल के प्रमुख जयराम रमेश ने एक्स पर लिखी पोस्ट में कहा, "वे मेरे और दुनिया में कई लोगों के अच्छे मेंटर, दोस्त और मार्गदर्शक रहे हैं. पित्रोदा किसी भी मुद्दे पर अपनी राय को स्वतंत्रता के साथ रख सकते हैं.जाहिर तौर पर एक लोकतंत्र में लोगों को अपने निजी विचारों पर चर्चा करने और उन्हें रखने का अधिकार है. इसका यह मतलब नहीं कि उनका विचार हमेशा कांग्रेस का विचार दर्शाता हो. कई बार ऐसा नहीं होता है. उनके बयान को इस वक्त सनसनीखेज बनाकर चलाना और इसे परिप्रेक्ष्य से बाहर ले जाना पीएम मोदी के दुर्भावनापूर्ण चुनावी अभियान से ध्यान बंटाने की कोशिश है."

प्रधानमंत्री  से क्यों मिलना चाहते हैं कांग्रेस अध्यक्ष

इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात का समय मांगा है. उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री ने मैनिफेस्टो को सही से समझ नहीं पाए हैं. उनसे मिलकर उन्हें मैनिफेस्टो समझाना है.'' 

दरअसल कांग्रेस का चुनाव घोषणा पत्र आने के साथ ही भाजपा ने हमला शुरू कर दिया था. प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के घोषणा पत्र को मुस्लिम लीग वाला घोषणा पत्र बताया था.वह मुद्दा अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि सैम पित्रोदा ने भाजपा को हमले का एक मौका थमा दिया है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे का जनता पर कितना प्रभाव पड़ता है. 

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