- गुजरात में नवरात्र के दौरान राजकोट और जामनगर में राजपूत महिलाओं द्वारा पारंपरिक तलवार रास का प्रदर्शन किया गया
- राजकोट पैलेस के मैदान में पिछले लगभग 18 सालों से क्षत्रिय समाज की महिलाएं तलवार रास की प्रस्तुति देती हैं
- तलवार चलाना न जानने वाली महिलाओं को भी ट्रेनिंग दी जाती है ताकि वे इस सांस्कृतिक परंपरा में भाग ले सकें
नवरात्र चल रहा है और पूरा देश माता के पूजा में लगा हुआ है. नवरात्र की बात हो और गुजरात का जिक्र न हो, भया यह कैसे हो सकता है. गुजरात में नवरात्र का उत्सव केवल गरबा और डांडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां वीरता और परंपरा का अद्भुत संगम भी देखने को मिलता है. सोमवार रात राजकोट और जामनगर में राजपूत महिलाओं ने पारंपरिक तलवार रास किया. हाथों में चमचमाती तलवारें, पारंपरिक वेशभूषा और चेहरे पर आत्मविश्वास के साथ महिलाएं मैदान में उतरी.
राजकोट पैलेस के ऐतिहासिक मैदान में नवरात्र के दौरान क्षत्रिय समाज की महिलाओं द्वारा तलवार रास की विशेष प्रस्तुति की जाती है. इस परंपरा को निभाते हुए लगभग 18-19 साल हो चुके हैं. इस आयोजन को एक संस्था द्वारा संचालित किया जाता है, जो प्राचीन गरबा और रास संस्कृति को सहेजने का काम कर रही है.
"जिन महिलाओं को तलवार चलाना नहीं आता, उन्हें भी बारीकी से ट्रेनिंग दी जाती है"
इस प्रस्तुति में शामिल एक महिला ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस को बताया कि जब दूर-दूर से लोग इस अनोखे रास को देखने आते हैं तो बेहद गर्व महसूस होता है. उन्होंने कहा, "हमारी संस्था प्राचीन गरबा संस्कृति के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है. इसके लिए हमने बहुत मेहनत की है. यहां हमें बहुत अच्छे से सिखाया जाता है. जिन महिलाओं को तलवार चलाना नहीं आता, उन्हें भी बारीकी से प्रशिक्षण दिया जाता है. फिलहाल पैलेस में यह आयोजन बहुत अच्छे से चल रहा है."
वहीं, इस आयोजन से 15 सालों से जुड़ी एक अन्य वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि यह प्रस्तुति खास तौर पर क्षत्रिय समाज की बहनों द्वारा की जाती है. उन्होंने कहा, "हम लगभग 18 साल से यह कार्यक्रम कर रहे हैं, इसलिए हमारे लिए यह नया नहीं है. नवरात्रि से लगभग एक से डेढ़ महीना पहले ही बहनें अभ्यास शुरू कर देती हैं. पैलेस ग्राउंड में होने वाले इस प्रदर्शन में तलवार के सभी प्रकार के दांव और स्टंट दिखाए जाते हैं."
आशापुरा गरबी मंडल के आयोजक गिरीश पांड्या के अनुसार, इस गरबी मंडल में पिछले 45 सालों से गरबा का आयोजन हो रहा है, जबकि तलवार रास की परंपरा पिछले 20 सालों से निभाई जा रही है.
उन्होंने बताया, "नवरात्रि से डेढ़ महीना पहले से ही महिलाएं और युवतियां इसका अभ्यास शुरू कर देती हैं. तलवार रास के जरिए महिला सशक्तीकरण का संदेश दिया जाता है. जब महिलाएं देवी जगदंबा के रूप में हाथ में तलवार लेकर रास करती हैं, तो यह उनकी शक्ति, आत्मविश्वास और आत्मरक्षा की क्षमता को दर्शाता है. इसी कारण जामनगर में आशापुरा गरबी मंडल का तलवार रास काफी प्रसिद्ध है."
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