- देशभर में जन्माष्टमी का त्योहार विशेष उत्साह और परंपराओं के साथ मनाया गया
- राजस्थान के नाथद्वारा में 353 साल से चली आ रही परंपरा अनुसार श्रीकृष्ण को 21 तोपों की सलामी दी गई
- चित्तौड़गढ़ के सांवलियाजी मंदिर में 1100 ड्रोन के आकर्षक शो से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की झांकी प्रस्तुत की गई
देशभर में 4 सितंबर को जन्माष्टमी का त्योहार धूमधाम से मनाया गया. रात के 12 बजते ही नन्हें कान्हा का जन्मोत्सव मनाया गया और उनका अभिषेक कर सभी ने एक दूसरे को बधाई दी. लेकिन राजस्थान के कुछ मंदिरों में इस दौरान अलग ही नजारा देखने को मिला. कहीं श्री कृष्ण को 21 तोपों की सलामी दी गई तो कहीं ड्रोन शो की रोशनी से आसमान में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया. कहीं 31 किलो पाग का केक बनाया गया. एक मंदिर ऐसा भी है जहां, 425 लीटर दूध और 365 किलो दही से भगवान का अभिषेक किया गया.हालांकि इनमें से कुछ रस्सें इन मंदिरों की परंपरा का हिस्सा हैं.
जन्माष्टमी पर श्रीनाथजी को 21 तोपों की सलामी
सबसे पहले बात करते हैं राजस्थान के फेमस नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर की. इस मंदिर में 353 सालों से चली आ रही जन्माष्टमी की एक परंपरा इस बार भी जारी रही. रात को 12 बजते ही भगवान कृष्ण को 21 तोपों की सलामी दी गई. बड़ी संख्या में लोग इस पल के साक्षी बने. बता दें कि मंदिर में दो तोपों से सगामी दी जाती है, जिन्हें नर और मादा तोप कहा जाता है.
#WATCH नाथद्वारा, राजस्थान। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर ऐतिहासिक श्रीनाथजी मंदिर में भगवान कृष्ण के जन्म के अवसर पर 21 तोपों की अनोखी सलामी दी गई। pic.twitter.com/x2TEssOJMW
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 4, 2026
सांवलियाजी मंदिर में 1100 ड्रोन का शो
चित्तौड़गढ़ के सांवलियाजी मंदिर की जन्माष्टमी भी बहुत खास रही. मंदिर में ड्रोन शो आयोजित किया गया. रात 8 बजे 3 साल बाद हुए ड्रोन शो में एक साथ 1100 ड्रोनों आसमान में उड़ाए गए. इनकी रोशनी से आसमान में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उनसे जुड़ी कहानियों से जुड़ी सुंदर आकृतियां और श्री सांवलियाजी मंदिर और सांवरा सेठ की आकृतियां भी बनाई गईं.

श्री गोविंद देव जी 425 लीटर दूध का अभिषेक
जयपुर के गोविंद देवजी मंदिर में भी जन्माष्टमी का नजारा कुछ अलग ही था. रात 12 बजे भगवान के जन्म के बाद श्री गोविंद देव जी का अभिषेक 425 लीटर दूध, 365 किलो दही, 11 किलो घी, 85 किलो बूरा और 11 किलो शहद से किया गया.इसके बाद भगवान को रबड़ी, लड्डू और पंजीरी का भोग चढ़ाया गया. इस दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘राधे-गोविंदा' के जयकारों से गूंज उठा.

बांके बिहारी मंदिर में 31 किलो का केक
मथुरा के बांके बिहारी मंदिर की जन्माष्टमी की तो बात ही निराली है. देश-विदेश से भक्त मथुरा और वृंदावन पहुंचते हैं.सबसे खास है मंगला आरती, जो साल में एक बार होती है. जिसके लिए भक्त शाम से ही मंदिर में जुट गए थे. रात को 1.55 बजे हुई इस आरती में करीब 600 श्रद्धालु शामिल हुए. जन्माष्टमी पर खास था ठाकुरजी के लिए बनाया गया 31 किले पाग का केक. इसे बनाया था आगरा के एक फेमस हलवाई ने. इस केक को ड्राईफ्रूट, चाकलेट और जैली से तैयार किया गया था.

जन्माष्टमी पर 120 करोड़ मूल्य के आभूषणों से श्रृंगार
मध्य प्रदेश के ग्वालियर के कृष्ण मंदिर में जन्माष्टमी पर भगवान का श्रृंगार लगभग 120 करोड़ मूल्य के आभूषणों से किया गया. सोना, चांदी, हीरे, मोती, पन्ना, माणिक और पुखराज जैसे दुर्लभ और बेशकीमती रत्नों के आभूषण भगवान को पहनाए गए.श्रीकृष्ण को रत्नजड़ित मुकुट पहनाया गया. इसकी कीमत 1.25 करोड़ रुपये बताई जा रही है.

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