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This Article is From Jan 20, 2012

अवैध खनन को लेकर कृष्णा मुश्किल में

बेंगलुरू: कांग्रेस के लिए एक बड़ी मुश्किल खड़ी करते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अवैध खनन मामले में शुक्रवार को विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के खिलाफ जांच की अनुमति दे दी।

कृष्णा पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 1999 से 2004 तक राज्य का मुख्यमंत्री रहते हुए वन क्षेत्र के बड़े भूभाग को अवैध रूप से गैरआरक्षित किया।

न्यायालय ने कृष्णा के अलावा एक कम्पनी को खनन लाइसेंस देने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की भूमिका की जांच की मंजूरी दी। यही नहीं अवैध खनन में आरोपी कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री एन. धरम सिंह की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

न्यायाधीश एन. आनंद ने कृष्णा और कुमारस्वामी द्वारा अलग-अलग दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया। अवैध खनन मामले में लगे आरोपों की जांच शुरू करने के लिए पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी को कृष्णा और कुमारस्वामी ने चुनौती दी थी।

धरम सिंह ने भी प्राथमिकी को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी लेकिन इस सप्ताह की शुरुआत में उन्होंने अपना आवेदन वापस ले लिया।

लोकायुक्त न्यायालय के विशेष न्यायाधीश एनके सुधींद्र राव के आदेश पर पुलिस ने आठ दिसम्बर को कृष्णा के खिलाफ मामला दर्ज किया था जबकि प्राथमिकी निरस्त करने के लिए कृष्णा नौ दिसम्बर को उच्च न्यायालय की शरण में पहुंचे थे।

ज्ञात हो कि बेंगलुरू के एक कारोबारी टीजे अब्राहम की शिकायत पर राव ने तीन दिसम्बर को राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों और 11 सेवारत एवं सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच का आदेश दिया था।

अब्राहम ने आरोप लगाया है कि कृष्णा ने मुख्यमंत्री रहते हुए अपने बच्चों, रिश्तेदारों सहित अपने परिजनों के नाम पर अवैध तरीके से काफी सम्पत्ति जुटाई।

कृष्णा पर आरोप है कि उन्होंने बेल्लारी और अन्य स्थानों पर हजारों एकड़ वन भूमि को गैरआरक्षित किया और तत्कालीन वन विभाग के सचिव एवं राज्य वन मंत्री के विरोध के बावजूद इस इलाके में खनन के लिए 10 निजी कम्पनियों को अनुमति दी।

न्यायाधीश आनंद ने शुक्रवार को कहा कि पुलिस कृष्णा पर वन भूमि को गैरआरक्षित करने के लगे आरोपों की जांच शुरू कर सकती है।

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अवैध खनन, कृष्णा, SM Krishna
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