- कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार रात भारी भीड़ और बारिश के कारण भगदड़ मची, जिसमें 19 लोगों की मौत हुई
- पंडाल में भीड़ नियंत्रण न होने, कम रोशनी और संकरी गलियों के कारण सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां थीं
- पुलिस जांच में पाया गया कि निजी सुरक्षा एजेंसी की घोषणा और सीटी बजाने से भगदड़ की स्थिति पैदा हुई थी
कोलकाता में शनिवार रात पंडाल गिरने के मामले में जांच तेजी से चल रही है. अब कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिनसे पता चलता है कि कोलकाता के चोरबागन दुर्गा पूजा पंडाल में खतरे के साफ संकेत मौजूद थे. शनिवार रात मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई. इस भगदड़ से पहले एक एनाउंसर बार-बार बंगाली में कह रहा है, "बाहर निकलने के लिए गेट खोल दो, लोगों को बाहर जाने दो! कृपया, बाहर निकल जाइए." वहीं, पंडाल के अंदर मौजूद श्रद्धालु बाहर हो रही भारी बारिश से बचने के लिए वहीं रुके रहने की कोशिश कर रहे हैं.
अंदर आने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए एनाउंसर कहता है, "रुक जाइए. पंडाल के पास मत आइए. यह गिर रहा है!" इसके जवाब में, अंदर आने की कोशिश कर रहे लोग लंबी कतार को आगे धकेलते हैं—ताकि वे भी बारिश से बच सकें और गेट बंद होने से पहले अंदर जा सकें.
इससे दोनों तरफ से भारी दबाव बन जाता है; एक तरफ लोग बाहर नहीं निकल रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ गेट पर मौजूद लोग किसी भी तरह पंडाल के अंदर जाने की जिद कर रहे हैं. सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के एक वीडियो में वह इस स्थिति का वर्णन करते हुए कहती हैं, "यहां बिल्कुल जगह नहीं है! भीड़ को संभालने का कोई इंतजाम नहीं है." वह एक VIP लेन का भी जिक्र करती हैं, जिससे लोग आसानी से अंदर जा रहे हैं.
भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति द्वारा फोन पर रिकॉर्ड की गई 49 सेकंड की एक और क्लिप में दर्जनों लोगों को एक संकरे, कम ऊंचाई वाली छत वाले, ढके हुए और बैरिकेड लगे रास्ते में फंसा हुआ देखा जा सकता है. वहां महिलाएं और बच्चे मदद के लिए चिल्ला रहे हैं. लोग एक-दूसरे से इतने सटकर खड़े हैं कि हिलने-डुलने की भी जगह नहीं है; कुछ लोग गिरने से बचने के लिए दीवार को कसकर पकड़े हुए हैं. एक अन्य वीडियो में बड़ी संख्या में लोगों को पंडाल की ओर भागते हुए देखा जा सकता है, जिनमें से कुछ बारिश में छाता लिए दौड़ रहे हैं.
पुलिस की जांच: 'घोषणा' का मामला
प्रत्यक्षदर्शियों ने अचानक हुई भारी बारिश, रोशनी के अपर्याप्त इंतजाम और उत्तरी कोलकाता के इस इलाके में—जहां गलियां काफी संकरी हैं—आयोजित ऐतिहासिक पूजा में लगी "90 मिनट लंबी" कतार का जिक्र किया. भीड़ इसलिए भी ज्यादा थी क्योंकि उस दिन शनिवार होने के साथ-साथ सप्तमी भी थी; 10 दिनों तक चलने वाले हिंदू त्योहार का यह सातवां दिन बेहद शुभ माना जाता है.
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांचकर्ता एक ऐसे वीडियो की पड़ताल कर रहे हैं, जिसमें एक व्यक्ति को यह घोषणा करते हुए सुना जा सकता है कि पंडाल गिरने वाला है. अधिकारी ने एक समाचार एजेंसी को बताया, "हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह घोषणा किसने की और किस वजह से ऐसा कहा गया."

Videos show extreme pressure at entry gate of Chorebagan puja pandal in North Kolkata on Saturday night.
Photo Credit: NDTV/Police/Sourced
अधिकारी ने कहा, "हमें ऐसे पर्याप्त सबूत मिले हैं जो पूजा आयोजकों द्वारा भारी कुप्रबंधन की ओर इशारा करते हैं. वहां आने वाले लोगों की बड़ी संख्या को संभालने के लिए कोई स्पष्ट योजना नहीं थी, और सब कुछ बस जुबानी तौर पर ही चल रहा था. हमने सीसीटीवी फुटेज इकट्ठा किए हैं, स्थानीय लोगों और चश्मदीदों के बयान दर्ज किए हैं, और अपने निष्कर्षों की पुष्टि की है. सुरक्षाकर्मी भी नाकाफी थे."
पुलिस अधिकारी ने बताया कि लोगों के आने-जाने और भीड़ के आवागमन को लेकर की गई घोषणाएं नाकाफी थीं, जिससे भीड़ के बीच लोग भ्रमित हो गए. उन्होंने आगे कहा कि न तो गेट और न ही पंडाल के बाहर का रास्ता इतना चौड़ा था कि अचानक आई इतनी बड़ी भीड़ को संभाल सके.
मुख्यमंत्री ने क्या कहा
कोलकाता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में घायलों से मिलने के बाद, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पत्रकारों से कहा, "मौके पर मौजूद अधिकारियों की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना पूजा आयोजकों द्वारा लाउडस्पीकर पर की गई एक घोषणा के कारण हुई."
बाद में उन्होंने ANI से कहा, "मौके पर मौजूद ACP (सहायक पुलिस आयुक्त) की शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह घटना एक निजी सुरक्षा एजेंसी द्वारा की गई घोषणा और कुछ सीटी बजाए जाने के बाद शुरू हुई." अधिकारी ने बताया कि पीड़ितों में से दो के परिजनों का कहना है कि पंडाल के पास निजी सुरक्षा गार्डों द्वारा सीटी बजाए जाने से, अंदर जाने का इंतजार कर रहे लोगों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई.
मुख्यमंत्री ने मारे गए लोगों के परिवारों के लिए 25 लाख रुपये के मुआवजे और सरकारी नौकरी की घोषणा की. उन्होंने यह भी बताया कि हाई कोर्ट के एक मौजूदा जज की अध्यक्षता में एक जांच समिति इस घटना की जांच करेगी.

भारी बारिश के बीच शाम करीब 7:40 बजे भगदड़ मच गई. मारे गए 19 लोगों में 13 महिलाएं और दो नाबालिग शामिल थे. 25 अन्य लोग घायल हुए, जिनमें से तीन को आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया है; इनमें से एक की हालत गंभीर है.
पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या (जो हत्या की श्रेणी में नहीं आती) का मामला दर्ज किया है और आयोजकों सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए लोगों में चोरबागन दुर्गा पूजा समिति के सचिव राज कुमार सेवदा और उपाध्यक्ष शांतनु दुबे शामिल हैं. इसके अलावा, बांस का ढांचा बनाने वाले बिप्लब मुखर्जी; भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार कौशिक साहा और पिंटू डे; तथा निजी सुरक्षा के प्रभारी सुमन चक्रवर्ती और राजेश पाल को भी गिरफ्तार किया गया है.
अधिकारी ने सभी पूजा आयोजकों से आग्रह किया कि वे अपने पंडालों में उचित रोशनी और आने-जाने के लिए पर्याप्त गेट की व्यवस्था सुनिश्चित करें. उन्होंने कहा, "कई पंडालों में थीम के नाम पर बहुत कम रोशनी रखी जाती है... लेकिन लोगों की जान किसी भी थीम से कहीं ज्यादा कीमती है."
प्रशासन ने शहर के कई बड़े आयोजकों से अपने पंडालों को कुछ समय के लिए बंद करने को कहा है. जिन पूजा आयोजनों में भारी भीड़ जुटती है, जैसे कि ताला प्रत्यय, अलीपुर सार्वजनीन, चेतला अग्रानी और बालीगंज सार्वजनीन, उन्हें भी आगंतुकों का प्रवेश रोकने के लिए कहा गया है. कोलकाता में 3,000 से अधिक दुर्गा पूजा आयोजन हो रहे हैं.
यह भी पढ़ें-
Video: 'बंधुआ मजदूर' कहने के बाद जेडी वेंस की सफाई-'मुझे अपने ससुराल वालों से प्यार है'
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं