विज्ञापन

बचपन की गलियां देख आंखों में आंसू... खीर भवानी मेले में जुटे कश्मीरी पंडितों का दिल भर आया

कश्मीरी पंडितों को खीर भवानी मेले का इंतजार सालभर रहता है. वे सिर्फ माता के दर्शन के लिए ही नहीं जाते. ये तीन दिन उनकी जिंदगी का वो समय होता है जब वे उस मिट्टी को छू पाते हैं जिसे उनके पूर्वज अपना घर कहते थे.

बचपन की गलियां देख आंखों में आंसू... खीर भवानी मेले में जुटे कश्मीरी पंडितों का दिल भर आया
खीर भवानी मेले में पहुंचे कश्मीरी हिंदू.
  • विस्थापित कश्मीरी पंडित सालों बाद माता खीर भवानी मेले के लिए घाटी पहुंचे
  • 1990 में आतंकवाद की वजह से लगभग पांच लाख कश्मीरी हिंदुओं को घाटी छोड़नी पड़ी थी
  • खीर भवानी मेला कश्मीरी पंडितों के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक पुनर्मिलन का खास मौका होता है
जम्मू-कश्मीर:

सुपर्णा, दुलारी, भूषण लाल और न जाने इन जैसे कितने लोग, ये वे नाम हैं जो माता खीर भवानी मेले के लिए जम्मू-कश्मीर के गंदरबल पहुंचे. मन में खुशी और आंखों में यादों का पुलिंदा लिए इन लोगों के मन में देवी के दर्शन के साथ ही अपनों से मिलने की आस साफ दिखाई दी. करीब 39 साल पहले 8 साल की उम्र में कश्मीर का अपना घर छोड़ने वाली सुपर्णा नगरोटा पहुंचते ही यादों की पुरानी दुनिया में खो गईं. 1990 में उनके परिवार को आतंकवाद की वजह से चुपचाप घाटी से भागना पड़ा था. घर, आंगन और बचपन सब कुछ वहीं रह गया. तब से अब तक वह वापस कश्मीर नहीं लौट पाईं.

1990 के बाद ये पहला मौका है जब करीब 44 साल की सुपर्णा को खीर भवानी के दर्शन के बहाने एक बार फिर अपने बचपन में वापस लौटने का मौका मिला. उनकी बस जैसे ही नगरोटा से आगे बढ़ी वह मानो सालों पहले पीछे रह गए बचपन में वापस लौटने लगीं. उनका दिल अपने बचपन के आंगन और गलियों में चला गया. वह अब मां खीर भवानी के दर्शन के लिए जा रहीं सिर्फ श्रद्धालु नहीं बल्कि घर लौट रही एक बेटी थी.

पुरानी यादों को ताजा करने वाला पल

 सुपर्णा ने बस की खिड़की को कसकर पकड़ते हुए धीरे से कहा कि यह मेरे लिए पुरानी यादों को ताजा करने वाला पल है. अपने घर की जगह पर पहुंचने में इतने साल लग गए. अपने घर से दूर होने का दर्द सिर्फ सुपर्णा ही नहीं बल्कि 1990 के दशक की शुरुआत में करीब 5 लाख कश्मीरी हिंदुओं ने झेला. आतंकवाद की वजह से उनको घाटी से भागने को मजबूर होना पड़ा. दिल में रह गईं तो सिर्फ पुरानी यादें.

Latest and Breaking News on NDTV

खीर भवानी मेला अपनों से मिलने का मौका

सैकड़ों विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं को ले जाने वालीं 225 बसें खीर भवानी मेले के लिए शनिवार सुबह जैसे ही जम्मू से घाटी के लिए रवाना हुईं तो इन लोगों को फिर से पुराने पल फिर से जीने का मौका मिला. उनके लिए ये तीन दिन की यात्रा नहीं बल्कि अपनों से दोबारा मिलने का मौका है. इन सभी की एक ही प्रार्थना है कि मां खीर भवानी ऐसे ​​हालात ऐसे बना दें कि वे अपनी मातृभूमि, कश्मीर हमेशा के लिए वापस लौट सकें. 

भूषण लाल नाम के एक श्रद्धालु ने कहा, अभी तो तीर्थयात्री के तौर पर जा रहे हैं. अगले साल मैं हमेशा के लिए वापस जाना चाहता हूं.". ये कहते हुए उनकी आंखें दूर किसी चीज को निहार रही थीं. उनके माता-पिता घर वापस लौटने की अधूरी उम्मीद के साथ गुजर गए

दुलारी नाम की एक बुजुर्ग महिला ने कहा,  " ये तीन दिन हमारे लिए क्या मायने रखते हैं, मैं आपको बता नहीं सकती. मैं अपने कश्मीर की हवा में सांस ले रही हूं. भले ही कुछ देर के लिए ही सही लेकिन मैं अपने घर पर हूं.

36 सालों में कश्मीरी जमीन पर पहला कदम

बता दें कि माता खीर मंदिर यात्रा कश्मीरी हिंदुओं के लिए खास महत्व रखती है. कश्मीरी पंडितों को खीर भवानी मेले का इंतजार सालभर रहता है. वे सिर्फ माता के दर्शन के लिए ही नहीं जाते. ये तीन दिन उनकी जिंदगी का वो समय होता है जब वे वे उस मिट्टी को छू पाते हैं जिसे उनके पूर्वज अपना घर कहते थे. बसों में सवार कई लोगों के लिए 36 सालों में कश्मीरी जमीन पर यह पहला कदम रहा. 

बचपन की सड़कें देख भावुक हुए लोग

ये लोग जोर शोर से 'जय माता दी' के जयकारे लगा रहे थे. इनकी आवाज में जोश, भक्ति और आंसू सब घुले नजर आए. आंसू आस्था, यादों और उन घरों के लिए जो एक नई जिंदगी की वजह से पीछे छूट गए. खीर भवानी सिर्फ तीर्थ-स्थल नहीं, बल्कि कश्मरी हिंदुओं के लिए विस्थापन और अपनेपन के बीच एक नाजुक पुल की तरह है. यहां पहुंचने के दौरान कई तीर्थ यात्रियों की आंखों के सामने उनका पूरा बचपन घूमने लगा, वे बहुत भावुक हो उठे.

खीर भवानी मेले के बारे में जानें

जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में स्थित रग्न्या देवी मंदिर में वार्षिक खीर भवानी मेला लगता है. खीर भवानी कश्मीरी पंडितों की कुल देवी मानी जाती हैं, जिनकी वहां बहुत मान्यता है. ज्येष्ठ अष्टमी कश्मीरी पंडितोके लिए अत्यधिक धार्मिक महत्व रखती है. वर्षों से खीर भवानी मेला कश्मीर में सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारे का प्रतीक बना हुआ है.
 

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Kashmiri Pandit, Kheer Bhawani Festival, Kheer Bhawani Mela, Kheer Bhawani Temple, Kashmiri Hindu
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com