- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिये कच्चे तेल और गैस की सप्लाई में मामूली सुधार ही हो पाया है: केप्लर
- बीते तीन दिनों में यानी 19 से 21 जून तक 71 कार्गो जहाजों की ट्रांजिट की पुष्टि हुई.
- कई जहाज अभी भी ईरानी और गुप्त मार्गों का उपयोग कर रहे हैं.
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने को लेकर हुए समझौते के बाद अंतराष्ट्रीय एनर्जी मार्केट में पेट्रोलियम प्रोडक्ट की कीमतें घट जरूर गयी हैं, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिये कच्चे तेल की सप्लाई युद्ध के पहले वाले स्तर पर पहुंचने में लम्बा वक्त लग सकता है. सोमवार (22 जून 2026) को ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स की कीमत 78 डॉलर से 81 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई है, जबकि पिछले गुरुवार को युद्ध रुकने के ऐलान के बाद इसकी कीमत गिरकर 77 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गयी थी.
ग्लोबल शिपिंग के लिए रियल-टाइम ट्रैकिंग और इंटेलिजेंस मुहैया कराने वाली ग्लोबल डेटा और एनालिटिक्स फर्म केप्लर का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिये कच्चे तेल और गैस की सप्लाई में मामूली सुधार ही हो पाया है.
सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर जारी एक रिपोर्ट "Hormuz uptick remains fragile" में Kpler ने कहा, "स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुधार की स्थिति नाजुक बनी हुई है. नाकाबंदी हटने और मुक्त आवागमन फिर से बहाल होने से 19-21 जून के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आवागमन में तेजी से सुधार हुआ, जिस दौरान 71 कार्गो जहाजों की ट्रांजिट की पुष्टि हुई. वाणिज्यिक आवागमन में सुधार हुआ है, लेकिन आवागमन की वॉल्यूम pre-crisis norms से कम बनी हुई है".
Hormuz uptick remains fragile
— Kpler (@Kpler) June 22, 2026
Strait of Hormuz crossings rebounded sharply over 19–21 June, with 71 confirmed transits and a weekend peak of 35 on 20 June, supported by the blockade lift and renewed free-passage signals. Commercial crossings recovered with AIS transponder ons,… pic.twitter.com/2YnT6kTnU3
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाज की संख्या
- 19 जून, 2026: 19
- 20 जून, 2026: 35
- 21 जून, 2026: 17
Kpler के आंकलन के मुताबिक, कई जहाज अभी भी ईरानी और गुप्त मार्गों (Dark routes) का उपयोग कर रहे हैं, जबकि बारूदी सुरंगों को हटाने का काम अभी भी अधूरा है. 10 जून के बाद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और आसपास के इलाकों में कार्गो जहाजों पर कोई नया हमला नहीं हुआ है. केप्लर के मुताबिक, कूटनीति अभी भी नाजुक है, फिर भी दोबारा खुलने से कुछ सुधार हो रहा है, हालांकि सुधार संभवतः एकसमान नहीं होगा.
पेट्रोलियम मंत्रालय की पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल की 22 जून को जारी ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, 17 जून, 2026 को कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की कीमत US$ 78.48/bbl थी, जो 19 जून को मामूली घटकर US$ 78.38/bbl पहुंच गयी. हालांकि इसकी वजह से जून के पहले 19 दिनों के दौरान कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत भी घटकर US$ 89.06/bbl हो गयी.

भारत कितना तेल कहां से मंगाता है?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल, 50% LNG और 60% LPG दुनियाभर के बाजारों से आयात करता है, जिसका मध्यपूर्व एशिया में युद्ध शुरू होने से पहले एक बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आता था. लेकिन ग्लोबल मार्केट्स में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई 28 फरवरी, 2026 को मध्यपूर्व एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद बुरी तरह बाधित हुई.
युद्ध के असर से निपटने के लिए भारत सरकार ने तेल कम्पनियों के साथ मिलकर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के आयात स्रोतों को बड़े स्तर पर diversify किया है, और अब दुनिया के नए बाजारों से पेट्रोलियम पदार्थों का स्टॉक आयात किया जा रहा है, लेकिन इसकी वजह से आयात का खर्च काफी बढ़ गया.
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