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This Article is From Feb 27, 2024

केरल में नहीं थम रहा जंगली हाथियों का आतंक, हमले में फिर एक शख्स की मौत

केरल के वायनाड के लोग भी हाथियों के हमलों (Kerala Elephant Attack) से गुस्से में हैं.वायनाड में हाल ही में हाथियों के हमलों में दो लोगों की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन किया था.

केरल में नहीं थम रहा जंगली हाथियों का आतंक, हमले में फिर एक शख्स की मौत
केरल में हाथी के हमले में फिर एक मौत.(प्रतीकात्मक फोटो)
नई दिल्ली:

केरल में हाथियों के हमले बढ़ते (Kerala Elephant Attack) जा रहे हैं. राज्य के पहाड़ी जिले मुन्नार के पास कन्नीमाला एस्टेट में एक आवारा जंगली हाथी के हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई. पुलिस ने बताया कि सोमवार रात जब हाथी ने वाहन पर हमला किया तो ऑटोरिक्शा में कुछ अन्य यात्री भी सवार थे.मृतक की पहचान सुरेश कुमार के रूप में हुई है, उसका दूसरा नाम मणि भी था. वह ऑटोरिक्शा चलाता था, ये जानकारी पुलिस की तरफ से दी गई है. 

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वायनाड में हाथियों के हमले में 2 की मौत

केरल के वायनाड के लोग भी हाथियों के हमलों से गुस्से में हैं.वायनाड में हाल ही में हाथियों के हमलों में दो लोगों की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन किया था. विभिन्न राजनीतिक दलों ने मंगलवार को मुन्नार क्षेत्र में सड़क जाम कर अन्य विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया. उन्होंने इलाके में बढ़ते मानव-पशु संघर्ष को लेकर अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की.

केरल में विशेषकर पहाड़ी जिले वायनाड में, जान-माल को खतरे में डालने वाले जंगली जानवरों के हमलों के खिलाफ बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच राज्य के वन विभाग के हालिया आंकड़ों से पता चला है कि पिछले तीन वर्षों में मानव-पशु संघर्ष के परिणामस्वरूप लोगों की जान जाने के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट आई है.

2023 में 2021-2022 की तुलना में कम मौतें

‘पीटीआई-भाषा' के पास उपलब्ध वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2023-2024 की अवधि के दौरान केरल में हाथियों के हमलों के कारण होने वाली मौतों की संख्या 2021-2022 में दर्ज की गई संख्या की तुलना में कम रही. आंकड़ों के अनुसार केरल में 2023-2024 के दौरान हाथियों के हमलों में 17 लोगों की मौत हुई जबकि 2022-2023 में 27 और 2021-2022 में 35 लोगों की जान गई थी. 

पिछले 5 सालों में हाथी के हमलों में 148 मौतें

मानव-पशु संघर्ष के लिए कुख्यात ओडिशा, झारखंड और कर्नाटक जैसे राज्यों की तुलना में ये संख्याएं बहुत कम हैं. झारखंड में वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, हाथियों के हमलों में हर साल औसतन 100 से अधिक लोग मारे जाते हैं. कर्नाटक वन विभाग के अनुसार पिछले पांच वर्षों में मानव-हाथी संघर्ष के कारण 148 लोगों की मृत्यु हुई. इसके अलावा, ओडिशा, असम और पश्चिम बंगाल में पांच साल की अवधि में मानव-पशु संघर्ष में क्रमशः 499, 385 और 358 लोगों की मौत हुई. केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन के जवाब में ये आंकड़े उपलब्ध कराए हैं. वर्तमान अनुमान के अनुसार, केरल में हाथियों की संख्या लगभग 2,000 से 2,500 है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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