विज्ञापन

KEO AI PC: बेंगलुरु के इंजीनियरों ने ₹18999 से कम लागत में बना दिया AI कंप्यूटर; अब स्कूलों में स्वदेशी डिवाइस

बेंगलुरु के इंजीनियरों ने RISC-V आधारित किफायती AI कंप्यूटर KEO लॉन्च किया है. 18,999 रुपये से कम लागत वाले इस डिवाइस को सरकारी स्कूलों और ग्रामीण छात्रों तक AI एवं डिजिटल शिक्षा पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है.

KEO AI PC: बेंगलुरु के इंजीनियरों ने ₹18999 से कम लागत में बना दिया AI कंप्यूटर; अब स्कूलों में स्वदेशी डिवाइस
KEO AI PC: ₹18,999 से कम कीमत में AI PC, बेंगलुरु के इंजीनियरों का कमाल
NDTV
बेंगलुरु:

कर्नाटक ने स्वदेशी और किफायती AI कंप्यूटर KEO AI PC को लॉन्च किया है. बेंगलुरु के दो सेमीकंडक्टर इंजीनियरों द्वारा विकसित यह डिवाइस आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमताओं से लैस है और पूरी तरह ओपन-सोर्स तकनीक पर आधारित है. खास बात यह है कि इसे महंगे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर लाइसेंस मॉडल पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है. डेवलपर्स का दावा है कि यह कंप्यूटर छात्रों, सरकारी स्कूलों, ग्रामीण समुदायों और डिजिटल शिक्षा से जुड़ने वाले लोगों के लिए सुलभ तकनीक उपलब्ध कराएगा. राज्य सरकार भी बड़े स्तर पर इसके उपयोग की तैयारी कर रही है.

पहले जान लीजिए KEO नाम का मतलब क्या है?

KEO का पूरा नाम है Knowledge-driven, Economical and Open-source यानी ऐसा सिस्टम जो ज्ञान आधारित, किफायती और ओपन-सोर्स तकनीक पर आधारित हो. डेवलपर्स का कहना है कि यह नाम इस परियोजना की मूल सोच को दर्शाता है, जिसमें तकनीक और AI को केवल बड़े शहरों या महंगे उपकरण रखने वालों तक सीमित न रखकर आम लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.

मुख्यमंत्री ने की बड़ी घोषणा

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए KEO AI PC लॉन्च की जानकारी साझा की. उन्होंने कहा कि यह "मेड इन कर्नाटक" पहल है, जिसका उद्देश्य AI आधारित कंप्यूटिंग को आम लोगों और छात्रों के लिए सुलभ बनाना है. मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य के 239 तालुकों में स्थापित दो-दो मॉडल अरिवु केंद्रों के माध्यम से 8-8 KEO PC लगाए जाएंगे. इसके अलावा 31 मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों में 10-10 कंप्यूटर उपलब्ध कराए जाएंगे. इस योजना के तहत कुल 2,222 KEO AI PC छात्रों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे.

बेंगलुरु के इंजीनियरों की अनोखी पहल

KEO AI PC को बेंगलुरु के दो सेमीकंडक्टर इंजीनियरों ने विकसित किया है. डिवाइस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह ARM और x86 आधारित पारंपरिक कंप्यूटर सिस्टम का एक किफायती विकल्प बन सके. डेवलपर्स के अनुसार उनका लक्ष्य ऐसा प्रोसेसर आधारित सिस्टम तैयार करना था, जिसमें महंगे लाइसेंस और रॉयल्टी मॉडल पर निर्भरता कम हो. इसी वजह से उन्होंने ओपन-सोर्स RISC-V आर्किटेक्चर को चुना.

क्या है RISC-V तकनीक?

RISC-V एक ओपन-स्टैंडर्ड इंस्ट्रक्शन सेट आर्किटेक्चर है, जो डेवलपर्स को बिना बड़े लाइसेंस शुल्क के प्रोसेसर और कंप्यूटिंग सिस्टम विकसित करने की सुविधा देता है. इसी तकनीक की मदद से KEO AI PC को तैयार किया गया है, जिससे इसकी लागत नियंत्रित रखने में मदद मिली. साथ ही यह डिवाइस एज एआई (Edge AI) प्रोसेसिंग की जरूरतों को भी पूरा कर सकता है.

पूरी तरह ओपन-सोर्स इकोसिस्टम

KEO AI PC की सबसे बड़ी खासियत इसका ओपन-सोर्स कंप्यूटिंग इकोसिस्टम है. इसमें RISC-V आधारित प्रोसेसर, Linux Ubuntu ऑपरेटिंग सिस्टम और LibreOffice प्रोडक्टिविटी सूट का उपयोग किया गया है. डेवलपर्स का कहना है कि इससे न केवल लागत कम होती है बल्कि उपयोगकर्ताओं को स्वतंत्र और सुरक्षित डिजिटल वातावरण भी मिलता है.

IISc और IIIT में हुई टेस्टिंग

डिवाइस के निर्माताओं के अनुसार KEO AI PC का परीक्षण भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया. बताया गया है कि परीक्षण के दौरान डिवाइस ने सभी आवश्यक मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया. इससे इसकी तकनीकी विश्वसनीयता को बल मिला है.

छात्रों और ग्रामीण क्षेत्रों पर खास तौर पर फोकस

KEO AI PC को खासतौर पर उन छात्रों के लिए डिजाइन किया गया है, जिनकी महंगे कंप्यूटरों तक पहुंच नहीं है. डेवलपर्स का कहना है कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को AI, डिजिटल शिक्षा और कंप्यूटिंग से जोड़ना इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य है. इसी सोच के तहत इसकी उत्पादन लागत 18,999 रुपये से कम रखने का प्रयास किया गया है, जबकि वैश्विक स्तर पर RAM की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई है.

सरकारी स्कूलों में पहुंचेंगी हजारों डिवाइस

परियोजना को सरकारी स्कूलों तक पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है. डेवलपर्स के अनुसार पिछले एक वर्ष में एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) ने 2,000 से अधिक KEO AI PC खरीदे हैं, जिन्हें कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में वितरित किया जा रहा है. इससे हजारों छात्रों को आधुनिक कंप्यूटिंग सुविधाएं मिलने की उम्मीद है.

यह भी पढ़ें : TikTok पर 3,300 करोड़ रुपये का जुर्माना; बच्चों की सुरक्षा पर कोर्ट सख्त, US के बाद अब यूरोप और UK में जांच

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
AI Computer, Karnataka, Karnataka Government, AI PC, Open Source AI
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com