- कर्नाटक के विजयपुरा जिले की पुलिस ने 12 साल सेवा पूरी करने वाले पुलिस कुत्तों रक्षा और स्टेला का सम्मान किया
- स्टेला ने 600 से अधिक आपराधिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 30 से अधिक आरोपियों की पहचान में मदद की
- रक्षा कुत्ता बम और प्रतिबंधित वस्तुओं का पता लगाने में माहिर था तथा वीवीआईपी सुरक्षा में उपयोग होता था
कर्नाटक के विजयपुरा जिले की पुलिस ने शनिवार को दो अनुभवी पुलिस कुत्तों, रक्षा और स्टेला की 12 साल की सेवा पूरी होने के मौके पर एक समारोह आयोजित किया. पुलिस अधीक्षक लक्ष्मण निंबर्गी ने जिले में अपराध का पता लगाने और सुरक्षा में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए इन कुत्तों को सम्मानित किया. एसपी ने दोनों कुत्तों की सेवानिवृत्ति की घोषणा करते हुए बताया कि कैसे इन कुत्तों ने पुलिस को 600 आपराधिक मामलों में 30 से अधिक आरोपियों की पहचान करने में मदद की है.
VIDEO | Vijayapura SP Lakshman Nimbargi honours police dogs Stella and Raksha for 12 years of dedicated service; new canine partners Yoga and Veda to take over duties in city police force.
— Press Trust of India (@PTI_News) February 21, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/2So5oFLCR5
एसपी लक्ष्मण निंबर्गी ने कहा कि स्टेला ने 600 से अधिक आपराधिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विभाग को 30 से अधिक आरोपियों की पहचान करने में मदद की. उन्होंने कहा कि अपराध का पता लगाने में उसके योगदान की विभाग द्वारा विशेष रूप से सराहना की जाती है.
रक्षा कुत्ता, बम और प्रतिबंधित वस्तुओं का पता लगाने में माहिर है और इसका इस्तेमाल वीवीआईपी सुरक्षा प्रणाली में भी प्रमुखता से किया जाता था. इन दोनों कुत्तों की सेवानिवृत्ति विभाग के लिए एक भावुक क्षण था, जिसमें पुलिस अधिकारियों ने उनकी सेवाओं को याद किया.

इस बीच, एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 150 से अधिक भारतीय नस्ल के कुत्तों को पश्चिमी और पूर्वी सीमाओं सहित कई परिचालन क्षेत्रों में और नक्सल विरोधी अभियानों में तैनात किया गया है, और उन्होंने अच्छे परिणाम दिए हैं. बयान के अनुसार, उनके सराहनीय प्रदर्शन ने महत्वपूर्ण सुरक्षा और ऑपरेशनल रोल में भारतीय ब्रीड को इंटीग्रेटेड करने के फैसले को सही साबित किया है.

उत्तर प्रदेश की रामपुर रियासत से आए रामपुर हाउंड को ऐतिहासिक रूप से नवाबों द्वारा सियार और बड़े जानवरों के शिकार के लिए पाला जाता था. यह नस्ल अपनी गति, सहनशक्ति और निडरता के लिए जानी जाती है.

बयान में कहा गया है, "बीएसएफ न केवल एनटीसीडी टेकानपुर में इन स्वदेशी नस्लों को प्रशिक्षित कर रहा है, बल्कि एनटीसीडी और विभिन्न फील्ड फॉर्मेशन में प्रजनन और प्रसार में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है." यह पहल अब सहायक K9 प्रशिक्षण केंद्रों तक विस्तारित हो गई है, जिससे सुरक्षा बलों में भारतीय नस्ल के कुत्तों का बड़े पैमाने पर विकास और तैनाती सुनिश्चित हो रही है.
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