- कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें अक्सर उठती रहती हैं लेकिन कांग्रेस ने कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की
- CM सिद्धारमैया को कांग्रेस के 136 विधायकों में से 100 से अधिक का समर्थन प्राप्त है
- उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार को गृह विभाग दिए जाने की संभावना है ताकि उनके समर्थकों को भी संतुष्ट किया जा सके
कनार्टक में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें हर कुछ महीनों में लगती रहती है. जब भी कनार्टक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया या उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार का दिल्ली आने का प्रोग्राम बनता है मीडिया में यब खबर चलने लगती है कि कनार्टक में मुख्यमंत्री बदलने जा रहा है. ये भी कहा जाता है कनार्टक में ढाई-ढाई साल का मुख्यमंत्री बनने की बात हुई थी जिसमें सिद्धारमैया और डी के शिवकुमार के बीच समय का बंटवारा होना था. लेकिन इसकी पुष्टि कांग्रेस से किसी ने कभी नहीं की कि ऐसा कोई वादा किया गया भी था या नहीं.
सिद्धारमैया के पास 100 से ज्यादा विधायकों का समर्थन
दिल्ली में कांग्रेस के कई नेताओं से बातचीत कर यह पता चलता है कि कनार्टक के मुख्यमंत्री के तौर पर सिद्धारमैया की कुर्सी बची हुई है इसका सबसे बड़ा कारण है कि वो पिछड़ी जाति से आते हैं. मौजूदा समय में कांग्रेस के इन जातियों से आने वाले इकलौते मुख्यमंत्री हैं. दूसरी बात है कि विधायकों में सिद्धारमैया का समर्थन है. कांग्रेस के 136 विधायकों में से सिद्धारमैया को 100 से अधिक विधायकों का समर्थन है. 224 की कनार्टक विधानसभा में कांग्रेस के पास 140 विधायकों का समर्थन है. मगर इसके एवज में डी के शिवकुमार को क्या मिलेगा जिससे कि उनको शांत भी कराया जा सके और खुश भी रखा जा सके.

इसके अलावा कर्नाटक में तीन राज्यसभा की सीटों के लिए चुनाव होने हैं इसमें से एक सीट पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे आएंगे और एक सीट डी के शिवकुमार के भाई डी के सुरेश को दी जा सकती है. 2024 के लोकसभा चुनाव में डी के शिवकुमार के भाई चुनाव हार गए थे. दरअसल 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन की वजह से डी के शिवकुमार की दिल्ली में पकड़ थोड़ी कमजोर हुई. डी के शिवकुमार 2020 से कनार्टक कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और पिछले चुनाव में कांग्रेस को कर्नाटक की 28 सीटों में से केवल 9 सीटों पर ही सफलता मिली.
क्यों उलझा है कर्नाटक का मामला?
कनार्टक का मामला इसलिए भी थोड़ा उलझा हुआ है क्योंकि कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे वहीं से आते हैं और जीवन भर उन्होंने वहीं की राजनीति की है ऐसे में राहुल गांधी के लिए उनकी राय महत्वपूर्ण हो जाती है. उनके बेटे प्रियांक खरगे अभी ग्रामीण विकास,पंचायती राज और आईटी मंत्री हैं.

सिद्धारमैया को दिल्ली बुलाया गया है उन्होंने खुद कहा है कि के सी वेणुगोपाल का फोन उन्हें आया था और मंगलवार को कांग्रेस आलाकमान से उनकी मुलाकात होनी है. अब सवाल ये है कि यदि उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाया जाता है तो क्या उन्हें राज्यसभा में लाया जाएगा और एआईसीसी में उन्हें कोई पद दिया जाएगा और उनके बेटे यतीन्द्र को विधायक बना कर मंत्री बनाया जाएगा. फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि कनार्टक में मुख्यमंत्री पद की लड़ाई का अगला अध्याय दिल्ली में ही खेला जाएगा.
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