- PM/CM 30 दिनों तक हिरासत में रहने पर उन्हें पद से हटाने का प्रावधान तीन महत्वपूर्ण विधेयकों में शामिल है.
- JPC की छठी बैठक में 130वां संविधान संशोधन और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक सहित तीन विधेयकों पर चर्चा हुई.
- समिति ने कानूनी और प्रशासनिक विशेषज्ञों के साथ विधेयकों के प्रावधानों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया.
PM और CM के पदों से संबंधित 3 महत्वपूर्ण विधेयकों की समीक्षा के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बुधवार को अहम बैठक हुई. इन विधेयकों में प्रावधान है कि यदि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री 30 दिनों तक हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें पद से हटाया जा सकता है. बैठक में 130वां संविधान संशोधन विधेयक 2025, जम्मू एवं कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025 और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार (संशोधन) विधेयक 2025 पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया. 31 सदस्यों वाली इस जेपीसी की यह छठी बैठक थी, जो करीब तीन घंटे तक चली.
समिति ने इस दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ इन विधेयकों के कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर चर्चा की. बैठक में मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य शासन सचिव के अलावा , PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च और इंडियन लॉ इंस्टिट्यूट के वरिष्ठ प्रतिनिधि पेश हुए.
बैठक के बाद अपराजिता सारंगी ने एनडीटीवी से कहा, "सभी ने राजनीति के अपराधीकरण के खिलाफ भारत सरकार की मुहिम का समर्थन किया है. सरकार चाहती है कि पॉलिटिक्स को डेक्रिमिनलाइज़ किया जाये। मध्य प्रदेश सरकार ने सम्पूर्ण समर्थन दिया है. इससे पहले राजस्थान सरकार के प्रतिनिधियों ने भी समर्थन किया था. इसके अलावा दो दूसरे संस्थाओं ने बिल में परिवर्तन का सुझाव दिया है".
अब तक 14 संस्थाओं और 2 राज्य सरकारों ने जॉइंट पार्लियामेंट्री कमिटी के सामने प्रेजेंटेशन किया है. जॉइंट पार्लियामेंट्री कमिटी ने राज्यों का भी दौरा करने का फैसला किया है, जिस दौरान मुख्यमंत्रियों के साथ तीनों महत्वपूर्ण विधायकों पर चर्चा की जाएगी. आज एक सुझाव बैठक में दिया गया कि गैर-एनडीए शासित राज्यों के अधिकारीयों को भी बैठक में बुलाया जाये.
अपराजिता सारंगी ने कहा, "हमने आने वाले दिनों में विपक्ष-शासित राज्यों को चर्चा के लिए बुलाने का फैसला किया है. हम पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तेलंगाना सरकार के मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों को बुलाएंगे। जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं अभी हमने उनको नहीं बुलाने का फैसला किया है".
यह विधेयक अगस्त, 2025 में लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किया गया था. इस विधेयक में यह प्रावधान है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, या किसी भी केंद्रीय/राज्य मंत्री को किसी गंभीर आपराधिक आरोप में गिरफ्तार किया जाता है और वह लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, तो उसे 31वें दिन अपने पद से इस्तीफा देना होगा या वह स्वतः ही पद से हट जाएगा.
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