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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत क्यों खत्म हुई? दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में बताई बड़ी वजह

पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनों के दौरान लगने वाले जाम से मरीजों और एंबुलेंस की आवाजाही प्रभावित होती है, जिससे आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में बाधा आने का खतरा रहता है.

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत क्यों खत्म हुई? दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में बताई बड़ी वजह
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थल मामले पे अपना पक्ष रखा है.

जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है. दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने जवाबी हलफनामा दाखिल कर अदालत से इस फैसले में हस्तक्षेप न करने की अपील की है. पुलिस का कहना है कि बदलते हालात, सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों की सुरक्षा को देखते हुए यह कदम उठाया गया.

गृह मंत्रालय की समिति ने दी थी सिफारिश

हलफनामे में बताया गया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 28 अगस्त 2026 को एक समिति का गठन किया था. समिति ने जंतर-मंतर की मौजूदा स्थिति का आकलन करने के बाद इसे धरना और प्रदर्शन के लिए उपयुक्त नहीं माना. समिति की रिपोर्ट सितंबर 2026 में गृह मंत्रालय को सौंपी गई और 14 सितंबर को दिल्ली पुलिस को भेजी गई.

तीन वैकल्पिक स्थलों का सुझाव

समिति ने प्रदर्शन और धरनों के लिए रामलीला मैदान, सेंट्रल दिल्ली स्थित सीबीडी ग्राउंड और बुराड़ी ग्राउंड को वैकल्पिक स्थान के तौर पर चिन्हित किया था. दिल्ली पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन करने का अधिकार महत्वपूर्ण है लेकिन इसके लिए उपयुक्त और सुरक्षित स्थान का चयन भी जरूरी है.

क्षमता से अधिक भीड़ बनने लगी चुनौती

हलफनामे के अनुसार जंतर-मंतर की अधिकतम क्षमता करीब 1,500 लोगों की है जबकि यहां हर वर्ष औसतन 1,300 से अधिक धरने और प्रदर्शन आयोजित होते हैं. पुलिस ने बताया कि 20 जुलाई 2026 को प्रदर्शनकारियों की संख्या निर्धारित क्षमता से ज्यादा हो गई थी जिससे जनपथ और कनॉट प्लेस समेत आसपास के इलाकों में भीड़ और यातायात प्रभावित होने का खतरा पैदा हुआ.

दूतावासों और सरकारी दफ्तरों का भी मुद्दा

दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि जंतर-मंतर से तीन से चार किलोमीटर के दायरे में 78 विदेशी दूतावास और राजनयिक मिशन तथा केंद्र सरकार के 99 कार्यालय मौजूद हैं. इसके अलावा इस इलाके में रोजाना लगभग 1.46 लाख लोगों की आवाजाही होती है. करीब 7,017 निजी और 99 सरकारी आवासीय इकाइयां भी इसी क्षेत्र में हैं.

हलफनामे में राम मनोहर लोहिया अस्पताल का भी जिक्र किया गया है. पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनों के दौरान लगने वाले जाम से मरीजों और एंबुलेंस की आवाजाही प्रभावित होती है जिससे आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में बाधा आने का खतरा रहता है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी हवाला

दिल्ली पुलिस ने 23 जुलाई 2018 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा है कि अदालत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को मौलिक अधिकार माना था लेकिन यह भी स्पष्ट किया था कि किसी विशेष स्थान पर प्रदर्शन करने का असीमित अधिकार नहीं है. पुलिस के अनुसार इसी आदेश के आधार पर 2018 में स्टैंडिंग ऑर्डर जारी किया गया था जिसे 28 अप्रैल 2022 को संशोधित किया गया.

दो महीने में सैकड़ों शिकायतें दर्ज

हलफनामे में कहा गया है कि 1 अगस्त से 27 अगस्त 2026 के बीच जंतर-मंतर क्षेत्र में 250 डिस्ट्रेस कॉल दर्ज हुईं. इस दौरान चोरी से जुड़ी 109 एफआईआर, वाहन चोरी के 10 मामले, मारपीट से संबंधित 254 शिकायतें और अन्य अपराधों की घटनाएं भी दर्ज की गईं.

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि प्रदर्शन के अधिकार और आम नागरिकों के आवागमन, रोजगार, कारोबार तथा सार्वजनिक व्यवस्था के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है. इसी आधार पर अदालत से याचिका खारिज करने और जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में दोबारा अधिसूचित करने के मामले में हस्तक्षेप न करने का अनुरोध किया गया है.

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