हिमाचल प्रदेश के गवर्नर कविंदर गुप्ता ने सीजेपी यानी 'कॉकरोच जनता पार्टी' विरोध प्रदर्शन के मकसद पर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि यह आंदोलन अब अपने शुरुआती मुद्दों से आगे बढ़ चुका है और इसका इस्तेमाल किसी बड़े एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है. NDTV के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में गवर्नर ने कहा कि अगर प्रदर्शनकारी अपनी शुरुआती मांगों तक ही सीमित रहते, तो यह स्वीकार्य होता. लेकिन उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान लगाए जा रहे नारे और दिखाए जा रहे पोस्टर कुछ और ही इरादा जाहिर करते हैं.
कविंदर गुप्ता ने कहा, "लोकतंत्र में अपनी राय रखना जरूरी है, लेकिन जब 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' गैंग विरोध प्रदर्शन पर कब्जा कर ले या हिंदुत्व के बारे में गलत बातें कही जाएं, तो यह समझने की जरूरत होती है कि इस विरोध प्रदर्शन के पीछे असल मकसद क्या है."
उन्होंने आगे कहा कि विरोध की वजह अब खत्म हो चुकी है. NEET परीक्षा हो चुकी है, नतीजे भी आ गए हैं. लोगों ने जश्न भी मनाया है. इसलिए अब मुझे समझ नहीं आ रहा कि यह विरोध किसलिए हो रहा है.
'लोगों को उकसाया जा रहा...'
कविंदर गुप्ता से जब पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि यह प्रोटेस्ट स्पॉन्सर्ड है, तो गवर्नर ने हां में जवाब दिया. उन्होंने कहा, "किसी तरह लोगों को उकसाया जा रहा है. भारत को बर्बाद करने के सपने बुने जा रहे हैं. यह उसी 'टूलकिट' का हिस्सा है."
उन्होंने आगे कहा, "जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसके पीछे कोई और मकसद है. यह देश को बर्बादी की ओर धकेलने की कोशिश है."
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पेपर लीक मुद्दे पर क्या बोले राज्यपाल?
कविंदर गुप्ता ने सरकार के खिलाफ गुस्से को ऐतिहासिक मुद्दों पर किए जा रहे सुधारात्मक उपायों से भी जोड़ा. उन्होंने कहा, "मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि जब गलत इतिहास को सुधारा जा रहा है, तो कई लोग इससे नाराज हैं. धर्मेंद्र प्रधान उस गुस्से की वजह बन रहे हैं."
इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के बयान का जिक्र करते हुए गवर्नर ने कहा कि ऐसे विरोध अब खत्म हो जाने चाहिए. उन्होंने कहा, "जब प्रधानमंत्री ने खुद इस पर बात की है और वे एक जिम्मेदार शख्स हैं, तो 'मैं इसे नहीं मानूंगा' वाली राजनीति खत्म होनी चाहिए."
पेपर लीक के मामले पर राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने कहा कि सरकार सिस्टम में सुधार लाने के लिए तैयार है. पेपर लीक के मामले पहले भी हुए हैं. ऐसा दोबारा न हो, इसके लिए हमें एक फुलप्रूफ सिस्टम की जरूरत है. जिन मामलों में छात्रों के साथ धोखाधड़ी हुई, उनमें कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है. भविष्य में भी सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रधानमंत्री जो कहते हैं, वह करके दिखाते हैं.
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