देश में इन दिनों आरक्षण पर बहस तेज है. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने पर उनकी राय पूछी है.यह याचिका बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने दाखिल की है. उनकी दलील है कि सरकारी नौकरी या संवैधानिक पद पाने वाले एससी-एसटी वर्ग के लोगों को आरक्षण के दायरे से बाहर रखा जाए. यह दलील पिछले काफी समय से दी जा रही है कि एससी-एसटी आरक्षण में भी आर्थिक स्थिति को आधार बनाया जाए. इस तरह की व्यवस्था अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में पहले से ही लागू है. सुप्रीम कोर्ट के रुख में भी इसको लेकर काफी बदलाव आया है.
संविधान के किस अनुच्छेद के तहत मिलता है आरक्षण
एससी-एसटी आरक्षण की व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) के तहत की गई है. संविधान के ये अनुच्छेद राज्य को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में विशेष प्रावधान (जैसे आरक्षण) की इजाजत देते हैं. इसका मकसद इन वर्गों को समाज के मुख्यधारा में शामिल करना और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराना है. इन्हें पहले संविधान संशोधन (1951) के जरिए जोड़ा गया. इसमें से 15(4) शिक्षा और 16(4) सरकारी नौकरियों में आरक्षण से जुड़ा है. एससी-एसटी वर्ग को आरक्षण उनकी ऐतिहासिक सामाजिक वंचना के आधार पर दिया गया था, उनके आर्थिक हैसियत के आधार पर नहीं.एससी-एसटी के लोगों से भेदभाव आर्थिक आधार पर नहीं, बल्कि उनकी जातीय पहचान की वजह से होता है.
एससी-एसटी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की राय
इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट की राय समय-समय पर बदलती रही है. आरक्षण के मामले में 1992 में इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार मामले आए फैसले को सबसे निर्याणक मामला माना जाता है. इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों के पीठ ने ओबीसी आरक्षण को वैध ठहराया था.इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण में क्रीमी लेयर को लागू करने का आदेश दिया था. लेकिन एससी-एसटी आरक्षण को क्रीमी लेयर से बाहर रखा था. इसमें अदालत का तर्क था कि एससी-एसटी की वंचना का मूल कारण सामाजिक भेदभाव है, आर्थिक स्थिति नहीं है.
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में एम नागराज बनाम भारत सरकार मामले में एससी-एसटी को पदोन्नति में आरक्षण की इजाजत दी. अदालत ने पदोन्नति में आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग को खारिज कर दिया था. इस फैसले में भी सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा कि एससी-एसटी आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक पिछड़ेपन की भरपाई करना है.

आर्थिक स्थिति के आधार पर एससी-एसटी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के रुख में बाद के सालों में बदलाव आया. सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में जरनैल सिंह बनाम लक्ष्मी नारायण गुप्ता मामले में एससी-एसटी के लिए पदोन्नति में आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' लागू करने का संकेत दिया. अदालत का कहना था कि एससी-एसटी के जो लोग आर्थिक और सामाजिक रूप से उन्नत हो चुके हैं, आरक्षण से बाहर किया जा सकता है.
क्या आरक्षण गरीबी हटाने का फार्मूला है
केंद्र सरकार ने साल 2019 में 103वें संविधान संशोधन के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्लूएस) के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान कर दिया. इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन कर अनुच्छेद 15(6) और 16(6) जोड़े गए. इस संशोधन से अनारक्षित वर्ग के गरीबों को आरक्षण दिया गया है. इसी तरह के एक प्रयास को सुप्रीम कोर्ट ने उस समय नकार दिया था जब 1991 में जब पीवी नरसिंह राव की कांग्रेस सरकार ने आर्थिक आधार पर 10 फीसद आरक्षण देने का प्रस्ताव किया था. सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय पीठ इस फैसले से असहमति जताई थी. अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, "संविधान में आरक्षण का प्रावधान सामाजिक गैर-बराबरी दूर करने के मकसद से रखा गया है, इसलिए इसका इस्तेमाल गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तौर पर नहीं किया जा सकता." लेकिन ईडब्लूएस आरक्षण का प्रावधान लागू होने के बाद एससी-एसटी आरक्षण में भी क्रीम लेयर की मांग तेज हो गई और सुप्रीम कोर्ट का रुख भी बदलने लगा.
सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में स्टेट ऑफ पंजाब बनाम दविंदर सिंह मामले में आरक्षण के भीतर आरक्षण का रास्ता साफ कर दिया. इसके साथ ही अदालत ने आर्थिक आधार पर आरक्षण में आरक्षण का भी संकेत दिया. इस मामले में पंजाब सरकार ने कोर्ट के सामने ये तर्क रखा था कि एससी में सभी जातियां एक समान नहीं हैं. केंद्र सरकार ने भी ऐसी ही राय रखते हुए दलील दी थी कि एससी-एसटी आरक्षण में उप वर्गीकरण की इजाजत मिलनी चाहिए.
अदालत आरक्षण में आरक्षण देने की पक्षधर तो है, लेकिन यह विभाजन कैसे होगा, इसके लिए आंकड़े कैसे जुटाए जाएंगे, इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है.हालांकि ऐसा कई बार हुआ है कि अदालतों ने सरकार के ठीक से आंकड़ा इकट्ठा नहीं करने की बात कहते हुए आरक्षण को किसी वर्ग को दिए गए आरक्षण को खारिज कर दिया है.
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