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एक राष्ट्र, एक चुनाव : महिलाओं के लिए क्यों खास, समझिए

डॉ. निहारिका शर्मा
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    जनवरी 13, 2026 11:14 am IST
    • Published On जनवरी 13, 2026 11:14 am IST
    • Last Updated On जनवरी 13, 2026 11:14 am IST
एक राष्ट्र, एक चुनाव : महिलाओं के लिए क्यों खास, समझिए

भारतीय लोकतंत्र में एक राष्ट्र, एक चुनाव की संकल्पना केवल चुनावी प्रक्रिया के सरलीकरण तक सीमित नहीं है; यह महिलाओं के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक ऐतिहासिक अवसर प्रस्तुत करती है. समन्वित चुनाव व्यवस्था नीति-निरंतरता, संसाधनों के कुशल प्रबंधन और दीर्घकालिक रणनीति को सक्षम बनाती है, जिससे महिलाओं को निर्णय-निर्माण के मंचों पर स्थायी, सशक्त और प्रभावशाली भूमिका निभाने का अवसर मिलता है.

महिलाओं के लिए अवसर 

अंतरराष्ट्रीय अनुभव दर्शाते हैं कि नियमित और स्थिर चुनाव प्रणालियां महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देती हैं. इंडोनेशिया में 1997 से 2024 के बीच महिला संसद सदस्यों का प्रतिनिधित्व लगभग 9.6 प्रतिशत बढ़ा; दक्षिण अफ्रीका में यह 25 प्रतिशत से बढ़कर 44–45 प्रतिशत तक पहुंचा; जबकि स्वीडन में 1991 के 33 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 45 प्रतिशत हो गया. ये उदाहरण संकेत देते हैं कि स्थिर चुनाव व्यवस्था महिलाओं को दीर्घकालिक राजनीतिक रणनीति, नेतृत्व कौशल और संस्थागत अनुभव विकसित करने के अवसर प्रदान करती है. इसी दृष्टि से भारत में एक राष्ट्र, एक चुनाव महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और प्रभाव को सुदृढ़ कर सकता है.

महिलाओं को मिलेंगे समान अवसर 

नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान महिला राजनीतिक सहभागिता को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है. समकालिक चुनाव होने पर महिला आरक्षित सीटों का पुनर्गठन, उम्मीदवार चयन तथा राजनीतिक दलों की रणनीतिक तैयारी एकीकृत रूप से संभव होगी. परिणामस्वरूप, महिला आरक्षण केवल संवैधानिक प्रावधान न रहकर व्यवहार में प्रभावी सिद्ध होगा और महिलाओं को राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर समान अवसर प्राप्त होंगे.


वन नेशन, वन इलेक्शन क्यों खास 

एक राष्ट्र, एक चुनाव महिलाओं के लिए नीतिगत और आर्थिक लाभ भी सुनिश्चित करता है. बार-बार होने वाले चुनावों के कारण महिला-केंद्रित योजनाएं जैसे पोषण अभियान, बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ, मिशन शक्ति, महिला उद्यमिता प्रोत्साहन तथा स्टार्ट-अप इंडिया के अंतर्गत महिला उद्यमियों को वित्तीय सहायता अक्सर प्रभावित होती हैं. समन्वित चुनाव होने पर इन योजनाओं को निरंतर, समन्वित और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है.
इसके अतिरिक्त, लगभग 90 लाख आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता—जिनमें बहुसंख्यक महिलाएं हैं, को बार-बार चुनावी ड्यूटी में लगाने से उनकी मूल सेवाएं प्रभावित होती हैं. समन्वित चुनाव से उनकी पूरी क्षमता स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण तथा महिला-बाल कल्याण के कार्यों में नियोजित की जा सकेगी.

सक्रिय भूमिका निभाने के अवसर 

राजनीतिक दृष्टि से, समन्वित चुनाव महिला नेतृत्व को स्थायी और प्रभावी मंच प्रदान करते हैं. राजनीतिक स्थिरता से महिला प्रतिनिधियों को नीति-निर्माण, संसदीय बहस और स्थानीय शासन में सक्रिय भूमिका निभाने के पर्याप्त अवसर मिलते हैं. राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए महिलाओं से जुड़े मुद्दों जैसे मातृ स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और महिला उद्यमिता पर केंद्रित दीर्घकालिक नीतियां और कार्यक्रम विकसित करना संभव होता है. अध्ययनों से संकेत मिलता है कि महिला प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की समयबद्ध क्रियान्विति 20–25 प्रतिशत अधिक प्रभावी होती है और भ्रष्टाचार की दर 1–2 प्रतिशत तक कम पाई गई है.

योजनाएं समयबद्ध से होंगी लागू 

सामाजिक स्तर पर, एक राष्ट्र, एक चुनाव लैंगिक समावेशन और समान अवसरों को सुदृढ़ करता है. भारत में महिला मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी अब लगभग 65–67 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है. संगठित चुनाव प्रक्रिया से यह राजनीतिक शक्ति अधिक संगठित रूप में नीति-निर्माण को प्रभावित कर सकती है. पंचायतों और विधानसभाओं में महिला प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और जल-स्वच्छता से जुड़ी योजनाएं अधिक प्रभावी और समयबद्ध ढंग से लागू होती हैं,


आर्थिक दृष्टि से, बार-बार चुनावों पर होने वाला भारी सार्वजनिक व्यय बचाकर उसे महिला स्वयं-सहायता समूहों, कौशल विकास, मातृ-स्वास्थ्य और बालिका शिक्षा में निवेश किया जा सकता है. स्थिर और दीर्घकालिक बजट निर्माण महिला-केंद्रित योजनाओं को अधिक परिणामोन्मुख बनाता है. उदाहरणस्वरूप, स्टार्ट-अप इंडिया और मुद्रा योजना के अंतर्गत महिला उद्यमियों के लिए वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण कार्यक्रम बार-बार चुनावी व्यस्तताओं के कारण प्रभावित होते हैं; समन्वित चुनाव इन्हें सुचारू रूप से संचालित करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं.


एक राष्ट्र, एक चुनाव महिलाओं के लिए केवल एक चुनावी सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक सशक्तिकरण का एक संरचनात्मक उपाय है। यह महिला आरक्षण को व्यवहार में प्रभावी बनाता है, नीति-निरंतरता सुनिश्चित करता है, बजट और संसाधनों के जेंडर-संवेदनशील उपयोग को संभव बनाता है तथा महिला प्रशासनिक और राजनीतिक क्षमता के पूर्ण उपयोग का मार्ग प्रशस्त करता है. इसके परिणामस्वरूप महिलाओं की निर्णायक राजनीतिक भागीदारी, शासन की गुणवत्ता में सुधार, भ्रष्टाचार में कमी और सरकारी योजनाओं की सफलता सुनिश्चित की जा सकती है। यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण के एजेंडे को स्थायी, संगठित और प्रभावशाली रूप में साकार करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है.

(अस्वीकरण: इस लेख में दिए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत  होना जरूरी नहीं है.)

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