भारतीय नौसेना ने समुद्र में एक बेहद जोखिम भरा अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया है. नौसेना ने एक तेल टैंकर के भीतर फंसे मिसाइल के जिंदा वारहेड को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला. इसके बाद उसे निष्क्रिय कर दिया गया. यह ऑपरेशन कई दिनों की तैयारी और सावधानी के बाद पूरा किया गया. नौसेना का कहना है कि इस दौरान जहाज, उसके चालक दल और बंदरगाह की सुरक्षा को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी गई.
क्या था पूरा मामला?
यह घटना कच्चा तेल ले जाने वाले टैंकर एमटी ओलंपिक लाइफ से जुड़ी है. यह जहाज संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा बंदरगाह से कोच्चि आ रहा था. 26 मई 2026 को ओमान के तट के पास जहाज में एक विस्फोट की सूचना मिली. शुरुआती जांच में पता चला कि जहाज के ढांचे को किसी प्रोजेक्टाइल या मिसाइल के हिस्से ने नुकसान पहुंचाया है. बाद में यह भी सामने आया कि एक विस्फोट न हुआ मिसाइल वारहेड जहाज के अंदर मौजूद है. हालांकि, इसके बावजूद जहाज अपनी यात्रा जारी रखते हुए भारत की ओर बढ़ता रहा.

कैसे मिली जानकारी?
इस घटना की जानकारी हिंद महासागर क्षेत्र के सूचना समन्वय केंद्र (IFC-IOR) को दी गई . सूचना मिलते ही भारतीय नौसेना सक्रिय हो गई. कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान ने विशेषज्ञ बम निरोधक दल को मौके पर भेजा . विशेषज्ञों की टीम ने जहाज का विस्तार से निरीक्षण किया. जांच में जो जानकारी सामने आई, उसने खतरे की गंभीरता को और बढ़ा दिया.
ईंधन टैंक तक पहुंच गया था वारहेड
जांच में पता चला कि मिसाइल का हिस्सा जहाज के बाहरी ढांचे को भेदकर अंदर तक पहुंच गया था. वह कई हिस्सों से गुजरते हुए ईंधन टैंक में जाकर फंस गया था. यही सबसे बड़ी चिंता थी. ईंधन टैंक में मौजूद किसी भी विस्फोटक से बड़ा हादसा हो सकता था. अगर वारहेड फट जाता तो जहाज को भारी नुकसान पहुंच सकता था.चालक दल की जान भी खतरे में पड़ सकती थी. साथ ही आसपास के समुद्री क्षेत्र और बंदरगाह पर भी असर पड़ सकता था.
बेहद सावधानी से चला अभियान
नौसेना की बम निरोधक टीम ने जल्दबाजी करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से काम किया. सबसे पहले पूरे इलाके को सुरक्षित बनाया गया. इसके बाद वारहेड की तकनीकी जांच शुरू हुई. विशेषज्ञों ने आधुनिक उपकरणों की मदद से उसकी स्थिति का आकलन किया. उन्होंने यह पता लगाया कि विस्फोटक तंत्र किस स्थिति में है. इसके बाद वारहेड को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू की गई. कई घंटे की मेहनत के बाद टीम ने वारहेड को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल लिया. उसके साथ मिले मलबे को भी हटाया गया.

आगे क्या होगा?
नौसेना ने बरामद वारहेड को एक सुरक्षित स्थान पर भेज दिया है. वहां इसकी विस्तृत जांच की जाएगी. विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि यह वारहेड कहां से आया और जहाज तक कैसे पहुंचा. जांच से घटना के पीछे की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है.
नौसेना की क्षमता का प्रदर्शन
इस पूरे अभियान को भारतीय नौसेना की बड़ी सफलता माना जा रहा है. ऐसे ऑपरेशन बेहद जोखिम भरे होते हैं. छोटी सी गलती भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है. लेकिन नौसेना की विशेषज्ञ टीम ने पूरे अभियान को बिना किसी नुकसान के पूरा किया. इससे विस्फोटक निष्क्रिय करने की उसकी क्षमता और तकनीकी विशेषज्ञता का भी पता चलता है.
समुद्र में भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार
भारतीय नौसेना ने कहा है कि समुद्र में किसी भी आपात स्थिति में वह मदद के लिए तैयार रहती है. इस मामले में जहाज विदेशी था और उस पर कोई भारतीय नागरिक भी सवार नहीं था. इसके बावजूद नौसेना ने तुरंत कार्रवाई की. यह दिखाता है कि भारत सिर्फ अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा ही नहीं करता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. समुद्र में संकट के समय त्वरित प्रतिक्रिया और पेशेवर कार्रवाई भारतीय नौसेना की पहचान बन चुकी है. एमटी ओलंपिक लाइफ पर चला यह अभियान उसी का एक और उदाहरण है. इससे एक संभावित बड़ा हादसा टल गया और समुद्र में सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकी.
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