Vaibhav Sooryavanshi V/S Afghanistan 'A': वैभव सूर्यवंशी पिछले करीब तीन महीने में कई पहलुओं से बड़े हुए हैं. और नया पहलू है आलोचना! और जो कर रहे हैं, उन्हें आलोचक कहना भी शायद सही नहीं होगा. यह वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) का बढ़ता कद ही था कि सोनी चैनल भारत 'A' बनाम श्रीलंका 'A' और अफगानिस्तान 'A' भागीदारी वाली टीमों की ट्राई सीरीज का सीधा प्रसारण करने पर मजबूर हो गया. न जाने कितने ही करोड़ों लोगों ने फिर से सोनी का सब्सक्रिप्शन सिर्फ वैभव के लिए ही रिन्यू किया होगा, लेकिन बेवजह की मीनमेख निकालना भी बढ़ते कद की ही निशानी है. श्रीलंका 'A' के खिलाफ पिछले मैच में 14 रन बनाने वाले सूर्यवंशी ने 22 गेंदों पर 9 चौकों से 44 रन बनाए, तो सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स (आलोचक नहीं) की बाढ़ सी आ गई. वास्तव में विघ्नसंतोषी कभी संतुष्ट नहीं होते. अगर ऐसा होता, तो इन्हें वैभव की पारी में ढूंढने पर अनगिनत पॉजिटिव मिल जाते. चलिए आप उन 4 बड़े पॉजिटिव पर नजर दौड़ लीजिए, जो वैभव की अफगानिस्तान A के खिलाफ 44 रन की पारी में दिखाई पड़े.
1. जरूरत के हिसाब से तेजी से ढालना
चंद दिनों पहले तक वैभव टी20 फॉर्मेट खेल रहे थे. पावर-प्ले के शुरुआती 6 ओवरों में दुनिया भर के बड़े बॉलरों का मानमर्दन कर रहे थे. जब बल्लेबाज ऐसी शैली का होता है, तो उसे अपने मन और इसके साथ खेल पर नियंत्रण करना बहुत ही मुश्किल होता है. और जब यह 'बाल मन' हो, तो गलती के आसार भी ज्यादा होते हैं, लेकिन वैभव ने चंद दिनों के भीतर ही खुद को फिफ्टी-फिफ्टी फॉर्मेट में क्या खूब अंदाज में ढाला. और कितने छोटे से समय अंतराल पर ढाला. यह बताने को काफी है कि बल्लेबाज के लिए जरूरी परिपक्वता (फॉर्मेट विशेष का टेम्प्रामेंट, समझ, शॉट चयन, इच्छा नियंत्रण..वगैरह..वगैरह) में कितनी जल्दी बड़ी हो रहे हैं. यही वह गुण है, जिसे संभालकर रखने की सूरत में यह वैभव को जल्द से जल्द सफलता के सूरज तक लेकर जाएगा
A RUTHLESS START. 🔥
— Sony Sports Network (@SonySportsNetwk) June 11, 2026
Vaibhav Sooryavanshi comes out firing, smashing 44 off just 22 balls. 🚀
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2. यह 44 रन की पारी बहुत खास है!
किसी पारी की कई यूएसपी हो सकती हैं, कोई एक बड़ी यूएसपी (खास बात) यही है कि वैभव ने पावर-प्ले (वनडे में 10, जब 30 गज के घेरे के बाहर 2 ही फील्ड होते हैं) में एक भी हवाई शॉट नहीं ही खेला. मतलब इस फॉर्मेट के लिए उनकी प्लानिंग एकदम साफ थी कि क्या करना है क्या नहीं. और बिना एक भी छक्के या बिना इरादतन हवाई शॉट के बगैर ही वैभव ने 22 गेंदों पर 44 रन बना दिए. यूं तो वैभव पहले भी अनेकों बार इस फॉर्मेट में टेम्प्रामेंट का प्रमाण दे चुके हैं. मसलन अंडर-19 विश्व कप में 175 रन, लेकिन यह पारी एक अलग प्लान, अलग मनोदशा, अलग एप्रोच के साथ खेली गई. और यह बताने के लिए काफी है कि वह इस स्तर की टीम इंडिया के साथ और टीम हित में अपने खेल में तब्दीली करने के लिए तैयार हैं
3. जरूरत के हिसाब से डिफेंस भी, शॉट कटौती भी
इस 44 रन की पारी से वैभव ने यह भी दिखाया कि वह टीम और अपने हित के लिए शॉटों में कटौती भी करेंगे, तो गेंद अच्छी होगी, तो उसे सम्मान देते हुए डिफेंस भी किया जाएगा. कई गेंदों पर वैभव ने डिफेंसिव शॉट खेला और सिंगल भी लिया. वनडे में एक संगठित पारी खेलने के लिए डिफेंस भी उसकी एक अटूट कड़ी है. अगर आप फिफ्टी-फिफ्टी में जरूरत पर अच्छी गेंद को रोकेंगे नहीं, तो बड़ी पारी खड़ी नहीं ही होगी. वनडे की पारी समावोशी गुणों का पैकेज होती है. और यह पारी उसी पैकेज का एक 'छोटा', लेकिन गुणों के लिहाज से 'संपूर्ण हिस्सा' था! वहीं, वैभव ने कई शॉटों में कटौती करते हुए शॉट भी सीमित किए. खेल में बदलाव की रणनीति के तहत ये गुण भी किसी बल्लेबाज के लिए बहुत ही अहम हैं
4. बिना छक्के के 200 का स्ट्राइक रेट!
जो भी ट्रोलर्स वैभव पर उंगली उठा रहे हैं, उन्हें यह नहीं दिखाई दिया कि बिना तूफानी या हवा हवाई शॉटों की वैभव ने 200 का स्ट्राइक-रेट निकाल ल लिया. पता ही नहीं चला कि कितनी सहजता, सरलता और गति से उनका स्ट्राइक रेट दो सौ छू गया. अगर कोई बल्लेबाज बिना छक्कों के ऐसा स्ट्राइक-रेट वनडे में निकालता है, तो यह पारी यह भी बताती है कि वह बल्लेबाज बिना छक्कों के ही शतक पूरा करने की भी क्षमता रखता है. बिना जोखिम लिए इस गति से रन बनाना एक और पॉजिटिव है, जो ट्रोलर्स को नजर नहीं ही आया
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