- इस्लामाबाद में हुए आत्मघाती हमले में 69 लोग मरे और 170 से अधिक गंभीर रूप से घायल हुए थे.
- पाकिस्तान ने हमले के लिए भारत और अफगानिस्तान पर आरोप लगाए, जिसे भारत ने पूरी तरह खारिज किया.
- अफगानिस्तान ने भी पाक के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि पाकिस्तान हर बार बिना सबूत आरोप लगाता है.
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुक्रवार को हुए भीषण आत्मघाती हमले में 69 लोगों की मौत और 170 से अधिक घायल होने के बाद शुरू हुआ मातम अब पड़ोसी देशों के बीच तीखी बयानबाज़ी में बदल गया है. पाकिस्तान ने हमले के लिए पड़ोसी देशों- खासतौर पर भारत और अफगानिस्तान पर उंगली उठाई. जिसके बाद भारत ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए आरोपों को बेबुनियाद और बेकार बताया. अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने भी पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि वह अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए पड़ोसियों को दोष देती है.
'PAK अपनी घरेलू समस्याओं का दोष दूसरों पर डालना बंद करे'
भारतीय विदेश मंत्रालय के बयान में मस्जिद हमले की निंदा करते हुए मासूम नागरिकों की मौत पर संवेदना व्यक्त की गई. लेकिन साथ ही पाकिस्तान द्वारा लगाए गए किसी भी तरह के भारतीय संबंध के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया गया. MEA ने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाकिस्तान अपने सामाजिक ढांचे को अंदर से खोखला करने वाली समस्याओं से निपटने की बजाय दूसरों को दोष देकर खुद को भ्रमित करता है.'
भारत की प्रतिक्रिया तब आई जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने दावा किया कि हमलावर का अफगानिस्तान से संबंध था और एक 'नए भारत-तालिबान गठजोड़' की बात कही.
अफगानिस्तान का पलटवार- 'पाकिस्तान हर बार बिना सबूत आरोप लगाता है'
काबुल ने भी इस मामले में पाकिस्तान पर सख्त शब्दों में प्रहार किया. अफगान रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान बिना जांच और सबूत के आरोप लगाने की आदत में है. बयान में कहा गया, 'इन दावों का कोई तर्क या आधार नहीं है. इन्हें सिर्फ पाकिस्तान की अपनी सुरक्षा नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए गढ़ा जाता है.'
अफगानिस्तान ने पाकिस्तान से पूछा कि यदि वह हमलावर की पहचान हमले के कुछ घंटों बाद कर सकता है, तो उसे रोकने में नाकाम क्यों रहा? अफगान बयान में दोहराया गया कि तालिबान सरकार निर्दोषों की हत्या को इस्लाम के खिलाफ मानती है और आतंकियों को किसी भी राजनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं होने देती.

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हमले के बाद पाकिस्तान में बढ़ रही आलोचना
भीषण धमाका उस वक्त हुआ जब मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग जुमे की नमाज़ अदा कर रहे थे. सुरक्षा गार्डों ने हमलावर को रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने हॉल के पास पहुंचकर खुद को उड़ा लिया. इस्लामाबाद के अस्पतालों में रातभर अफरा-तफरी का माहौल रहा. हमले ने पाकिस्तान की शहरी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान का पड़ोसियों पर आरोप लगाने का पुराना तरीका अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असरदार नहीं रहा.
एक विश्लेषक के मुताबिक, 'भारत और अफगानिस्तान दोनों साफ संदेश दे रहे हैं कि पाकिस्तान को अपनी जमीन पर मौजूद आतंकी नेटवर्क और अंदरूनी वैचारिक खामियों का सामना करना होगा.'
तनाव बढ़ा, जवाबदेही की मांग तेज
घटनास्थल पर शोक और आक्रोश की लहर है. परिजनों का आरोप है कि सुरक्षा खामियों की वजह से बड़ी संख्या में जानें गईं. सरकार पर दबाव है कि वह हमले की पूरी जांच करे और सुरक्षा तंत्र में सुधार लाए. फिलहाल यह आतंकी हमला न सिर्फ पाकिस्तान की सुरक्षा कमजोरियों को उजागर कर रहा है, बल्कि भारत और अफगानिस्तान के साथ इसके तनावपूर्ण रिश्तों को और गहरा कर रहा है. दोनों देशों ने एक स्वर में कहा है कि पाकिस्तान को अपने घर की समस्याओं से भागना बंद करना होगा.
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