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अल नीनो से 50 दिन तक कितना परेशान रहा मानसून, अगस्त-सितंबर में होगी बारिश या पड़ेगा सूखा

बारिश के आंकड़े बताते हैं कि देश के 56 फीसदी हिस्से में सामान्य या सामान्य से कम बारिश हुई है. इन आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 21 जुलाई तक देश में 21 फीसदी कम बारिश हुई है.

अल नीनो से 50 दिन तक कितना परेशान रहा मानसून, अगस्त-सितंबर में होगी बारिश या पड़ेगा सूखा
नई दिल्ली:

भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून को आए 50 दिन से अधिक हो चुके हैं. इस बार का मानसून काफी अनिश्चित और असमान रहा है. शुरुआत धीमी रही और बीच-बीच में लंबे सूखे दौर देखने को मिले. ऐसे में पूरे मानसून की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है. चूंकि भारत की खेती इन चार महीनों की बारिश पर काफी निर्भर करती है, इसलिए मौसम विशेषज्ञ अब तक के मानसून का आकलन कर रहे हैं. वह यह भी देख रहे हैं कि मानसून पर अल नीनो का कितना असर है और अगले दो महीनों में क्या स्थिति बन सकती है.

देश में बारिश की कितनी कमी हुई है

अगर राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो मानसून के पहले आधे हिस्से में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई. पुणे स्थित सेंटर फॉर सिटिजन साइंस के सचिव और मानसून पर शोध करने वाले मयुरेश प्रभुणे बताते हैं कि एक जून से 21 जुलाई के बीच पूरे देश में सामान्य से 21 फीसदी कम बारिश हुई है.उनके मुताबिक यह स्थिति काफी चिंताजनक है. हालांकि केवल कुल बारिश के आंकड़े पूरी तस्वीर नहीं बताते हैं. असली समस्या यह है कि बारिश पूरे देश में समान रूप से नहीं हुई है.

इस बार कुछ इलाकों में बहुत ज्यादा बारिश हुई, जबकि बड़े कृषि क्षेत्र लगभग सूखे ही रहे हैं.प्रभुणे बताते हैं,''देश के 56 फीसदी हिस्से में सामान्य से कम या बहुत कम बारिश हुई है. जहां बारिश हुई, वहां बेहद तेज बारिश हुई, जैसे कोंकण के इलाके में. इसी वजह से महाराष्ट्र की कुल बारिश सामान्य दिखाई देती है, लेकिन जिलेवार आंकड़ों में राज्य के 21 जिले अभी भी बारिश की कमी का सामना कर रहे हैं. 

देश में 1 जून से 21 जुलाई के बीच 21 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है.

देश में 1 जून से 21 जुलाई के बीच 21 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है.
Photo Credit: PTI

क्या हर जगह सामान्य बारिश हुई है

इसका मतलब यह हुआ कि किसी राज्य की कुल बारिश के सामान्य दिखने का मतलब यह नहीं है कि वहां के सभी इलाकों में अच्छी बारिश हो रही है. कई ग्रामीण और खेती वाले इलाके  अब भी पानी की कमी से जूझ रहे हैं. 

इस साल कमजोर मानसून की सबसे बड़ी वजह अल नीनो माना जा रहा है. अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इससे भारत में मानसूनी बारिश कमजोर पड़ जाती है. प्रभुणे बताते हैं,''इस बार अल नीनो उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से मजबूत हुआ है. जुलाई के मध्य तक नीनो 3.4 क्षेत्र का तापमान सामान्य से 2.1 डिग्री सेल्सियस अधिक हो चुका है, जबकि आमतौर पर इतना तापमान नवंबर-दिसंबर में देखने को मिलता है.

अल नीनो की इस तेज गर्मी के कारण भारत की ओर आने वाले कई महत्वपूर्ण मौसम तंत्र कमजोर पड़ गए हैं.वे बताते हैं,''जून-जुलाई में कम से कम 5 कम दबाव (लो-प्रेशर) प्रणाली बननी चाहिए थी, लेकिन इस बार केवल दो ही बनी हैं. पिछले साल इसी अवधि में आठ से 10 लो-प्रेशर सिस्टम बने थे.''
उनके मुताबिक प्रशांत महासागर के ज्यादा गर्म होने से मैडन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) जैसे बादल बनाने वाले मौसम तंत्र भारतीय महासागर की बजाय प्रशांत क्षेत्र में ही सक्रिय हैं,इससे भारत में बारिश कम हो रही है.

कितनी कम हुई है बारिश

स्काइमेट वेदर के मौसम और जलवायु परिवर्तन विभाग के उपाध्यक्ष महेश पलावत के मुताबिक इस साल मानसून का अब तक का सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है.उनके मुताबिक जून के अंत तक देश में 40 फीसदी बारिश की कमी थी. जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश हुई. इससे बारिश की कमी नौ जुलाई तक घटकर 19 फीसदी रह गई. इसके बाद मानसून में ब्रेक आने से बारिश फिर कम हो गई. इस वजह से बारिश की कमी बढ़कर 24 फीसदी हो गई.

करीब 20 जुलाई के आसपास मानसून की मुख्य ट्रफ हिमालय की तलहटी से दक्षिण की ओर खिसकी. इसके बाद गंगा के मैदानी इलाकों, मध्य भारत, कोंकण, गोवा और तटीय कर्नाटक में फिर से अच्छी बारिश शुरू हुई.

देश के 56 फीसदी हिस्से में सामान्य से कम या बहुत कम बारिश हुई है.

देश के 56 फीसदी हिस्से में सामान्य से कम या बहुत कम बारिश हुई है.
Photo Credit: PTI

अगस्त-सितंबर में कितनी बारिश होगी 

मानसून के दूसरे हिस्से में किसान और जल प्रबंधन से जुड़े अधिकारी मौसम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. महेश पलावत का कहना है कि जुलाई के अंत तक मध्य और उत्तर भारत में अच्छी बारिश जारी रहने की संभावना है. इससे खरीफ की फसलों को राहत मिलेगी. लेकिन अल नीनो की वजह से अगस्त और सितंबर चिंता बढ़ा सकते हैं. उनके मुताबिक पश्चिमी भारत में सामान्य से कम बारिश हो सकती है. जबकि पूर्वी और मध्य भारत में बारिश सामान्य के आसपास रहने की उम्मीद है.

क्या इंडियन ओशन डाइपोल राहत देगा?

प्रभुणे बताते हैं कि ब्रेक मानसून वह स्थिति होती है, जब हिमालय और उसकी तलहटी में भारी बारिश होती है, लेकिन देश के अधिकांश अन्य हिस्सों में बहुत कम या बिल्कुल बारिश नहीं होती.

कई बार इंडियन ओशन डाइपोल (IOD), जिसे 'इंडियन नीना' भी कहा जाता है, अल नीनो के असर को कम कर देता है. प्रभुणे के मुताबिक,''मौजूदा अनुमान बताते हैं कि सकारात्मक IOD अगस्त के आखिर या सितंबर में विकसित होगा. इसलिए इस बार यह मानसून को ज्यादा राहत नहीं दे पाएगा.

मानसून के पहले 50 दिनों ने साफ कर दिया है कि 2026 का मानसून चुनौतीपूर्ण और असमान रहा है.हालांकि जुलाई के आखिर में अच्छी बारिश से कुछ राहत मिली है, लेकिन मजबूत अल नीनो और IOD के देर से सक्रिय होने के कारण अगस्त और सितंबर में पानी के बेहतर प्रबंधन और कृषि की सावधानीपूर्वक योजना बनाना बहुत जरूरी होगा.

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