- संसद के मॉनसून सत्र में अब केवल एक दिन बचा है, लेकिन कोई महत्वपूर्ण विधायी कामकाज नहीं हो पाएगा
- विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक को सरकार ने विरोध के कारण JPC के पास भेजा है
- सरकार अब तक 15 बिल को JPC के पास भेज चुकी है
संसद के मॉनसून सत्र में अब केवल एक दिन बचा है, लेकिन यह लगभग तय माना जा रहा है कि सदन में अब कोई और महत्वपूर्ण कामकाज नहीं हो पाएगा. एक तरह से देखा जाए तो इस सत्र में लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक के अलावा कोई बहुत बड़ा विधायी काम नहीं हो सका.
यहां तक कि विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA Amendment Bill) को भी सरकार ने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया है. इसकी एक वजह यह भी रही कि इस विधेयक का विरोध डीएमके भी कर रही थी और सरकार फिलहाल डीएमके को नाराज नहीं करना चाहती थी, क्योंकि परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर सरकार को डीएमके के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है.
सरकार ने भी यह सोचा कि कभी-कभी लंबी छलांग लगाने के लिए एक-दो कदम पीछे लेने पड़ते हैं. FCRA बिल पर JPC अपनी रिपोर्ट अगले सत्र, यानी शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह में पेश करेगी.
मौजूदा सरकार 15 विधेयकों को भेज चुकी है JPC
FCRA विधेयक को मिलाकर मौजूदा सरकार अब तक 15 विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज चुकी है. FCRA विधेयक के लिए गठित JPC में लोकसभा के 20 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे. इस समिति में NDA का बहुमत रहेगा.
JPC को भेजे गए बिल
- भूमि अधिग्रहण (संशोधन) विधेयक, 2015
- दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2015
- सिटिजनशिप (अमेंडमेंट) बिल, 2016
- नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016
- सुरक्षा हित प्रवर्तन एवं ऋण वसूली कानून (संशोधन) विधेयक, 2016
- वित्तीय समाधान और जमा बीमा विधेयक, 2017
- व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2019
- जैव विविधता (संशोधन) विधेयक, 2021
- बहु-राज्य सहकारी समितियां (संशोधन) विधेयक, 2022
- जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2022
- वन (संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2023
- वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024
- संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 (एक राष्ट्र, एक चुनाव)
- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024
- संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025
- केंद्र शासित प्रदेश शासन (संशोधन) विधेयक, 2025
- जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025
- कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026
- विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA संशोधन विधेयक)
एक JPC का विपक्ष ने किया था बहिष्कार
इन सभी समितियों में एक JPC ऐसी भी रही है, जिसका विपक्ष ने लगभग बहिष्कार कर दिया था. उसमें विपक्ष का कोई सदस्य नहीं था, सिवाय NCP (SP) की सुप्रिया सुले और AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी के.
जब दोनों नेताओं ने असहमति जताई, तो उस JPC की अंतिम रिपोर्ट को रोक दिया गया. यह समिति 130वें संविधान संशोधन विधेयक से जुड़ी थी, जिसमें 30 दिन जेल में रहने की स्थिति में मुख्यमंत्री और मंत्रियों की सदस्यता व पद पर असर पड़ने का प्रावधान शामिल था.
FCRA पर सभी दल होंगे शामिल
हालांकि FCRA संशोधन विधेयक पर गठित JPC की स्थिति अलग होगी. इस समिति में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की भागीदारी रहेगी और विभिन्न दलों के सदस्य इसमें शामिल होंगे.
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