भारत के लिए जल्द ही अंतरिक्ष में एक बड़ी उपलब्धि मिलने वाली है. हैदराबाद की स्टार्टअप कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस का प्राइवेट रॉकेट 'विक्रम-I' अंतरिक्ष में उड़ान के लिए तैयार है. जिसकी तस्वीर भी जारी हो गई है. श्रीहरिकोटा में विक्रम-1 रॉकेट के स्टेज-2 इंटीग्रेशन का काम पूरा हो चुका है. यानि यह रॉकेट उड़ान भरने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है. यानि भारत अब अंतरिक्ष में इतिहास रचने की उल्टी गिनती शुरू कर चुका है.
विक्रम-1 की तस्वीर जारी
स्काईरूट एयरोस्पेस की तरफ से विक्रम-1 रॉकेट की तस्वीर भी जारी की गई है. जो उड़ान के लिए अब तैयार नजर आ रहा है. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन स्पेस सेंटर में यह तैयार किया गया है. यह रॉकेट चार चरणों वाला है. जिसमें दूसरे चरण का काम पूरा हो चुका है. इस चरण को कलाम-250 के नाम दिया गया है. दो और चरणों का काम पूरा होते ही इसे आगे बढ़ाया जाएगा.
The first pictures from the spaceport of India's first privately built orbital rocket.
— Skyroot Aerospace (@SkyrootA) June 12, 2026
For those following closely: Vikram-1's Stage 2, Kalam-250, is now fully integrated inside SHAR, Sriharikota. Flex nozzle, actuators, and Interstages 1_2L & 1_2U mounted and assembled. Our… pic.twitter.com/lXBQBnwq3Q
विक्रम-1 रॉकेट की खासियत
विक्रम-1 रॉकेट की खासियत इसे भारत में ही तैयार किया गया है. यह है मजबूत और हल्का है. इसकी बॉडी स्टील से भी मजबूत बनाई गई है. जिसमें कार्बन कम्पोजिट मटीरियल का इस्तेमाल किया गया है. जब रॉकेट में अंदर से ठोस ईंधन जलता है तो इसमें भारी गर्मी होती है. रॉकेट को इस गर्मी से बचाने के लिए रबर की एक खास सुरक्षा कवच दी गई है. इसमें सही रास्ता पकड़ने की तकनीक विकसित की गई है. ताकि यह हवा के थपेड़ों और ग्रेविटी के बीच में भटकेका नहीं. इसमें कंप्यूटर से चलने वाले रोबोटिक पुर्जे लगे हैं, जो उड़ान भरने के दौरान इसके नोजल को सही दिशा में घुमाते रहेंगे. रॉकेट का जो हिस्सा बेकार हो जाता है वह पलक झपकते ही इसे खुद से अलग कर लेगा. जो इसकी सबसे बड़ी खासियत है.
भारत के लिए होगी बड़ी उपलब्धि
विक्रम-1 जब अंतरिक्ष में उड़ान भरेगा तो यह भारत के लिए बड़ी उपलब्धि हगी. क्योंकि यह रॉकेट 24 मीटर ऊंचा है. जो अपने साथ 350 किलोग्राम तक के छोटे सैटेलाइट्स को पृथ्वी की निचली कक्षा ले जा सकता है. यह रॉकेट जब लॉन्च होगा तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास अपना प्राइवेट रॉकेट होगा.
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