मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाए जाने की मांग को लेकर दिल्ली में इंडिया गठबंधन का प्रदर्शन बीते तीन दिनों से लगातार जारी है. शुक्रवार को मुख्य विपक्षी गठबंधन के सांसद, संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक मार्च करेंगे.राष्ट्रपति ने मिलने के लिए रात आठ बजे का समय दिया है. इसमें ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, तेजस्वी यादव जैसे बड़े चेहरे शामिल होंगे. लेकिन अखिलेश यादव मौजूद नहीं रहेंगे. हालांकि उनकी समाजवादी पार्टी के अन्य सांसद इस मार्च में शामिल होंगे. उद्धव ठाकरे की शिव सेना भी इस मार्च से गैर हाज़िर रहेंगे. इससे पहले बुधवार को खरगे के 'लंच-प्रोटेस्ट' के न्यौते पर समाजवादी पार्टी नहीं पहुंची थी. हालांकि अगले दिन गुरुवार को ऐसे ही प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के सांसद शामिल हुए.
पहले दिन से ही है गफलत
प्रदर्शन के पहले ही दिन जब मंगलवार को संसद भवन से निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग मुख्यालय) तक इंडिया गठबंधन के सांसदों का मार्च निकला था. उस समय बाक़ी नेताओं ने तो पुलिस हिरासत का ख़ास विरोध नहीं किया. लेकिन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पुलिस को चकमा देते हुए वहीं आकाशवाणी भवन पर धरने पर बैठ गए थे. यह रणनीति न तो पहले से तय थी और न ही समय से अन्य विपक्षी दलों को कांग्रेस ने इसकी जानकारी दी. यही वजह थी कि अखिलेश यादव समेत ज्यादातर विपक्षी सांसद दिल्ली से रवाना हो गए. इसके बाद पुलिस ने देर शाम राहुल और प्रियंका को हिरासत में लेकर आकाशवाणी भवन परिसर खाली करवाया. हालांकि तब तक वाम दल, टीएमसी और समाजवादी पार्टी के कुछ सांसद वहां पहुंचे थे.
इन सबसे पता चलता है कि अहम मौके पर इंडिया गठबंधन में तालमेल की कमी है. समाजवादी पार्टी और शिवसेना के नेता निजी तौर पर यह सवाल उठा रहे हैं. इनकी शिकायत है कि कांग्रेस समय रहते कार्यक्रम और रणनीति की जानकारी साझा नहीं कर रही है.हालांकि कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्र तालमेल की कमी की बातों का खंडन करते हैं. उनका दावा है कि कांग्रेस आलाकमान सभी घटक दलों के शीर्ष नेताओं के साथ संपर्क में है. राष्ट्रपति भवन मार्च के लिए राहुल गांधी ने आदित्य ठाकरे से बात की और दिल्ली आने का अनुरोध किया. इसी तरह मल्लिकार्जुन खरगे ने अखिलेश यादव से फ़ोन पर बात की. लेकिन इन नेताओं की पहले से तय व्यस्तता थी. अखिलेश यादव का शुक्रवार को बलिया में कार्यक्रम है.

गुरुवार को प्रदर्शन में राहुल गांधी के साथ सपा सांसद राजीव राय भी शामिल हुए थे.
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कांग्रेस सूत्रों का यह भी कहना है कि रोज के धरना-प्रदर्शन के बाद नेता देर से अगले दिन की रणनीति फाइनल कर पा रहे हैं. पहले और दूसरे दिन कुछ 'कम्युनिकेशन गैप' था. इसे अब ठीक कर लिया गया है.
सहयोगी दलों को मना रही है कांग्रेस
कांग्रेस की डैमेज कंट्रोल की रणनीति के तहत ही राहुल और खरगे ने सहयोगी दलों के नेताओं से बात की है. गुरुवार को लंच के बाद राजघाट तक की बस यात्रा के दौरान समाजवादी पार्टी सांसद राजीव राय प्रियंका गांधी के बगल की सीट पर बैठे दिखे.
30 सितंबर को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में तय हुआ था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ छह अक्टूबर को विपक्षी सांसद, संसद भवन से निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग मुख्यालय) तक मार्च करेंगे. इसके बाद प्रदर्शन जारी रखने को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ था. यही वजह है कि दिल्ली में जारी प्रदर्शन के दौरान इंडिया गठबंधन की एकजुटता में दरार नज़र आ रही है. हालांकि पहले दिन संसद से चुनाव आयोग तक मार्च में बीजू जनता दल के सांसद भी शामिल हुए थे. बीजद वैसे तो इंडिया गठबंधन में शामिल नहीं है. लेकिन सूत्रों के मुताबिक ममता बनर्जी ने इसकी पहल की थी.

छह अक्टूबर को दिल्ली के संसद मार्ग पर आयोजित विरोध प्रदर्शन में उद्धव ठाकरे की शिव सेना के सांसद संजय राउत भी शामिल हुए थे.
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कांग्रेस की चिंता केवल यही नहीं है कि इंडिया गठबंधन में समन्वय की कमी उभर रही है, बल्कि यह भी है उसके सभी सांसद राहुल गांधी की अगुवाई में हो रहे प्रदर्शनों में शामिल नहीं हो रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के 30-40 ऐसे सांसद हैं, जो किसी ना किसी दिन प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए. इसका संज्ञान लेते हुए केसी वेणुगोपाल ने ऐसे सांसदों की सूची तैयार कर उनसे जवाब-तलब किया है. कुछ सांसदों ने सफाई दी है कि वो अपने जिले में होने वाले प्रदर्शनों में शामिल होने चले गए थे.
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