पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के चकदह गांव में इस बार की दिवाली खास बन गई है. आजादी के बाद पहली बार गांव के घरों में बिजली पहुंची है. वर्षों से अंधेरे में जीवन बिता रहे लोगों के लिए यह किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है. गांव में बिजली आने के बाद हर तरफ खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है.
400 आदिवासी परिवारों को मिला लाभ
गांव में बिजली पहुंचने से करीब 400 आदिवासी परिवारों को सीधा फायदा हुआ है. अब बच्चों की पढ़ाई आसान होगी और लोगों को रात के समय भी सामान्य जीवन जीने में सुविधा मिलेगी. ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से इस दिन का इंतजार कर रहे थे.
खंभे लगे थे लेकिन नहीं थी रोशनी
ग्रामीणों के अनुसार गांव में कई साल पहले बिजली के खंभे तो लगा दिए गए थे लेकिन घरों तक बिजली नहीं पहुंच पाई थी. इसके कारण लोगों को अंधेरे में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता था. दिवाली से पहले बिजली आपूर्ति शुरू होने के बाद गांव की तस्वीर बदलती नजर आ रही है.
गांव में खुशी और संतोष का माहौल
बिजली आने के बाद लोगों ने इसे अपने जीवन के सबसे यादगार पलों में से एक बताया है. शाम होते ही घरों और गलियों में रोशनी दिखाई देने लगी है. ग्रामीणों का कहना है कि अब उनके बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और गांव का विकास भी तेजी से होगा.
दिवाली पर रोशनी बनी सबसे बड़ा उपहार
दिवाली ऐसे समय पर आई है जब गांव के लोगों का वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ है. गांव के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक सभी के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही है. उनके लिए इस बार केवल त्योहार ही नहीं बल्कि विकास और नई शुरुआत की रोशनी भी साथ लेकर आई है.
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