भारत में इस साल मौसम का मिजाज लगातार चौंका रहा है. अक्टूबर में जब मॉनसून की विदाई हो रही है तब देश के कई हिस्सों में अचानक तेज बारिश, गरज-चमक और ओलावृष्टि देखने को मिल रही है. सोमवार को दिल्ली-एनसीआर में हुई भारी बारिश ने लोगों को हैरान कर दिया. रातभर हुई बारिश और बिजली चमकने की घटनाओं ने साफ संकेत दिया कि अब मौसम पहले जैसा नहीं रहा.
सुपर अल नीनो ने बढ़ाई चिंता
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार सक्रिय हुआ सुपर अल नीनो भारत के मौसम को गहराई से प्रभावित कर रहा है. विशेषज्ञ प्रोफेसर गुफरान बेग के अनुसार यह सामान्य अल नीनो नहीं बल्कि पिछले कई वर्षों की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली घटना है. इसका असर मॉनसून पर भी दिखा और देश में औसतन करीब 13 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई. हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में वर्षा का वितरण काफी असमान रहा.
उन्होंने बताया कि प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से 3.2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है और अगले दो महीनों में यह 3.5 डिग्री तक पहुंच सकता है. इसका सीधा असर आने वाली सर्दियों पर पड़ सकता है. इस बार ठंड अपेक्षाकृत हल्की रहने की संभावना है लेकिन तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
दिल्ली में अचानक कैसे हुई भारी बारिश?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि मॉनसून की वापसी के बाद दिल्ली में इतनी तेज बारिश कैसे हो गई. विशेषज्ञों के मुताबिक ऊपरी वायुमंडल में असामान्य परिस्थितियां बनी हुई थीं. इसी दौरान उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ पहुंच गया. जब पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी ठंडी हवाएं दिल्ली-एनसीआर के ऊपर मौजूद गर्म और नमी वाली हवा से टकराईं तो वातावरण में जमा नमी अचानक बारिश के रूप में बरस पड़ी. यही वजह रही कि सामान्य हल्की बारिश की जगह तेज बारिश और गरज-चमक का दौर देखने को मिला.
मौसम में बढ़ रही है अनिश्चितता
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना केवल एक दिन का मौसम बदलाव नहीं है बल्कि बदलते जलवायु पैटर्न का संकेत है. अब ऐसे मौसमीय घटनाक्रम बढ़ सकते हैं जिनकी पहले कम संभावना होती थी. यानी ऐसे समय में भी बारिश हो सकती है जब सामान्य तौर पर मौसम शुष्क रहने की उम्मीद होती है.
IMD ने क्या कहा?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार देश के शेष हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं. साथ ही अगले दो से तीन दिनों में दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्व मॉनसून की शुरुआत भी हो सकती है. विभाग ने बताया कि वायुमंडलीय अस्थिरता के कारण दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में बारिश, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं की गतिविधियां बनी हुई हैं. कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि की भी संभावना है.
पिछले 24 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर में बहुत भारी वर्षा दर्ज की गई. हरियाणा और अंडमान-निकोबार में भी अच्छी बारिश हुई जबकि उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में ओले गिरे.
दिल्ली समेत उत्तर भारत के लिए पूर्वानुमान
मौसम विभाग ने कहा है कि दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक बादल छाए रह सकते हैं. अधिकतम तापमान 31 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है. बीच-बीच में हल्की से मध्यम बारिश का दौर भी जारी रह सकता है. 14 और 15 अक्टूबर को दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. कई स्थानों पर गरज-चमक, तेज हवाएं और ओलावृष्टि की संभावना भी जताई गई है.
पहाड़ों और दक्षिण भारत में भी असर
जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में 15 अक्टूबर तक अच्छी बारिश का अनुमान है. उत्तराखंड में 12 से 18 अक्टूबर तक लंबे समय तक बारिश का दौर जारी रह सकता है. दूसरी ओर उत्तर-पूर्व मॉनसून के सक्रिय होने के बाद दक्षिण भारत के कई राज्यों में अगले पांच से छह दिनों तक व्यापक बारिश की संभावना है. केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश के कई क्षेत्रों में भारी वर्षा हो सकती है.
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत पर भी नजर
ओडिशा, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर राज्यों में भी 18 अक्टूबर तक अलग-अलग समय पर बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं. अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी व्यापक वर्षा का अनुमान है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में देश को अधिक सतर्क रहने की जरूरत होगी क्योंकि सुपर अल नीनो और बदलते जलवायु संकेत मौसम को पहले से अधिक अप्रत्याशित बना रहे हैं.
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