- उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें अपने ही साथियों द्वारा नेतृत्व पर सवाल उठाना बिल्कुल पसंद नहीं है.
- उन्होंने पिछले 12-13 वर्षों से पार्टी का नेतृत्व किया है और जिम्मेदारी निभाने को लेकर स्पष्ट थे.
- यदि कोई कार्यकर्ता उन्हें नेतृत्व में अयोग्य समझता है तो वे खुलकर बता सकते हैं.
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भावुक अंदाज में कहा कि उन्हें यह बिल्कुल पसंद नहीं है कि उनके अपने ही साथी उनके नेतृत्व पर सवाल उठाएं. उन्होंने कहा कि इसी भावना के कारण उन्होंने पहले मुख्यमंत्री पद तक छोड़ दिया था. उद्धव ने कहा कि पिछले 12-13 वर्षों से वह पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और यदि किसी को लगता है कि वह इस जिम्मेदारी को निभाने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें खुलकर बता दिया जाए.
संघर्ष के मैदान से पीछे नहीं हटेंगे : उद्धव ठाकरे
उन्होंने यहां तक कहा कि यदि कार्यकर्ता चाहें तो वह तुरंत पद छोड़ने के लिए तैयार हैं और किसी भी योग्य शिवसैनिक को मंच पर बुलाकर नेतृत्व सौंप सकते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह चुनौतियों से भागने वाले नहीं हैं और पार्टी के सामने आने वाली हर मुश्किल का डटकर सामना करेंगे. उनका कहना था कि अगर संगठन का फैसला होगा तो वह पद छोड़ देंगे, लेकिन संघर्ष के मैदान से पीछे नहीं हटेंगे.
भावुक ठाकरे ने अपने समर्थकों से कहा कि अगर पार्टी का ही कोई व्यक्ति अगला शिवसेना प्रमुख बनता है तो मुझे खुशी होगी. लेकिन मैं इसे चोरों के हाथों में नहीं जाने दूंगा. हम डगमगाए नहीं हैं और सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए डटे हुए हैं.
उन्होंने कहा कि लेकिन मैं नहीं चाहता कि कोई भी शिवसैनिक मुझ पर उंगली उठाए कि मैंने मुख्यमंत्री पद से (2022 में) इस्तीफा दे दिया और (2026 में) विधान परिषद की सदस्यता जारी नहीं रखी.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल की घटनाओं से शिवसेना (उबाठा) के कार्यकर्ता निराश नहीं हुए, बल्कि और अधिक जोश में आ गए हैं. उन्होंने बागी सांसदों के उन दावों की कड़ी आलोचना की, जिनमें कहा गया था कि उन्हें आशंका है कि शिवसेना (उबाठा) कांग्रेस में अपना विलय कर सकती है. अगर 30 साल तक सहयोगी रहने के बावजूद हमने भाजपा में अपना विलय नहीं किया, तो हम कांग्रेस में विलय कैसे कर सकते हैं? मुझे आशंका है कि भाजपा की महाराष्ट्र इकाई (एकनाथ) शिंदे नीत शिवसेना का (खुद में) विलय कर सकती है.
इधर, शिवसेना UBT नेता अरविंद सावंत ने कहा कि जनता में इतना गुस्सा है, उन लोगों ने हमारी पीठ में छुरा घोंपा. 'गद्दार' शब्द भी उनके लिए छोटा होगा. उद्धाव ठाकरे के नेतृत्व के बिना शिव सैनिक कभी सोच नहीं सकता. शिवसेना का नेतृत्व केवल उद्धाव ठाकरे जी को ही करना चाहिए. ये जो जानबूझकर फैला रहे हैं उस पर हमें शिव सैनिकों को कुछ सोचना पड़ेगा.
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