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Success Story: साइबर कैफे चलाने वाले मोइन मंसूरी बने IAS, 3 लाख का लोन लेकर की UPSC की तैयारी

IAS मोइन अहमद मंसूरी मुरादाबाद के छोटे से गांव जटपुरा में साइबर कैफे चलाया करते थे. तीन लाख रुपये का लोन लेकर UPSC की तैयारी शुरू की. चौथे प्रयास में AIR 296 हासिल की. पढ़िए जलपाईगुड़ी के वर्तमान SDM आईएएस मोइन अहमद मंसूरी की सक्‍सेस स्‍टोरी.

Success Story: साइबर कैफे चलाने वाले मोइन मंसूरी बने IAS,  3 लाख का लोन लेकर की UPSC की तैयारी
  • आईएएस मोइन अहमद मंसूरी ने आर्थिक तंगी और असफलताओं के बावजूद यूपीएससी परीक्षा में चौथे प्रयास में सफलता पाई
  • वे उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के छोटे गांव जटपुरा से हैं और साइबर कैफे चलाकर पढ़ाई के खर्च जुटाते थे
  • तीन लाख रुपये का ऋण लेकर दिल्ली पहुंचे और अतिया फाउंडेशन की आर्थिक मदद से अपनी यूपीएससी तैयारी जारी रखी

IAS Moin Ahamd Mansoori: भारतीय प्रशासनिक सेवा के वर्ष 2023 बैच के अधिकारी मोइन अहमद मंसूरी आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी बड़े सपने देखने का हौसला रखते हैं. कभी जीविका चलाने के लिए साइबर कैफे चलाने वाले मोइन अहमद मंसूरी ने अभावों के बीच भी अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा. वे बैंक से तीन लाख रुपये का लोन लेकर अफसर बनने का सपना लेकर दिल्ली आए थे. 

शुरुआती राह आसान नहीं थी और वे लगातार तीन बार संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा भी उत्तीर्ण नहीं कर पाए. इसके बावजूद, उन्होंने न तो हिम्मत हारी और न ही अपनी मेहनत में कोई कमी आने दी. आखिर में अपने चौथे प्रयास में वे सफल रहे और वर्तमान में पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में एसडीएम के पद पर सेवाएं दे रहे हैं. 

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Photo Credit: moin ahamd mansoori

पश्चिम बंगाल कैडर के इस होनहार आईएएस अधिकारी की सक्‍सेस स्‍टोरी के अब चर्चा में आने की वजह यह है क‍ि 4 जुलाई 2026 को उन्होंने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट साझा की है. इस पोस्ट के जरिए उन्होंने जलपाईगुड़ी सदर के नए एसडीएम और एसडीओ के रूप में कार्यभार संभालने की जानकारी देते हुए अपनी खुशी व्यक्त की. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा-SDO & SDM, Sadar Jalpaiguri😊. इस पोस्ट के सामने आने के बाद से ही उन्हें सोशल मीडिया पर ढेरों बधाइयां और शुभकामनाएं मिल रही हैं.

आईएएस मोइन अहमद मंसूरी का इंटरव्‍यू

NDTV से बातचीत में आईएएस मोइन अहमद मंसूरी ने अपने जीवन के उन उतार-चढ़ावों को साझा किया, जिन्होंने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुंचाया है. उन्होंने बताया कि उन्होंने बचपन से ही गरीबी का एक लंबा और कड़ा दौर देखा है. सिविल सेवा की तैयारी के दौरान उन्हें लगातार कई असफलताओं का सामना करना पड़ा. वे उन दिनों को कभी नहीं भूल सकते, जब उन्हें अपनी पढ़ाई और घर का खर्च चलाने के लिए साइबर कैफे का संचालन करना पड़ता था. यूपीएससी की लंबी तैयारी के दौरान उनकी सारी जमापूंजी समाप्त हो गई थी, जिसके बाद संकट के उस दौर में उन्हें  अतिया फाउंडेशन से महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता प्राप्त हुई.  

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Photo Credit: ias moin ahamd mansoori

IAS मोइन अहमद मंसूरी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले की ठाकुरद्वारा तहसील के अंतर्गत आने वाले छोटे से गांव जटपुरा के निवासी हैं. उनके पिता वली हसन पेशे से एक ड्राइवर हैं. एक साधारण परिवार से आने के कारण दिल्ली जाकर पढ़ाई करना आर्थिक रूप से एक बहुत बड़ी चुनौती थी.

साइबर कैफे व दादा के क‍िसान क्रेड‍िट कार्ड से ल‍िया ऋण

मोइन ने साल 2018 में अपने बड़े भाई मोहसिन मंसूरी के साथ मिलकर एक साइबर कैफे खोला था. इसी दौरान उन्होंने तय किया कि उन्हें एक सिविल सेवक बनकर देश की सेवा करनी है. जब उन्होंने यूपीएससी में भाग्य आजमाने के लिए दिल्ली जाने का मन बनाया, तो आर्थिक तंगी उनके रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा बन गई. उनके ड्राइवर पिता के लिए इतनी बड़ी राशि का प्रबंध कर पाना नामुमकिन था. ऐसी स्थिति में, उन्होंने हार मानने के बजाय रास्ते तलाशे. उन्होंने अपने साइबर कैफे पर ₹1.5 लाख का व्यावसायिक लोन लिया और बाकी के ₹1.5 लाख अपने दादा इबने हसन के किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से सरकारी दरों पर ऋण लेकर जुटाए. 

IAS मोइन अहमद मंसूरी की UPSC की रणनीति

मुरादाबाद के एक छोटे से गांव से कुल तीन लाख रुपये की पूंजी लेकर मोइन अहमद मंसूरी दिल्ली पहुंचे. वर्ष 2019 में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में अपना पहला प्रयास किया, लेकिन वे प्रारंभिक परीक्षा भी पास नहीं कर सके. इस असफलता के बाद उन्होंने नए सिरे से तैयारी शुरू की, लेकिन दिल्ली जैसे शहर में तीन लाख रुपये का ऋण समाप्त होने में अधिक समय नहीं लगा. आर्थिक तंगी के इसी दौर में उन्हें करोलबाग स्थित अतिया फाउंडेशन के बारे में पता चला, जो जरूरतमंद और होनहार छात्रों की मदद करता है. फाउंडेशन ने उनके इस जज्बे को देखा और उनकी आगे की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली. 

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Photo Credit: moin ahamd mansoori

यूपीएससी में मोइन अहमद मंसूरी की असफलता

वर्ष 2020 में मोइन ने अपना दूसरा प्रयास किया, लेकिन इस बार भी वे प्रारंभिक परीक्षा की बाधा पार नहीं कर पाए. यह समय देश में कोविड-19 महामारी का था, जिसके कारण उन्हें दिल्ली छोड़कर वापस अपने गांव जटपुरा लौटना पड़ा. एक समय निराशा के क्षणों में उनके मन में यह विचार भी आया कि शायद वे यूपीएससी पास नहीं कर पाएंगे, लेकिन उनके माता-पिता और बड़े भाई मोहसिन मंसूरी ने उनका हौसला टूटने नहीं दिया. परिवार के संबल के साथ वे अगस्त 2020 में दोबारा दिल्ली लौटे. इसके बाद वर्ष 2021 में उन्होंने अपना तीसरा प्रयास किया, परंतु परिणाम वही रहा वे इस बार भी असफल हो गए.

मोइन अहमद मंसूरी AIR 296

लगातार तीन बार प्रीलिम्स में फेल होने के बाद मोइन ने गहरे आत्ममंथन का रास्ता चुना. उन्होंने अपनी तीनों असफलताओं का बारीकी से विश्लेषण किया, अपनी कमजोरियों और गलतियों की एक विस्तृत सूची बनाई और उन पर पूरी एकाग्रता के साथ काम करना शुरू किया. उनकी यह रणनीति रंग लाई और यूपीएससी 2022 की परीक्षा में उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार तीनों चरणों को एक ही बार में क्रैक कर लिया. देश भर में 296वीं रैंक हासिल कर वे पश्चिम बंगाल कैडर के आईएएस अधिकारी बन गए. 

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पहली फील्ड पोस्टिंग और बड़ी जिम्मेदारी

वेस्‍ट बंगाल कैडर में साल 2023 बैच के आईएएस अधिकारी के रूप में सेवाएं शुरू करने के बाद मोइन अहमद मंसूरी को पहली बार कोलकाता स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में OSD के रूप में कार्य करने का अवसर मिला. इसके बाद, 27 मार्च 2026 को उनका स्थानांतरण जलपाईगुड़ी सदर में हो गया. SDO और SDM के रूप में यह उनकी पहली फील्ड पोस्टिंग थी. वर्तमान में एसडीएम सदर जलपाईगुड़ी के साथ-साथ उनके पास डिप्टी कंट्रोलर ऑफ सिविल डिफेंस जलपाईगुड़ी और जिला सैनिक बोर्ड जलपाईगुड़ी के सचिव का भी अतिरिक्त प्रभार है.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव संपन्न कराना: सर्विस का सबसे शानदार अनुभव

आईएएस मोइन अहमद मंसूरी का मानना है कि मार्च माह में जलपाईगुड़ी में कार्यभार संभालने के तुरंत बाद, अप्रैल में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव  2026 उनके करियर की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक थे. उन्होंने इन चुनावों में रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई. उनके सेवाकाल के शुरुआती वर्षों में ही इतने बड़े स्तर पर चुनाव कराना बेहद चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील कार्य था. लेकिन अपनी उत्कृष्ट रणनीतिक सोच, प्रशासनिक कुशलता और एक मजबूत टीम वर्क के बल पर उन्होंने क्षेत्र में पूरी तरह से शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराए. मोइन इसे अपने अब तक के प्रशासनिक सफर का सबसे गौरवशाली और शानदार अनुभव मानते हैं.

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