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CEO से 'एक सवाल' पूछने पर खोई नौकरी, क्‍या था वो सवाल... कनाडा में रहे भारतीय ने सुनाई आपबीती

कनाडा में भारतीय प्रोडक्ट मैनेजर करण गोगना ने इंटरव्यू के अंतिम सवाल से नौकरी न मिलने का अनुभव साझा किया. उन्‍होंने बताया कि इंटरव्‍यू के दौरान हमें सवाल बेहद सोच समझकर पूछने चाहिए, नहीं तो उम्रभर मलाल रहता है.

CEO से 'एक सवाल' पूछने पर खोई नौकरी, क्‍या था वो सवाल... कनाडा में रहे भारतीय ने सुनाई आपबीती
सालों बाद भी नहीं भूल पाए वो रिजेक्शन
नई दिल्‍ली:

कनाडा में रहने वाले एक भारतीय प्रोडक्ट मैनेजर का एक वीडिया सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में उन्‍होंने दावा किया है कि नौकरी के इंटरव्यू के फाइनल राउंड में पूछे गए एक सवाल की वजह से उन्हें बेहतरीन नौकरी का ऑफर नहीं मिल पाया. इस शख्‍स की लिंक्डइन पोस्ट ने इंटरव्यू की रणनीति, क्रिटिकल थिंकिंग और सीनियर अधिकारियों के साथ बातचीत के तरीके पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है. 

असल में क्या हुआ था?

कनाडा में रहने वाले प्रिंसिपल प्रोडक्ट मैनेजर करण गोगना ने बताया कि उन्होंने पुरानी कारों (used-car) के सेक्टर में काम करने वाली एक स्टार्टअप कंपनी में नौकरी के लिए इंटरव्यू दिया था. उनके मुताबिक, उन्होंने इंटरव्यू के सभी राउंड पास कर लिए थे और एचआर टीम ने उनसे डॉक्यूमेंट्स भी मांगे थे. ऐसे में उन्‍हें लगा कि हायरिंग प्रोसेस लगभग पूरा हो चुका है. लेकिन, नौकरी का ऑफर फाइनल होने से पहले, एचआर ने उन्हें बताया कि कंपनी के सीईओ उनसे एक आखिरी बार बात करना चाहते हैं. गोगना ने कहा कि मीटिंग अच्छी रही और उन्हें नौकरी मिलने का पूरा भरोसा था. लेकिन जब इंटरव्यू खत्म होने वाला था, तो सीईओ ने उनसे पूछा कि क्या उनके मन में कोई सवाल है?

क्‍या था वो सवाल, जिससे नहीं मिली नौकरी! 

सीईओ के इसी सवाल से पूरा खेल बिगड़ गया. कुछ सोच-समझकर सवाल पूछने के इरादे से गोगना ने CEO से पूछा, 'क्या आप टू-व्हीलर मार्केट में उतरने की योजना बना रहे हैं?' सीधे जवाब देने के बजाय, CEO ने एक और सवाल पूछा, 'आपको क्या लगता है? क्या हमें ऐसा करना चाहिए?' गोगना ने माना कि उन्होंने कंपनी के फोर-व्हीलर बिजनेस के बारे में तो अच्छी तरह रिसर्च की थी, लेकिन टू-व्हीलर सेगमेंट के बारे में कोई तैयारी नहीं की थी. उन्होंने लिखा, 'मैंने फोर-व्हीलर सेक्टर पर तो अपना होमवर्क किया था, लेकिन टू-व्हीलर के बारे में मेरे पास कुछ नहीं था. मैंने जैसे-तैसे एक जवाब दिया, जिसके पीछे कोई ठोस सोच नहीं थी.'

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सालों बाद भी नहीं भूल पाए वो रिजेक्शन 

गोगना के अनुसार, अगले दिन एचआर ने उन्‍हें फोन कर बताया कि कंपनी ने किसी दूसरे कैंडिडेट के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है. सालों बाद उस अनुभव को याद करते हुए, उन्हें लगता है कि बातचीत के उस आखिरी हिस्से ने शायद सीईओ के फैसले पर असर डाला होगा. गोगना ने कहा, 'हम जवाब तैयार करने में तो बहुत समय लगाते हैं, लेकिन अपने सवाल तैयार करने में लगभग कोई समय नहीं देते. आपका आखिरी सवाल ही उन्हें यह बताता है कि आप कैसे सोचते हैं, इसलिए इसे भी उतनी ही गंभीरता से लें. जानें कि आप वह सवाल क्यों पूछ रहे हैं, और अगर वही सवाल आपसे वापस पूछा जाए, तो उसके लिए भी तैयार रहें.'

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सोशल मीडिया पर क्‍या आ रहे रिएक्‍शन?

यह पोस्ट कई प्रोफेशनल्स को पसंद आया, जिन्होंने इंटरव्यू के अपने ऐसे ही अनुभव शेयर किए. कुछ यूजर्स गोगना की बात से सहमत दिखे; उनका कहना है कि कैंडिडेट्स अक्सर इंटरव्यू लेने वालों से पूछने के लिए अच्छे सवाल तैयार करने पर ध्यान नहीं देते. दूसरों का तर्क था कि रिजेक्शन शायद सवाल की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए हुआ होगा, क्योंकि CEO यह देख रहे थे कि गोगना ने अचानक आई स्थिति को कैसे संभाला और क्या वे दबाव में रणनीतिक रूप से सोच सकते हैं. एक अन्‍य यूजर ने लिखा, 'मैं इससे पूरी तरह जुड़ा हुआ महसूस करता हूं. मैंने एक बार एक स्टार्टअप फाउंडर से पूछा था कि क्या उन्हें इस खराब मार्केट में भी फंडिंग मिल रही है. ऐसा पूछना बचकाना था, मुझे उनके चेहरे के भाव याद हैं. अब मैं समझ सकता हूं कि कंपनी बनाने में कितनी मेहनत लगती है और जानबूझकर या अनजाने में उसका अनादर करना वाकई ठीक नहीं है.'

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