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JEE Success Story: 3 महीने तक बिस्तर में पड़ा रहा बेटा, मां ने खुद कोचिंग लेकर बेटे को बना दिया IITian

आंखों की रोशनी कमजोर होने के बावजूद गुंजन के सपने बड़े थे. गुंजन आईआईटी में पढ़ना चाहता था. उसने कभी अपनी कमजोरी को अपनी पहचान नहीं बनने दिया. 10वीं कक्षा 82.5 प्रतिशत एवं 12वीं कक्षा 70 प्रतिशत अंकों से पास की. कोटा जाकर जेईई की तैयारी शुरू की.

JEE Success Story: 3 महीने तक बिस्तर में पड़ा रहा बेटा, मां ने खुद कोचिंग लेकर बेटे को बना दिया IITian
गुंजन की मां गुंजा का कहना है कि बेटे का सपना ही मेरा सपना है.

कोटा में रहकर सफलता की कहानियां लिखने वाले स्टूडेंट्स के पीछे कई प्रयास छिपे होते हैं. माता-पिता का त्याग और शिक्षकों का मार्गदर्शन इसमें महत्वपूर्ण होता है. कोटा में रहकर जेईई-एडवांस्ड क्रेक करने वाले स्टूडेंट की सफलता में इस बार मां का योगदान एक सहपाठी के रूप में सामने आया है. यहां अपने बेटे को सफलता दिलाने के लिए मां ने ऑनलाइन क्लास से नोट्स बनाए, जिन्हें पढ़कर बेटा सफल हुआ और अब आईआईटी में प्रवेश लेगा. कहानी बिहार सीतामढ़ी के निवासी गुंजन कुमार और मां गुंजा की है. दो साल कोटा में रहकर एलन से जेईई की तैयारी करने वाला गुंजन कुमार परीक्षा से ठीक पहले बीमार हो गया. न्यूमोथोरेक्स (फेफड़ा कोलेप्स होना) के चलते गुंजन तीन महीने तक पलंग पर रहा, क्लास तक अटेंड नहीं कर सका.

इस दौरान मां गुंजा सक्रिय हुई. पढ़ाई में नुकसान नहीं हो इसके लिए गुंजन को ऑनलाइन वीडियो दिखाए और खुद ने भी देखते हुए इन क्लासेज के नोट्स बनाए. गुंजा गृहिणी हैं, उन्होंने बीएड किया हुआ है. वो खुद कोटा साथ रही और गुंजन के लिए बरसों बाद फिर से पढ़ाई शुरू की. गुंजन की आंखें कमजोर हैं और 70 प्रतिशत से अधिक आई-साइट वीक होने के कारण 9.5 नम्बर का चश्मा लगा हुआ है.

ओबीसी कैटेगरी रैंक 50 हासिल की

गुंजन ने जेईई मेन में 91.8 पर्सेन्टाइल स्कोर किया है. जेईई एडवांस्ड में पीडब्ल्यूडी ओबीसी कैटेगरी रैंक 50 और काॅमन रैंक, पीडब्ल्यूडी 120 है. अब आईआईटी दिल्ली सीएस ब्रांच में एडमिशन लेकर अपने आईआईटीयन बनने के सपने को साकार करने जा रहा है. पिता राजनारायण प्रसाद बाॅर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन में इंजीनियर हैं.  छोटा भाई भी वर्तमान में कोटा में रहकर जेईई की तैयारी कर रहा है.

रिजल्ट के बाद गुंजन ने कहा कि परिस्थितियां हमेशा हमारे सपोर्ट में नहीं रहती है. परीक्षा सिर्फ पढ़ाई की ही नहीं हौसले की भी होती है. मैंने तय किया हुआ था कि एलन कोटा में पढ़कर आईआईटी-जेईई क्रेक करनी है और इसके लिए पूरी कोशिश की. बीमार हुआ तो मां ने जो सपोर्ट किया वो परीक्षा से पहले बहुत काम आया. फैकल्टीज ने गाइड किया तो  मैं सफल हो सका. इसलिए सकारात्मक हौसला बनाए हुए स्टूडेंट्स को हमेशा आगे की सोचनी चाहिए.

"बेटे का सपना ही मेरा सपना"

गुंजन की मां गुंजा का कहना है कि बेटे का सपना ही मेरा सपना है. जब गुंजन बीमार हुआ तो मैं भी थोड़ा चिंतित हुई, इसके बाद हम दोनों ने एक साथ वीडियोज देखे और मैंने नोट्स बनाए. बाद में मेरे बनाए नोट्स जब काम आए तो मुझे बड़ी खुशी हुई. 

गुंजन ने कोटा आने से पहले सर्च किया कि जेईई की तैयारी के लिए बेस्ट कोचिंग कौनसी है. तभी उसे साल 2021 में जेईई मेन एवं एडवांस्ड के ऑल इंडिया टॉपर के स्टूडेंट मृदुल अग्रवाल का वीडियो देखा. उसकी सफलता से प्रभावित होकर गुंजन ने भी कोटा जाने का फैसला किया. उसने अपने माता-पिता से कोटा भेजने की जिद की. बेटे की लगन देखकर परिवार ने भी पूरा साथ दिया और वर्ष 2023 में उसे कोटा भेजा

जनवरी में परीक्षा, अक्टूबर में न्यूमोथोरेक्स

कोटा आने के बाद सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन परीक्षा से ठीक पहले जिंदगी ने उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी कर दी. यहां 5 अक्टूबर 2025 को उसने इंस्टीट्यूट में रूटीन टेस्ट दिया और अगले दिन उसे सीने में दर्द होने लग गया. डाॅक्टर को दिखाया तो सामने आया कि अत्याधिक भारी सामान उठाने की वजह से बाएं फेफड़े पर दबाव पड़ा और वो कौलेप्स हो गया. न्यूमोथौरेक्स के बाद करीब तीन महीने तक वो बेड रेस्ट पर रहा.

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