- मायावती ने पांचवीं कक्षा में पढ़ते हुए गंभीर रूप से बीमार छोटे भाई को अस्पताल पैदल ले जाकर उसकी जान बचाई थी
- उस वक्त परिवार के पास कोई वाहन या पैसे नहीं थे इसलिए मायावती ने बहादुरी दिखाते हुए पैदल चलना चुना था
- अस्पताल तक पहुंचने में उन्हें ढाई घंटे लगे और रास्ते में वह भाई को पानी पिलाती रहीं जिससे उसकी जान बनी रही
देश आज रक्षाबंधन का पर्व मना रहा है. सदियों से चली आ रही इस परंपरा के तहत मान्यता है कि भाइयों से बहन अपनी और परिवार की रक्षा का वचन लेती हैं. इस मौके पर आइए जानते हैं 'बहनजी' के नाम से लोकप्रिय यूपी की पूर्व सीएम मायावती से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी. यह वाकया मायावती के साहस, स्नेह और संघर्ष की मिसाल है. 2 बहनों और छह भाइयों वाले परिवार में मायावती की छवि बचपन से ही साहस से भरी एक लड़की की थी. वह अकसर साहसपूर्ण काम करती थीं और किसी भी हद तक गुजर जाती थीं. यह बात तब की है, जब मायावती 5वीं क्लास में ही पढ़ती थीं.
इसी दौरान उनके चौथे नंबर के भाई सुभाष का जन्म हुआ था. वह कुछ दिन के ही थे कि निमोनिया के शिकार हो गए. हालत ऐसी थी कि नन्हे सुभाष को जल्दी ही कुछ इंजेक्शन और दवाएं दिए जाने की जरूरत थी. उस समय मायावती के पिता प्रभु दास शहर से बाहर थे और मां खुद भी बीमार थीं. परिवार के सभी सदस्यों का जिस सरकारी अस्पताल में पिता की नौकरी के चलते फ्री इलाज हो सकता था, वह 6 किलोमीटर दूर था. बड़ी चिंता यही थी कि कैसे नन्हे सुभाष को अस्पताल पहुंचाया जाए. ऐसी स्थिति में स्कूल से लौटीं मायावती ने साहस किया और नन्हे भाई को गोद में लेकर पैदल ही अस्पताल की ओर चल पड़ीं. खुद बच्ची थीं और रास्ता लंबा था.
वह कई बार अपने भाई को गोद में इधर से उधर करती रहीं और आखिर अस्पताल पहुंच गईं. वहां उन्होंने भाई की जरूरी दवाएं कराईं, फिर पैदल ही घर लौटीं. इस पूरे काम में शाम हो चुकी थी. मायावती ने इस वाकये के बारे में आत्मकथा में बताया था कि यदि मैं ऐसा नहीं करती तो मेरे भाई की गंभीर रूप से बीमार होने के चलते मौत भी हो सकती थी. घर पर कोई साधन बुक करने के पैसे भी नहीं थे. इसलिए मैंने तुरंत पैदल ही निकलने का फैसला लिया. मायावती ने आत्मकथा में बताया था कि मैं इस दौरान एक बोतल पानी लेकर चली थी. रास्ते में जब भी सुभाष रोने लगता तो रुक-रुक कर भाई के मुंह में कुछ पानी डालती रही.

मायावती अपने माता-पिता और भाइयों और बहन के साथ (दाएं से तीसरे)
ढाई घंटे चलकर भाई को लेकर अस्पताल पहुंचीं, रात में वापस लौट पाईं
मायावती के मुताबिक वह करीब ढाई घंटे में अस्पताल पहुंची थीं. उन्हें इस हालत में देखकर अस्पताल के डॉक्टर और अन्य स्टाफ भी हैरान थे. फिर इलाज के बाद उसी तरह वापस लौटीं. मायावती ने बताया था कि जब वह घर पहुंची तो मां ने कसकर गले लगा लिया. वह भावुक थीं कि कैसे मेरी छोटी सी बच्ची अपने भाई को लेकर पैदल ही अस्पताल चली गई और उसे मौत के मुंह से बचा लाई. वह रात को करीब साढ़े 9 बजे वापस लौटी थीं. यह पूरा वाकया 'बहनजी: द राइज एंड फॉल ऑफ मायावती' नाम से लिखी गई उनकी आत्मकथा में वर्णित है. इस पुस्तक के लेखक अजय बोस हैं.
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