विज्ञापन

पैसा भी बचा, निर्भरता भी घटी... जिस इथेनॉल पर मचा था बवाल, संकट में वही बन रहा सहारा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में कहा था कि इथेनॉल वाले पेट्रोल के कारण कच्चे तेल के आयात में 4.5 करोड़ बैरल की कमी आई है. ऐसे में जानते हैं कि इथेनॉल वाला पेट्रोल कैसे अब कारगर साबित हो रहा है?

पैसा भी बचा, निर्भरता भी घटी... जिस इथेनॉल पर मचा था बवाल, संकट में वही बन रहा सहारा
  • 2030 से पांच साल पहले पेट्रोल में बीस प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर E20 पेट्रोल लागू किया
  • इथेनॉल वाला पेट्रोल कच्चे तेल के आयात में कमी और देश को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचा रहा है
  • 2014-15 से अब तक इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़कर बीस प्रतिशत हो गई, जिससे तेल आयात में लाखों करोड़ रुपये की बचत हुई
नई दिल्ली:

इथेनॉल वाले पेट्रोल को लेकर पिछले साल खूब बवाल हुआ था. ये सारा बवाल तब शुरू हुआ था, जब सरकार ने बताया था कि पेट्रोल में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग का टारगेट हासिल कर लिया गया है. इसे E20 नाम दिया गया था. सरकार ने E20 के लिए 2030 तक का लक्ष्य रखा था लेकिन 5 साल पहले ही इसे हासिल कर लिया गया. फिर खूब बवाल हुआ और लोगों ने दावा किया कि E20 पेट्रोल से उनकी गाड़ियां खराब हो रही हैं. लोगों ने चिंताएं जताईं कि E20 वाले पेट्रोल से इंजन खराब हो सकता है और माइलेज भी कम हो सकता है. कुछ कंपनियों ने भी कहा कि इससे इंजन में काफी बदलाव करने पड़ सकते हैं.

लेकिन यही E20 पेट्रोल अब बड़ी राहत लेकर आया है. ऐसे वक्त में जब पश्चिम एशिया में एक जंग चल रही है, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया है और इससे कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ रहा है, तब E20 पेट्रोल बड़ा सहारा बना है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पश्चिम एशिया के हालात पर बोलते हुए लोकसभा में इथेनॉल वाले पेट्रोल का जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि इससे तेल आयात में 4.5 करोड़ बैरल की कमी आई है. उन्होंने कहा था कि एक दशक पहले तक मात्र 1-1.5% तक इथेनॉल मिलाया जाता था लेकिन अब यह बढ़कर 20% तक पहुंच गया है.

यह भी पढ़ेंः क्या है 82nd एयरबोर्न डिवीजन? आसमान से बरसने वाली US की सबसे घातक फोर्स, दुनिया के किसी भी कोने में घुसने में माहिर

क्या है यह इथेनॉल वाला पेट्रोल?

इथेनॉल असल में एक तरह का अल्कोहल है, जो गन्ने और मक्के से बनता है. इसे पेट्रोल में मिलाया जाता है. दुनिया के कई देशों में इथेनॉल वाला पेट्रोल चलता है. अमेरिका में 2001 से ही पेट्रोल में इथेनॉल का इस्तेमाल किया जा रहा है. 

भारत ने सबसे पहले E10 लागू किया था. इसका मकसद था पेट्रोल में 10% इथेनॉल को मिलाना. फिर E20 लागू किया. E10 यानी 10% इथेनॉल और 90% पेट्रोल, जबकि E20 का मतलब 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल. 

अब इसे बढ़ाकर E30 करने की मांग हो रही है. ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग को 20% से बढ़ाकर 30% करने की मांग की है.

9 मार्च को ही सरकार ने संसद में बताया था कि 2014-15 में पेट्रोल में सिर्फ 1.14% इथेनॉल मिलाया जाता था. 2021-22 तक ये बढ़कर 10% हो गया. अब 20% तक इथेनॉल को मिलाया जा रहा है. 

Latest and Breaking News on NDTV

यह भी पढ़ेंः अगर आपके इलाके में है PNG तो 3 महीने बाद से नहीं मिलेगा LPG सिलेंडर, सरकार ने कहा - तुरंत लें कनेक्शन

और इससे फायदा क्या हुआ?

भारत अपनी जरूरत का 88% कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है. ज्यादा कच्चा तेल खाड़ी देशों से आता है. आज के समय में लगभग 40 देशों से कच्चा तेल मंगाया जाता है.

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक, भारत हर महीने औसतन 2 करोड़ मीट्रिक टन कच्चा तेल आयात करता है. पेट्रोल में इथेनॉल बनाने के कारण कच्चा तेल आयात थोड़ा कम हुआ है. 

PPAC के मुताबिक, 2024-25 में भारत ने 24.32 करोड़ मीट्रिक टन कच्चा तेल आयात किया था. 2025-26 में यह घटकर 20.62 करोड़ मीट्रिक टन हो गया. हालांकि, 2025-26 में अभी मार्च के आंकड़े शामिल नहीं हैं, इसलिए यह आयात थोड़ा बढ़ सकता है.

Latest and Breaking News on NDTV

इतना ही नहीं, इस कारण लाखों करोड़ों रुपये की बचत भी हुई है. 9 मार्च को पेट्रोलियम मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया था कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से कच्चा तेल आयात कम हुआ है, जिससे 2014-15 से जनवरी 2026 के बीच 1.67 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है. मंत्रालय ने बताया था कि इथेनॉल के कारण 283 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल कम आयात करना पड़ा है. 

इसके अलावा, इसके दो और फायदे भी हुए हैं. पहला- पर्यावरण पर और दूसरा- किसानों को. सरकार के मुताबिक, इथेनॉल वाले पेट्रोल के कारण 851 मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन कम हुआ है. वहीं, इथेनॉल बनाने के लिए गन्ना और मक्का किसानों से खरीदा जाता है, इसलिए उन्हें भी सरकार ने 2014-15 से जनवरी 2026 के बीच 1.47 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया है.

यह भी पढ़ेंः अपनी हार को समझौता मत कहो... ट्रंप के 'शांति दावे' की ईरान ने निकाली हवा, क्या लंबा खिचेगा युद्ध?

गाड़ियों के लिए सेफ है E20?

पिछले साल E20 पेट्रोल को लेकर जमकर बवाल मचा था. सोशल मीडिया पर लोगों ने दावा किया था कि E20 से गाड़ी खराब हो सकती है. ऑटो कंपनी हीरो मोटोकॉर्प और TVS ने भी चिंता जताई थी. हीरो मोटोकॉर्प का कहना था कि अप्रैल 2023 से पहले बनी गाड़ियों को E20 पर चलाने के लिए इंजन में कई सारे बदलाव करने पड़ेंगे. TVS ने भी कहा था कि इससे इंजन को नुकसान पहुंच सकता है.

30 अगस्त 2025 को सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स (SIAM), ऑटोमैटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री (FIPI) ने एक संयुक्त बयान जारी किया था. इसमें कहा गया था कि E20 बेहतर एक्सेलरेशन, बेहतर राइड क्वालिटी और E10 की तुलना में लगभग 30% तक कम कार्बन उत्सर्जन करता है.

यह भी पढ़ेंः 'शांतिदूत' बनने चले पाकिस्तान को ईरान ने दिखाया ठेंगा! कराची जा रहे जहाज को होर्मुज से लौटा दिया

लेखक के बारे में
img
प्रियंक द्विवेदी
चीफ सब एडिटर
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Ethanol, Ethanol Blend Petrol, Ethanol Blending In India, Ethanol Blending In Petrol, Crude Oil
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com