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This Article is From Mar 25, 2024

देवा शरीफ की विश्‍व प्रसिद्ध होली... दरगाह में हिन्दू-मुस्लिम मिलकर उड़ाते हैं गुलाल

इस दरगाह पर होली खेलने की परंपरा हाजी वारिस अली शाह के जमाने से ही शुरू हुई थी, जो आज भी कायम है. होली के दिन यहां देश के कोने-कोने से सभी धर्म के लोग यहां आते हैं और एक-दूसरे को रंग व गुलाल लगाकर भाईचारे की मिसाल पेश करते हैं.

देवा शरीफ की विश्‍व प्रसिद्ध होली... दरगाह में हिन्दू-मुस्लिम मिलकर उड़ाते हैं गुलाल
इस मजार पर मुस्लिम समुदाय से कहीं ज्यादा संख्या में हिन्दू समुदाय के लोग आते हैं...
बाराबंकी:

उत्‍तर प्रदेश में बाराबंकी के सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की दरगाह की होली पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. यह मजार मिसाल है, इस बात की कि रंगों का कोई मजहब नहीं होता, बल्कि रंगों की खूबसूरती हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है. यही वजह है कि हर साल की तरह इस बार भी यहां गुलाल व गुलाब से सभी धर्मों के लोगों ने एक साथ होली खेली. लोगों ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर फूलों से होली खेली और आपसी भाईचारे की अनोखी मिसाल पेश की.

जानकारी के मुताबिक, बाराबंकी के देवा में स्थित सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की मजार का निर्माण उनके हिन्दू मित्र राजा पंचम सिंह द्वारा कराया गया था. सूफी संत हाजी वारिस अली शाह ने यह संदेश भी दिया कि जो रब है वही राम है. शायद इसीलिए केवल होली ही नहीं, बल्कि मजार के निर्माण काल से ही यह स्थान हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश देता आ रहा है. इस मजार पर मुस्लिम समुदाय से कहीं ज्यादा संख्या में हिन्दू समुदाय के लोग आते हैं. 

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इस दरगाह पर होली खेलने की परंपरा हाजी वारिस अली शाह के जमाने से ही शुरू हुई थी, जो आज भी कायम है. उस समय होली के दिन हाजी वारिस अली शाह बाबा के चाहने वाले गुलाल व गुलाब के फूल लेकर आते थे और उनके कदमो में रखकर होली खेलते थे. तभी से होली के दिन यहां कौमी एकता गेट से लोग नाचते गाते गाजे बाजे के साथ जुलूस निकालते हैं. यह जुलूस हर साल की तरह आज भी देवा कस्बे से होता हुआ, दरगाह पर पहुंचा. इस जुलूस में हर धर्म के लोग शामिल हुए.

इस मौके पर देवा शरीफ में आए लोगों ने बताया कि यहां की होली खेलने की परंपरा सैकड़ों साल पहले ब्रिटिश सरकार के जमाने से चली आ रही है. गुलाल और गुलाल से यहां होली खेली जाती है. होली के दिन यहां देश के कोने-कोने से सभी धर्म के लोग यहां आते हैं और एक-दूसरे को रंग व गुलाल लगाकर भाईचारे की मिसाल पेश करते हैं. वहीं, देवा की वारसी होली कमेटी के अध्यक्ष शहजादे आलम वारसी ने बताया कि मजार पर होली काफी समय से होती आई है, इसमें सभी धर्मों के लोग शामिल हैं. होली पर कई क्विंटल गुलाल और गुलाब से यहां होली खेली जाती है. 

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