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This Article is From Mar 25, 2024

लोकसभा चुनाव 2024 : बंगाल की तामलुक सीट पर मुकाबला 'खेला होबे' लिखने वाले युवा नेता और पूर्व जज के बीच

Lok Sabha Elections 2024: 61 वर्षीय अभिजीत गंगोपाध्याय न्यायपालिका से राजनीति में आने के बाद आलोचना के घेरे में आ गए हैं. तृणमूल कांग्रेस ने कथित शिक्षक भर्ती घोटाले में उनके फैसलों के पीछे राजनीतिक मंशा का आरोप लगाया है.

लोकसभा चुनाव 2024 : बंगाल की तामलुक सीट पर मुकाबला 'खेला होबे' लिखने वाले युवा नेता और पूर्व जज के बीच
तृणमूल ने पूर्व न्यायाधीश का मुकाबला करने के लिए 27 वर्षीय भट्टाचार्य को मैदान में उतारा...
कोलकाता:

पश्चिम बंगाल की तमलुक लोकसभा सीट (Lok Sabha Elections 2024) इन दिनों काफी चर्चा में है. आगामी लोकसभा चुनाव के लिए तामलुक सीट (Tamluk Lok Sabha Seat) से भाजपा ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय को मैदान में उतारा . वहीं, तृणमूल ने अपने युवा नेता और अपने सोशल मीडिया सेल के हेड देबांगशु भट्टाचार्य को चुना है. गंगोपाध्याय ने इस महीने की शुरुआत में न्यायाधीश के पद से इस्तीफा दे दिया और कुछ दिनों बाद भाजपा में शामिल हो गए. उन्‍होंने साल 2021 में अपनी कड़ी टिप्पणियों और पश्चिम बंगाल में शिक्षकों की भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को निर्देश देने के लिए सुर्खियां बटोरीं। स्कूल सेवा आयोग.

61 वर्षीय अभिजीत गंगोपाध्याय न्यायपालिका से राजनीति में आने के बाद आलोचना के घेरे में आ गए हैं. तृणमूल कांग्रेस ने कथित शिक्षक भर्ती घोटाले में उनके फैसलों के पीछे राजनीतिक मंशा का आरोप लगाया है. उनके भाजपा में एंट्री लेने के तुरंत बाद एक मार्च में एक रैली में, तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने गंगोपाध्याय को "बेंच पर बैठे भाजपा बाबू" के रूप में वर्णित किया था. साथ ही कहा था कि अगर वह चुनाव लड़ते हैं, तो वह उनकी हार सुनिश्चित करेंगी. भाजपा ने कल रात जारी अपनी पांचवीं सूची में उन्हें उम्मीदवार घोषित करने के साथ ही मंच तैयार कर लिया है.

ममता बनर्जी ने यह भी कहा था कि पूर्व न्यायाधीश "हजारों छात्रों को नौकरी देने से इनकार करने के बाद" नेता बन गए हैं. तैयार रहो... तुम जहां से भी चुनाव लड़ोगे, मैं तुमसे लड़ने के लिए छात्रों को भेजूंगी." पिछले कुछ हफ्तों से गंगोपाध्याय के तामलुक से चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर थी. इसकी आशंका जताते हुए, तृणमूल ने पूर्व न्यायाधीश का मुकाबला करने के लिए 27 वर्षीय भट्टाचार्य को मैदान में उतारा.

देबांगशु भट्टाचार्य, तृणमूल छात्र परिषद के सदस्य के रूप में छात्र राजनीति में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और 2022 से पार्टी की सोशल मीडिया उपस्थिति को संभाल रहे हैं. उन्हें 2021 के बंगाल चुनावों से पहले 'खेला होबे' अभियान गीत लिखने का श्रेय भी दिया जाता है. बंगाल सरकार की कल्याणकारी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए यह गीत लिखा गया था. आकर्षक संगीत के साथ, अभियान गीत तुरंत हिट हो गया, इतना कि कई अन्य दलों ने इसमें बदलाव किया और इसे अपने अभियानों में इस्तेमाल किया.

कभी वामपंथ का गढ़ रहा तामलुक निर्वाचन क्षेत्र 2009 से तृणमूल कांग्रेस के पास है, लेकिन इसमें एक पेंच है. यह सीट 2009 और 2014 में सुवेंदु अधिकारी ने जीती थी, जो अब भाजपा के शीर्ष राज्य नेताओं में से एक हैं. अधिकारी, जो उस समय तृणमूल में थे, उन्‍होंने 2016 के राज्य चुनावों में विधायक के रूप में चुने जाने के बाद सीट खाली कर दी थी. इसके बाद हुए उपचुनाव में उनके भाई दिब्येंदु अधिकारी सांसद चुने गए. 2019 के चुनावों में क्षेत्र में परिवार के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, तृणमूल ने दिब्येंदु अधिकारी को फिर से मैदान में उतारा और उम्मीद के मुताबिक, उन्होंने जीत हासिल की। हालांकि, अगले साल सुवेंदु अधिकारी भाजपा में चले गए. उनके भाई दिब्येंदु इस सीट पर बने रहे और एक सप्ताह पहले ही भाजपा में शामिल हुए.

इसका मतलब यह है कि तामलुक सीट 15 साल से तृणमूल के पास है, लेकिन असल में यह सुवेंदु अधिकारी का क्षेत्र है... और इस बार तृणमूल को इसे बरकरार रखने के लिए बहुत कुछ करना होगा.

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