
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने स्थापित किया है कि एनईईटी यूजी घोटाले से संबंधित पेपर हजारी बाग के ओएसिस स्कूल द्वारा लीक किया गया था. वहां पहुंचे कागजात के दो सेट की सील टूटी हुई थी और स्कूल का स्टाफ मामले को जानकारी निर्धारित लोगों को देने की बजाय चुप्पी साधे रहा.
“एसबीआई हजारीबाग से विभिन्न केंद्रों के लिए प्रश्नपत्रों के नौ सेट भेजे गए थे, जो ओएसिस स्कूल केंद्र पर पहुंचे, उनकी सील टूटी हुई थी. वहां के कर्मचारियों ने अलार्म नहीं बजाया और इस तरह उनकी भूमिका स्थापित हो गई,'' एक वरिष्ठ अधिकारी ने खुलासा किया.
“बिहार ईओयू ने 19 मई को एनटीए को एक पत्र लिखकर पटना में पाए गए जले हुए कागजात पर पाए गए कोड के बारे में पूछा था लेकिन एनटीए ने कोई जवाब नहीं दिया. जब एमएचए ने 21 जून को एक बैठक बुलाई तभी एनटीए ने खुलासा किया कि कोड ओएसिस स्कूल के उन पेपरों से मेल खाता है,'' वह आगे बताते हैं.
इस बीच सीबीआई अधिकारियों का भी यह दावा है हज़ारीबाग़ में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के कई कमांड अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं. उन्होंने आगे कहा, "हमने इस मामले में पहले ही तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जिसमें स्कूल के प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल और एक पत्रकार शामिल हैं."
दिलचस्प बात यह है कि ओएसिस स्कूल के प्रिंसिपल डॉ. एहसानुल हक, हज़ारीबाग़ में NEET-UG परीक्षा के जिला समन्वयक भी थे और उप-प्रिंसिपल इम्तियाज़ आलम, जो विशेष स्कूल के केंद्र समन्वयक थे. गिरफ्तार पत्रकार लीक हुए पेपर और स्कूल स्टाफ के बीच अहम व्यक्ति था.
सीबीआई ने अपनी जांच में छात्रों की ओर से परीक्षा देने वाले 22 अभ्यर्थियों से भी संपर्क किया है. इससे पहले बिहार सरकार के ईओयू ने 17 छात्रों की पहचान की थी, जिन्होंने मई में बिहार के केंद्रों से एनईईटी-यूजी परीक्षा दी थी. इन सभी को अब डिबार कर दिया गया है.
एनडीटीवी को पता चला है कि केंद्र ने इन सभी बातों का पालन किया है और यह जानकारी हलफनामे के तौर पर सुप्रीम कोर्ट को सौंपने जा रहा है.
पूरे भारत में पेपर लीक से जुड़े छह मामलों की जांच सीबीआई कर रही है. बिहार की एफआईआर पेपर लीक होने से संबंधित है, जबकि गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र की शेष एफआईआर अभ्यर्थियों के प्रतिरूपण और धोखाधड़ी से संबंधित हैं.
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