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भारत की FATF बैठक में पाकिस्तान को घेरने की तैयारी, हाफिज सईद और मसूद अजहर पर उठेंगे सवाल

FATF की बैठक के लिए भारत का संभावित संदेश स्पष्ट है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में केवल इनाम घोषित करना, वांटेट लिस्‍ट जारी करना या किसी आतंकी को फरार बताना पर्याप्त नहीं है. आतंकि नेटवर्क पर सख्‍त कार्रवाई करना जरूरी है.

भारत की FATF बैठक में पाकिस्तान को घेरने की तैयारी, हाफिज सईद और मसूद अजहर पर उठेंगे सवाल
हाफिज सईद और मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान से होंगे सवाल
  • भारत FATF की बैठक में पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा उठाएगा
  • मसूद अजहर की गिरफ्तारी में पाकिस्तान की एफआईए द्वारा 70 लाख रुपये इनाम की घोषणा की गई है
  • राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पहलगाम आतंकी हमले में हाफिज सईद की भूमिका को लेकर सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है
नई दिल्‍ली:

आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और आतंकी संगठनों की फंडिंग को लेकर भारत फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठक में पाकिस्तान को घेरने की तैयारी में है. पेरिस में 28 और 29 अक्टूबर को होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की बैठक में भारत, पाकिस्तान में एक्टिव आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा उठा सकता है. इस दौरान लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को लेकर भी पाकिस्तान से सवाल किए जा सकते हैं. इसके अलावा पहलगाम आतंकी हमले के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा भी उठने की संभावना है. 

पाकिस्‍तान अब तक सिर्फ ये दावा करता रहा है कि वह आतंकियों के खिलाफ सख्‍त रुख अपना रहा है, लेकिन सच्‍चाई पूरी दुनिया के सामने शीशे की तरह साफ है. ऐसे में  
भारत का जोर इस बात पर रहने की संभावना है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई केवल घोषणाओं और कागजी दावों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. आतंकी संगठनों के नेटवर्क को खत्म करने, उनकी फंडिंग रोकने और उन्हें मदद पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ ठोस कदम उठाना जरूरी है.

मसूद अजहर की तक क्‍यों नहीं हुई गिरफ्तारी?

पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने मसूद अजहर की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये के इनाम की घोषणा की है. पाकिस्तान की नई मोस्ट वांटेड लिस्‍ट में भी मसूद अजहर को फरार बताया गया है. हालांकि, भारतीय सुरक्षा अधिकारियों का आरोप है कि जैश-ए-मोहम्मद का नेटवर्क अब भी पाकिस्तान से एक्टिव है. ऐसे में मसूद अजहर की गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित करने और उसे फरार बताने जैसे कदमों की वास्तविक प्रभावशीलता पर सवाल उठ सकते हैं. भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह मुद्दा उठा सकता है कि पाकिस्तान की कार्रवाई कितनी प्रभावी है और क्या वहां आतंकी संगठनों के खिलाफ वास्तव में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं?

पहलगाम हमले में हाफिज सईद की भूमिका का मुद्दा

पहलगाम आतंकी हमले की जांच के सिलसिले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने हाफिज सईद और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से जुड़े मामले में सप्‍लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल किया है. भारत का आरोप है कि हाफिज सईद की पहलगाम हमले की साजिश में भूमिका रही है. इस मामले में उसके खिलाफ जम्मू की अदालत से गैर-जमानती वारंट भी जारी किया गया था.

हाफिज सईद को पाकिस्तान की अदालत वर्ष 2022 में आतंकवाद को फंडिंग से जुड़े दो मामलों में कुल 33 साल की सजा सुना चुकी है. इसके बावजूद भारत की ओर से उसके खिलाफ कार्रवाई और आतंकी नेटवर्क की गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए जाने की संभावना है.

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FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर है पाकिस्तान

पाकिस्तान को अक्टूबर 2022 में FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया गया था. FATF वैश्विक स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद की फंडिंग पर नजर रखने वाली संस्था है. इसकी बैठकों में देशों द्वारा वित्तीय अपराधों और आतंकी फंडिंग को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा की जाती है. भारत इस मंच पर पाकिस्तान की जवाबदेही का मुद्दा उठाते हुए यह सवाल सामने रख सकता है कि आतंकी संगठनों को मिलने वाली आर्थिक मदद, उनके सहयोगियों और उनके नेटवर्क के खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई हुई है.

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