
नए ऑनलाइन गेमिंग कानून को लेकर सरकार एक्शन में नजर आ रही है. इसे कैसे लागू करना है, इस पर मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी और स्टेकहोल्डर्स के बीच शुक्रवार को चर्चा हुई. इस मीटिंग में जरूरी रूल्स फ्रेम पर मंथन किया गया. बैठक में फोन पे, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज के साथ कई स्टेकहोल्डर्स के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए.
सरकार जल्द से जल्द लागू करने की तैयारी में
बता दें कि पिछले ही हफ्ते ऑनलाइन गेमिंग कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली है. अब सरकार इस नए कानून को देश भर में जल्द से जल्द लागू करने की तैयारी में है. ऑनलाइन गेमिंग कानून को देश भर में लागू करने के लिए जरूरी रूल्स किस तरह फ्रेम किया जाएं और किस तरह का रोडमैप जरूरी होगा, इस अहम सवाल पर सरकार स्टेक होल्डर्स के साथ आम सहमति बनाकर आगे बढ़ना चाहती है.
हर साल होता है करीब करीब 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान
मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी के मुताबिक, हर साल करीब 45 करोड़ लोगों को ऑनलाइन मनी गेम्स की वजह से नुकसान होता है. साथ ही सरकार का आंकलन है कि हर साल ऑनलाइन मनी गेम्स से आम लोग करीब 20 हजार करोड़ रुपए गवां देते हैं.
देश में लाखों परिवार ऑनलाइन मनी गेम्स की वजह से प्रभावित हो रहे हैं. सैकड़ो परिवारों को वित्तीय नुकसान हो रहा है, सुसाइड की घटनाएं बढ़ रही हैं और परिवारों में हिंसक घटनाओं में भी इजाफा हो रहा है.
नए ऑनलाइन गेमिंग कानून के तीन मुख्य हिस्से हैं-
- पहला, सरकार इस नए कानून के जरिये ई-स्पोर्ट्स को देश में बढ़ावा देना चाहती है. इस नए विधेयक से ई-स्पोर्ट्स को लीगल रिकग्निशन दिया गया है. अब तक ई-स्पोर्ट्स को कोई लीगल बेकिंग देश में नहीं थी.
- दूसरा, इस नए कानून के जरिए ऑनलाइन सोशल गेम्स को भी लीगल रिकॉग्निशन दिया गया है. यह आम लोगों के एजुकेशन में भी काम आएगा.
- तीसरा, सरकार इस नए कानून के जरिए ऑनलाइन मनी गेम्स पर नकेल कसना चाहती है. ना मानने पर कठोर सजा का प्रावधान है.
इस नए कानून में ऑनलाइन मनी गेमिंग को प्रमोट करने वाली कंपनियां, जो ऑनलाइन मनी गेमिंग सर्विस प्रोवाइड करते हैं, ऑनलाइन मनी गेम्स को एडवर्टाइज करते हैं, फंड ट्रांसफर करते हैं और ऑनलाइन गेमिंग सर्विस प्रोवाइड करते हैं उनके खिलाफ करवाई करने के लिए सख्त प्रावधान शामिल किए हैं.
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