- पावर मिनिस्ट्री ने गर्मी में बढ़ती बिजली की मांग को लेकर संसद की स्थाई समिति के सामने एक एक्शन प्लान पेश किया
- अप्रैल-मई में बिजली की मांग में वृद्धि हुई है और जून में यह मांग 271 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है
- देश में पावर कंपनियों के पास कोयले का स्टॉक 18 दिनों का है और नेचुरल गैस की आपूर्ति के लिए नए आर्डर दिए गए हैं
पावर मिनिस्ट्री के वरिष्ठ अधिकारियों ने गुरुवार को ऊर्जा मामलों पर संसद की स्थाई समिति के सामने गर्मी के सीजन के दौरान बिजली की बढ़ती मांग से निपटने के लिए सरकार के एक्शन प्लान का ब्यौरा पेश किया. पावर मिनिस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संसदीय समिति को बताया कि 25 अप्रैल को देश में पावर की डिमांड 256 गीगावॉट थी. करीब एक महीने बाद 20 मई को यह बढ़कर 265 गीगावॉट तक पहुंच गई.
पॉवर मिनिस्ट्री का आंकलन है कि इस साल जून में पॉवर की डिमांड 271 गीगावॉट तक पहुंच सकती है , जबकि जुलाई में इसके 283 गीगावॉट तक पहुंचाने का अनुमान है.

इमरजेंसी प्लान के तहत पॉवर मिनिस्ट्री ने तय किया है कि जून और जुलाई महीने के दौरान देश में सभी पावर प्लांट ऑपरेशनल रहेंगे. किसी भी पावर प्लांट को मेंटेनेंस में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. इससे करीब 15,000 मेगावाट सरप्लस पावर मिलने का अनुमान है.
ये भी पढ़ें: दिल्ली में सिर्फ पारा ही नहीं, बिजली की मांग भी हुई बेकाबू; खपत 8,000 मेगावाट के पार

जून महीने के दौरान विंड पावर की दिशा भी अच्छी होने का अनुमान है. इससे करीब 20 गीगावॉट बिजली पैदा होने की उम्मीद है. ये भी तय किया गया है कि दिन में हाइड्रो पावर प्लांट नहीं चलाए जाएंगे, सिर्फ रात को इन्हें ऑपरेशनल रखा जाएगा.
ये भी पढ़ें: यूपी में बिजली संकट पर BJP विधायक ही लगा रहे गुहार, ऊर्जा मंत्री को लिखी चिट्ठी में कहा, जनता में गुस्सा
ये भी पढ़ें: दिल्ली में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची बिजली की डिमांड, 9 हजार मेगावाट का आंकड़ा जाएगा पार?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं