- हाल ही में सोना और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है, लेकिन ये दोनों अभी भी काफी महंगे हैं
- ज्वेलरी बाजार में ग्राहकों की भीड़ है लेकिन महंगी कीमतों के कारण बिक्री में कमी देखी जा रही है
- दिल्ली और जयपुर जैसे बाजारों में कीमतों की अस्थिरता के बावजूद सोने-चांदी में निवेश की रुचि बनी हुई है
वैसे तो सोना और चांदी, दोनों ही सुरक्षित निवेश माने जाते हैं. और साल दर साल इनकी कीमत बढ़ती ही है. लेकिन कुछ समय से तो ऐसा लग रहा है कि मानो इनकी कीमतों में आग सी लग गई हो. जो सोना और चांदी कभी हजारों में मिल जाते थे, अब उनकी कीमत लाखों तक पहुंच गई है. हाल ही में सोना और चांदी, दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट आई, लेकिन फिर भी ये काफी महंगे हैं. 10 ग्राम गोल्ड की कीमत 15 हजार रुपये कम हो गई. चांदी की कीमत तो एक लाख रुपये प्रति किलो तक कम हो गई. फिर भी 10 ग्राम गोल्ड 1.69 लाख और 1 किलो चांदी 3.15 लाख रुपये में मिल रही है.
सोना और चांदी की कीमत जिस तरह से बढ़ रही है और अचानक से गिर जा रही है, उसे लेकर मार्केट में हलचल है. ज्वेलरी मार्केट में ग्राहकों की भीड़ तो है लेकिन सोना-चांदी महंगी होने के कारण बिक्री उतनी नहीं हो रही है. दुकानदारों का भी कहना है कि सोना-चांदी इतना अस्थिर हो गया है कि कल क्या होने वाला है, कुछ नहीं कह सकते.
जयपुर के जौहरी कहते हैं कि बाजार इतना अस्थिर है कि आप कभी नहीं जानते कि कल क्या होगा? जयपुर के जोहरी बाजार में कुछ दिन से चमक कम थी, क्योंकि ग्राहक बहुत कम आ रहे थे. मगर कीमतों में गिरावट के बाद एक बार फिर बाजार में रौनक लौट आई है.

कीमत कितनी भी बढ़े, असर कम!
दिल्ली के करोल बाग में स्थित ज्वैलरी की एक दुकान पर ग्राहकों की भीड़ अभी भी उतनी ही है, जितनी पहले हुआ करती थी. ग्लोबल बुलियन मार्केट में उतार-चढ़ाव के बावजूद सोने और चांदी में दिलचस्पी मजबूत बनी हुई है. शादी और फेस्टिव सीजन के कारण भीड़ फिर बढ़ रही है.
यहां के ज्वेलर्स का कहना है कि सोने की कीमतें ज्यादा बनी हुई हैं. 24 कैरेट गोल्ड रिकॉर्ड स्तर के करीब बिक रहा है, जिससे कई ग्राहक सतर्क हो गए हैं. ज्यादातर खरीदार भारी खरीदारी करने के बजाय पूछताछ कर रहे हैं. कुछ ग्राहक 24 कैरेट की बजाय 22 कैरेट गोल्ड की ओर बढ़ रहे हैं तो कुछ हल्की डिजाइन या पुराने गोल्ड को एक्सचेंज करने की बात कर रहे हैं. पीपी ज्वेलर्स के पवन गुप्ता कहना है कि वॉल्यूम में थोड़ी गिरावट जरूर आई है लेकिन गंभीर खरीदार अभी भी आगे बढ़ रहे हैं और सोने को एक सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं.
दूसरी ओर, चांदी में तुलनात्मक रूप से बेहतर रुझान दिख रहा है. हाल के हफ्तों में कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन चांदी के सिक्कों, मूर्तियों और बर्तनों की मांग स्थिर बनी हुई है. कई ग्राहक चांदी को एक ज्यादा किफायती विकल्प के रूप में चुन रहे हैं, खासकर तोहफे देने के मकसद से. ज्वेलर्स बताते हैं कि थोक खरीदार डील फाइनल करने से पहले रोजाना कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर कड़ी नजर रख रहे हैं.
पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक में स्थित भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े सोने-चांदी के थोक बाजारों में से एक कूचा महाजनी में खरीदारों की हलचल बढ़ रही है. ये बाजार मुख्य रूप से सोने के जेवरात, बुलियन और सोने-चांदी के कारोबार के लिए मशहूर है, जहां थोक व्यापारी सोने-चांदी का कारोबार करते हैं.

ग्राहकों का क्या है कहना?
सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों ने भी ग्राहकों के उत्साह को ठंडा नहीं किया है. ग्राहक सतर्क जरूर हैं लेकिन खरीदारी भी कर रहे हैं.
एक ग्राहक का कहना है कि कीमत को लेकर हम थोड़े संवेदनशील जरूर हो गए हैं लेकिन सोने-चांदी पर हमारा भरोसा कम नहीं हुआ है.
जमीनी स्तर पर सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों का बहुत ज्यादा असर दिखाई नहीं पड़ रहा है. सोने-चांदी को लेकर आकर्षण अभी भी बरकरार है. खरीदार सावधान और सतर्क हैं और बाजार ये देखने का इंतजार कर रहा है कि आने वाले दिनों में कीमतें स्थिर होती हैं या और बढ़ती हैं.
एक ग्राहक ने कहा कि हम पहले भारी सोने की ज्वेलरी खरीदते थे, लेकिन अब कीमतों की वजह से हल्की ज्वेलरी खरीद रहे हैं. इस शादी के सीजन में इसका असर बजट पर पड़ा है. वहीं, एक और ग्राहक ने कहा कि हम भारी सोने की ज्वेलरी खरीदने वाले थे और हमारा बजट लगभग 5 लाख था, लेकिन अब मुझे लगता है कि मौजूदा कीमतों की वजह से हम हल्की ज्वेलरी खरीदेंगे.

क्यों बढ़ने लगी सोने-चांदी की कीमत?
बुलियन एंड ज्वेलरी एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल पिछले चार दशक से एशिया के सबसे बड़े थोक बाजार कूचा महाजनी में सोना-चांदी का कारोबार कर रहे हैं.
योगेश सिंघल ने बढ़ती कीमतों पर कहा, 'सोना-चांदी के भाव बढ़ने की मुख्य वजह अंतराष्ट्रीय मार्केट में उथल-पुथल है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के रेसिप्रोकाल टैरिफ लगाने, वेनेजुएला के राष्ट्रपति के खिलाफ कार्रवाई, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से दुनिया में जियोपॉलिटकल टेंशन बढ़ती जा रही है, जिसका सीधा असर सोना-चांदी के व्यापार पर पड़ रहा है.' उन
उन्होंने कहा कि डी-डॉलराइजेशन और कमजोर रुपया भी इसकी एक बड़ी वजह है. उन्होंने कहा कि बढ़ती अनिश्चितता के कारण दुनियाभर के निवेशक, आम खरीदार और सेंट्रल बैंक सोना और चांदी को एक सेफ एसेट के तौर पर देख रहे हैं और उनकी बिक्री बढ़ती जा रही है.

अर्थशास्त्री और मार्केट एक्सपर्ट शरद कोहली ने कहा कि 'दुनियाभर में सेंट्रल बैंक्स ने यूएस ट्रेजरी में जो निवेश किया था, उसे बेचकर सोना-चांदी खरीद रहे हैं. साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व जब-जब रेट में कटौती करता है, तब-तब सोना-चांदी का भाव अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बढ़ता है.'
डॉलर भी लगातार कमजोर हो रहा है और गोल्ड-सिल्वर की कीमत बढ़ने की अहम वजहों में से एक है. जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे, तब डॉलर इंडेक्स 108 के आसपास था लेकिन अब ये गिरकर 96 के करीब पहुंच गया है. डॉलर इंडेक्स दुनिया के 6 अहम देशों की करेंसी के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की वैल्यू का एक महत्वपूर्ण मानक माना जाता है.
सोना-चांदी व्यापार से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, इन दोनों में ट्रेडिंग भी धड़ल्ले से हो रही है, जिसकी वजह से इनकी कीमतों में उथल-पुथल और बढ़ गई है. योगेश सिंघल का मानना है कि जब तक डॉलर की कीमतें स्थिर नहीं होतीं या कोई दूसरी करंसी उसकी जगह नहीं ले लेता, तब तक सोना-चांदी में खूब निवेश होगा. उनका मानना है कि अनिश्चितता के इस माहौल में सोना-चांदी की कीमतों में उथल-पुथल फिलहाल बनी रहेगी.
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