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This Article is From Jul 09, 2020

प्रवासी मजदूरों को मुफ्त अनाज देने की स्कीम 31 अगस्त तक बढ़ाई गई

राज्य सरकारें मई और जून में 8 करोड़ टार्गेटेड प्रवासी मज़दूरों में से एक चौथाई से कुछ ज्यादा को ही मुफ्त अनाज बांट पाईं

प्रवासी मजदूरों को मुफ्त अनाज देने की स्कीम 31 अगस्त तक बढ़ाई गई
प्रवासी मजदूरों को मुफ्त अनाज देने की योजना 31 अगस्त तक बढ़ा दी गई है ( प्रतीकात्मक फोटो).
नई दिल्ली:

देश में कोरोना के बढ़ते संकट और बिहार के कुछ शहरों में फिर से लॉकडाउन के फैसले के बाद अब भारत सरकार ने बिना राशन कार्ड वाले 8 करोड़ प्रवासी मज़दूरों को मुफ्त में अनाज के बंटवारे की स्कीम की अवधि 31 अगस्त 2020 तक बढ़ा दी है. पहले यह स्कीम 30 जून तक तय की गई थी.

कोरोना वायरस के बढ़ते संकट की वजह से रोज़गार का संकट बना हुआ है. बिहार के कुछ शहरों में फिर से लॉकडाउन लगाना पड़ रहा है. अब हर गरीब प्रवासी मज़दूर को इस संकट काल में प्रति महीने 5 किलो मुफ्त अनाज देने की स्कीम दो महीने और जारी रहेगी. ये फैसला ऐसे वक्त पर लिया गया है जब राज्य सरकारें मई और जून में 8 करोड़ टार्गेटेड प्रवासी मज़दूरों में से एक चौथाई से कुछ ज्यादा को ही इस संकट की घड़ी में मुफ्त अनाज बांट पाईं.

खाद्य मंत्रालय के पास मौजूद आंकड़ों के मुताबिक राज्य सरकारों ने मई में 2.32 करोड़ प्रवासी मज़दूरों को मुफ्त अनाज बांटा जबकि जून में 2.14 करोड़ प्रवासी मज़दूरों को ही मुफ्त अनाज मिला. यानी कुल 8 करोड़ टार्गेटेड प्रवासी मज़दूरों में से एक चौथाई से कुछ ज्यादा गरीब प्रवासी मज़दूरों को ही अब तक इसका फायदा मिल पाया है.

खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने पत्रकारों से कहा कि "राज्यों के पास पहले से अनाज का स्टॉक है. अब उनके पास समय होगा अनाज का बंटवारा पूरा करने के लिए."

दूसरी बड़ी चुनौती प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत इस साल नवम्बर तक मुफ्त अनाज के बंटवारा का फायदा हर गरीब तक पहुंचाने की है. एनडीटीवी संवाददाता के सवाल पर कि क्या हर गरीब लोगों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून की लाभार्थी सूची में शामिल कर लिया गया है? खाद्य मंत्री ने माना कि बिहार सरकार ने तो लिस्ट से बरसों से खाद्य सुरक्षा कानून से बाहर रहे 14 लाख लोगों की सूची पिछले महीने भेजी है लेकिन लाखों गरीब अन्य राज्यों में अब भी इसके दायरे से बाहर हैं.  

रामविलास पासवान ने कहा- "अब भी 25.87 लाख गरीब लोग हैं जो हकदार हैं लेकिन राज्य सरकारें उन्हें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के लाभार्थियों की लिस्ट में शामिल नहीं कर पाई हैं."

साफ़ है, कोरोना संकट और लॉकडाउन के दौरान प्रशासनिक खामियों की वजह से राज्य सरकारें करोड़ों गरीब प्रवासी मज़दूरों को मुफ्त का अनाज नहीं बांट पाईं. अब ये उम्मीद करनी चाहिए कि इन खामियों को दूर करने के लिए जल्दी बड़े स्तर पर पहल शुरू होगी जिससे बढ़ते कोरोना और रोज़गार संकट के इस दौर में ज्यादा से ज्यादा गरीबों तक मुफ्त में अनाज पहुंच सके.

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