- वाघेला ने विपक्षी सांसदों और छात्र कार्यकर्ताओं की हिरासत को तानाशाही कदम बताया
- उन्होंने विपक्ष को राष्ट्र-विरोधी बताने की सत्ताधारी पार्टी की नीतियों की कड़ी आलोचना की
- कांग्रेस में वापसी पर वाघेला ने साफ किया कि उन्हें पद या इनाम नहीं चाहिए
जरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला किया. उन्होंने आरोप लगाया कि वे एक स्वतंत्र संस्था के तौर पर काम करने के बजाय RSS और सत्ताधारी पार्टी के प्रभाव में काम कर रहे हैं. लोकतंत्र को दबाने और वोटिंग लिस्ट में हेरफेर के आरोपों पर गुस्सा जाहिर करते हुए वाघेला ने कहा कि लोकतंत्र की हत्या करने वाले चुनाव आयुक्त किसी भी नरमी के हकदार नहीं हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को उनके कामों के लिए सरेआम फांसी देकर खत्म कर देना चाहिए. दिल्ली में 200 से ज्यादा सांसदों के विरोध प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे राज्यों में संवैधानिक संस्थाओं के साथ समझौता किया जा रहा है.
विपक्षी नेताओं की हिरासत में लेने पर
विपक्षी सांसदों और छात्र कार्यकर्ताओं की हिरासत पर बात करते हुए, वाघेला ने इन कार्रवाइयों को तानाशाही वाला कदम बताया और कहा कि सार्वजनिक जीवन में जेल जाना एक आम बात है. जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी जैसी ऐतिहासिक हस्तियों का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर खेल भावना की कमी और विरोधियों को 'राष्ट्र-विरोधी' बताकर राजनीतिक असहमति को दबाने का आरोप लगाया. उन्होंने चेतावनी दी कि जनता की नाराज़गी आखिरकार बड़े पैमाने पर राजनीतिक विरोध में बदल जाएगी. साथ ही उन्होंने ढांचागत सुधारों की मांग की, जिसमें रिटायरमेंट के बाद जजों और वरिष्ठ नौकरशाहों के सरकारी पदों या निजी कॉर्पोरेट भूमिकाओं को संभालने पर 10 साल की अनिवार्य रोक शामिल है.
कांग्रेस पार्टी में वापसी पर
अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही अफवाहों पर सफाई देते हुए, वाघेला ने कांग्रेस नेतृत्व (जिसमें AICC महासचिव मुकुल वासनिक भी शामिल हैं) के साथ बातचीत की पुष्टि की. साथ ही, उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्हें किसी पद या इनाम की चाहत नहीं है. उन्होंने आने वाले गुजरात चुनावों में सत्ताधारी पार्टी को हराने के लिए अपना पूरा समर्थन देने की बात कही और विपक्षी ताकतों के बीच एकजुट होकर योजना बनाने और व्यवस्थित टीम वर्क की जरूरत पर जोर दिया.
आम आदमी पार्टी पर
वाघेला ने गुजरात और राष्ट्रीय स्तर पर आम आदमी पार्टी की संभावनाओं को खारिज कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि इस पार्टी का इस्तेमाल मूल रूप से दिल्ली में लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक ढांचे को खत्म करने के लिए किया गया था. उन्होंने कहा कि पंजाब में शासन से जुड़ी चुनौतियों और भ्रष्टाचार के कारण पार्टी का राजनीतिक प्रभाव कम हो जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि रिटायर हो चुके नौकरशाहों और राजनीति में आने वाले नए लोगों में राजनीतिक नेतृत्व के लिए जरूरी दूरदर्शी सोच की कमी होती है.
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