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कैसे होती है पायलटों की चेकिंग, कहां के पायलट अपने साथ ले जा सकते हैं हथियार

फ्लाईदुबई की तेल अबीब जाने वाली उड़ान में बुधवार को हवा में हुई हाईजैक की कोशिश ने हवाई यात्रा की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. आइए जानते हैं कि उड़ान से पहले कैसे होती है पायलटों की जांच.

कैसे होती है पायलटों की चेकिंग, कहां के पायलट अपने साथ ले जा सकते हैं हथियार
नई दिल्ली:

फ्लाईदुबई की तेल अबीब जा रही एक फ्लाइट में हवा में हुए हमले के बाद हवाई यात्रा की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं. इस ताजा मामले में फ्लाइट के को पायलट ने पायलट पर चाकू से हमला कर उसे घायल कर दिया. इजरायल का कहना है कि यह विमान को दुर्घटनाग्रस्त कराने की कोशिश थी. इस घटना के बाद सवाल यह उठ रहा है कि पायलट अपने साथ चाकू जैसा हथियार कैसे ले जा पाया. आइए हम आपको बताते हैं कि पायलटों की जांच कैसे की जाती है और उन्हें किस प्रकार के सुरक्षा प्रोटोकॉल का सामना करना पड़ता है. 

अभी पिछले महीने ही अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को हुए आतंकी हमले की 25वीं बरसी मनाई गई है. इस घटना ने पूरी दुनिया में हवाई उड़ानों के सुरक्षा मानकों को बदलकर रख दिया था. इसके बाद से यात्रियों, पायलट और दूसरे क्रू मेंबर की जांच का प्रोटोकॉल बदलकर रख दिया था.  9/11 की घटना के बाद पायलटों के लिए सुरक्षा मानक काफी सख्त कर दिए गए थे.

फ्लाईदुबई की फ्लाइट में कैसे हुआ हमला

फ्लाईदुबई वाले मामले में पायलटों की सुरक्षा जांच को लेकर अभी किसी तरह का बयान सामने नहीं आया है. इस तरह की एक और घटना 2015 में हुई थी. दरअसल 24 मार्च 2015 को जर्मन एयरलाइन जर्मनविग्स की उड़ान संख्या 9525 के एक को-पायलट ने उड़ाने के दौरान अपने कैप्टन को कॉकपिट से बाहर लॉक कर दिया था. इसके बाद उसने विमान को आल्पस पहाड़ से टकरा दिया था. इसमें 150 लोगों की मौत हो गई थी. यह विमान बार्सिलोना से जर्मनी के डसेलडोर्फ जा रहा था.

अब पायलट को नौकरी देने से पहले उसके पृष्ठभूमि की जांच की जाती है. इसके साथ ही उसके मेडिकल और मेंटल हेल्थ की भी जांच की जाती है. अलग-अलग देशों और एयरलाइनों को इंटरनेशनल सिविल एविएशन आर्गेनाइजेशन (आईसीएओ) के सुरक्षा मानकों का पालन करना होता है. भारत में यह काम नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) करता है. 

अपने साथ क्या ले जा सकते हैं पायलट

उड़ान के दौरान पायलट के फ्लाइट बैग में  उनका पायलट का लाइसेंस, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और एयरलाइन का आईडी कार्ड होता है. इसके अलावा वो टैबलेट/आईपैड भी ले जा सकते हैं, क्योंकि आजकल पायलट नेविगेशन मैप, फ्लाइट प्लान और तकनीकी मैनुअल के लिए कागजात की जगह आईपैड या टैबलेट का इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा वो अपने पास अपना मोबाइल फोन, लैपटॉप या स्मार्टवॉच के अलावा दवाइयां और चश्मे भी ले जा सकते हैं. दवाइयों के लिए डॉक्टर का पर्चा होना जरूरी होता है. पायलटों जब ड्यूटी पर होते हैं तो उन्हें अपने साथ घर का बना खाना भी ले जाने की छूट होती है. लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इसकी मनाही होती है. 

डीजीसीए के दिशा-निर्देशों के मुताबिक पायलट अपने साथ किसी भी तरह की बंदूक, रिवाल्वर या पिस्टल, चाकू, कैंची, बॉक्स कटर या ब्लेड जैसी चीजें नहीं ले जा सकते हैं. वो लाइटर, माचिस या कोई भी विस्फोटक रसायन भी नहीं ले जा सकते हैं.सामान्य सुरक्षा जांच के अलावा कई बार पायलटों और उनके बैग की अचानक से भी जांच कर ली जाती है. 

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हवाई जहाज पर सवार होने से पहले पायलटों और दूसरे क्रू मेंबर हवाई अड्डे पर सुरक्षा जांच के लिए जाते हैं. उन्हें आम यात्रियों की तरह ही एयरसाइड में जाने के लिए क्रू चेकपॉइंट से गुजरना पड़ता है. उड़ान से पहले और बाद में पायलटों का अल्कोहल टेस्ट किया जाता है. अभी कुछ महीने पहले एयर इंडिया के एक विमान में हुई घटना के बाद से पायलटों के डोप टेस्ट को भी अनिवार्य बना दिया गया है.

क्या अमेरिकी पायलट अपने साथ हथियार ले जाते हैं

अमेरिका में सुरक्षा जांच के दौरान पायलटों को अपने एयरलाइन का कार्ड, अपना लाइसेंस और नोन क्रूमेम्बर (Known Crewmember) वाला कार्ड दिखाना होता है. वहां अधिकारी उनकी जांच करते हैं. उसके बाद उन्हें जाने दिया जाता है. कभी-कभी पायलटों को आम यात्रियों की ही तरह सामान्य सुरक्षा जांच लाइन से होकर जाने के लिए कहा जाता है. अमेरिका का Known Crewmember कार्यक्रम पायलटों और फ्लाइट अटेंडेंट को मानक सुरक्षा जांच से छूट दिलाता है. वहीं  9/11 की घटना के बाद अमेरिका में सुरक्षा के नियमों में बदलाव किया. वहां की कुछ उड़ानों में पायलटों को हथियार के साथ उड़ान की इजाजत दी गई. यहां तक की उनका समय-समय पर हथियार चलाने की योग्यता का टेस्ट और ट्रेनिंग दोनों होती है. 

अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि फ्लाईदुबई की फ्लाइट में क्या हुआ था और को पायलट ने किससे हमला किया था. यह भी पता नहीं है कि फ्लाईदुबई के पायलटों की सुरक्षा जांच कितनी सख्ती से की गई थी. लेकिन इस घटना के बाद से इजरायल ने उड़ानों के दौरान सुरक्षा मानकों को और कड़ा करने की घोषणा की है. यह तब है जब इजरायल में पहले से ही दुनिया में सबसे सख्त सुरक्षा मानक तय किए गए हैं. 

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