
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Jharkhand Chief Minister Hemant Soren) की कानूनी टीम ने निर्वाचन आयोग (Election Commission) से सोमवार को कहा कि सरकारी अनुबंध के आधार पर अयोग्य करार देने संबंधी चुनाव कानून का प्रावधान मुख्यमंत्री सोरेन के मामले में लागू नहीं होता. उल्लेखनीय है कि सोरेन स्वयं को एक खनन पट्टा देने के मामले में आरोपी हैं.
सोरेन के एक वकील एस. के. मेंदीरत्ता ने निर्वाचन आयोग में सुनवाई के बाद संवाददाताओं से कहा कि जनप्रतिनिधि कानून 1951 की धारा-9ए जो ‘‘सरकारी अनुबंधों'' से संबंधित है, इस मामले में लागू नहीं होता.
उन्होंने कहा, ‘‘आज की हमारी जिरह में यही केंद्र में था. हम अपनी अर्जी पर 12 अगस्त को बहस जारी रखेंगे.''
सोरेन की ओर से अपना पक्ष रखने के बाद इस मामले में याचिकाकर्ता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपना प्रत्युत्तर दाखिल करेगी.
भाजपा ने इस मामले में बतौर याचिकाकर्ता आरोप लगाया है कि सोरेन ने पद पर रहते हुए स्वयं के पक्ष में सरकारी अनुबंध देकर चुनाव कानून के प्रावधान का उल्लंघन किया है.
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