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क्या चुनाव आयोग बंगाल में समय पर कर पाएगा SIR? 33 लाख नोटिस लंबित, जानिए पूरा मामला

उत्तर और दक्षिण 24 परगना, मुर्शिदाबाद और नदिया जैसे बड़े जिलों में नोटिस डिलीवरी और सुनवाई दोनों में भारी अंतर है. आयोग ने इन खामियों को दूर करने के लिए अतिरिक्त माइक्रो-ऑब्जर्वर तैनात किए हैं और सुनवाई केंद्रों की संख्या बढ़ाई है.

क्या चुनाव आयोग बंगाल में समय पर कर पाएगा SIR? 33 लाख नोटिस लंबित, जानिए पूरा मामला
  • पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में देरी होने की आशंका बनी हुई है
  • चुनाव आयोग ने लाखों मतदाताओं को SIR प्रक्रिया के तहत नोटिस भेजे हैं लेकिन समय पर पूरा होना मुश्किल है
  • बड़े जिलों जैसे उत्तर और दक्षिण 24 परगना, मुर्शिदाबाद और नदिया में नोटिस डिलीवरी और सुनवाई में देरी हो रही है
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नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में देरी होने की आशंका है. चुनाव आयोग ने राज्य में Special Summary Revision (SIR) प्रक्रिया के तहत लाखों मतदाताओं को नोटिस भेजे हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इस प्रक्रिया का समय पर पूरा होना लगभग असंभव है. आयोग की अपनी रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में अब तक 6,578,058 SIR नोटिस जारी किए गए हैं. इनमें से 32,49,091 नोटिस डिलीवर हुए हैं, जबकि 33,28,967 नोटिस अभी तक मतदाताओं तक नहीं पहुंचे.अभी 74,19,356 मामलों में सुनवाई लंबित है.

क्या प्रक्रिया अधूरी है अभी?

यह आंकड़ा बताता है कि SIR प्रक्रिया न केवल धीमी है, बल्कि अधूरी भी है. नोटिस डिलीवरी में भारी देरी है और सुनवाई की स्थिति तो और भी खराब है. डिलीवर हुए नोटिसों में से केवल 40 प्रतिशत मामलों की ही सुनवाई हो पाई है. इसका मतलब है कि चुनाव आयोग के सामने एक बड़ा प्रशासनिक बोझ है, जिसे अगले एक महीने में पूरा करना लगभग नामुमकिन है.

बड़े जिलों में सबसे ज्यादा देरी

उत्तर और दक्षिण 24 परगना, मुर्शिदाबाद और नदिया जैसे बड़े जिलों में नोटिस डिलीवरी और सुनवाई दोनों में भारी अंतर है. आयोग ने इन खामियों को दूर करने के लिए अतिरिक्त माइक्रो-ऑब्जर्वर तैनात किए हैं और सुनवाई केंद्रों की संख्या बढ़ाई है. लेकिन प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में 14 फरवरी तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करना बेहद कठिन है.

ममता बनर्जी ने साधा निशाना

इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले 72 घंटों में मुख्य चुनाव आयुक्त को लगातार दो पत्र लिखने के बाद अचानक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि मैं प्रशासन से कहना चाहती हूं कि कानून का पालन करें और काम करें, डरने की जरूरत नहीं. अगर जरूरत पड़े तो मुख्य सचिव से संपर्क करें. पुलिस को निर्देश है कि अगर कोई अवैध दस्तावेज या नकदी मिले तो तुरंत जब्त करें.ममता ने यह भी याद दिलाया कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. 

क्या है चुनाव आयोग का डेडलाइन?

चुनाव आयोग ने 14 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की तारीख तय की है. लेकिन मौजूदा आंकड़ों और प्रशासनिक चुनौतियों को देखते हुए, यह डेडलाइन पूरी करना आयोग के लिए बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है. विधानसभा चुनाव अगले कुछ महीनों में होने की संभावना है, ऐसे में मतदाता सूची की समय पर तैयारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए बेहद अहम है.

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