- महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग ने लाडकी बहन योजना की जनवरी किस्त अग्रिम भुगतान पर रोक लगा दी है
- कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार चुनावी लाभ के लिए आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन कर रही है
- राज्य निर्वाचन आयोग ने नई लाभार्थियों के चयन और अग्रिम किस्त जारी करने पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया है
महानगरपालिका चुनावों की घोषणा के साथ महाराष्ट्र में लागू आदर्श आचार संहिता के बीच लाडकी बहन योजना को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने एक अहम और दूरगामी फैसला सुनाया है. आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जनवरी महीने की किस्त को अग्रिम रूप में जारी नहीं किया जा सकता, जिससे महायुति सरकार की मकर संक्रांति से पहले लाभ राशि जारी करने की योजना पर पूरी तरह विराम लग गया है.
कांग्रेस के पत्र से बढ़ा मामला, SEC तक पहुंची शिकायत
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत कांग्रेस पार्टी द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग को भेजे गए एक औपचारिक पत्र से हुई. कांग्रेस ने अपने पत्र में आरोप लगाया था कि आदर्श आचार संहिता लागू रहते हुए सरकार लाडकी बहन योजना के तहत अग्रिम भुगतान कर चुनावी लाभ लेने का प्रयास कर रही है.
कांग्रेस ने यह भी कहा था कि मीडिया में यह खबरें प्रसारित की जा रही हैं कि “14 जनवरी से पहले दिसंबर और जनवरी, दोनों महीनों की राशि लाभार्थियों के खातों में जमा की जाएगी”, जो स्पष्ट रूप से मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास है. पार्टी ने इसे चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी.
SEC ने सरकार से मांगा स्पष्टीकरण
कांग्रेस के पत्र और लगातार मिल रही शिकायतों के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव से आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा. आयोग ने यह जानना चाहा कि क्या वास्तव में योजना की राशि अग्रिम रूप में जारी करने का कोई सरकारी निर्णय लिया गया है.
मुख्य सचिव ने अपने जवाब में बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 4 नवंबर 2025 को जारी एक समेकित आदेश के अनुसार, “चुनाव घोषित होने से पहले शुरू की गई योजनाओं और विकास कार्यों को आचार संहिता की अवधि में जारी रखा जा सकता है.”
SEC का बड़ा फैसला: अग्रिम भुगतान पर सख्त रोक
हालांकि, सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा और निर्णायक आदेश जारी किया. आयोग ने साफ शब्दों में कहा कि लाडकी बहन योजना का नियमित और पहले से स्वीकृत लाभ दिया जा सकता है. जनवरी महीने की किस्त अग्रिम रूप में जारी नहीं की जाएगी. आचार संहिता की अवधि में नए लाभार्थियों का चयन नहीं किया जा सकेगा.
यह फैसला सीधे तौर पर महायुति सरकार की उस रणनीति पर असर डालता है, जिसके तहत मकर संक्रांति से पहले दो महीने की राशि एक साथ जारी करने की चर्चा थी.
महायुति सरकार को राजनीतिक झटका
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को महायुति सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. चुनावी माहौल में लाडकी बहन योजना को सरकार की एक प्रमुख उपलब्धि के तौर पर पेश किया जा रहा था, लेकिन अब जनवरी की किस्त अग्रिम देने पर रोक से सरकार की योजनाओं को बड़ा धक्का लगा है.
चुनावी निष्पक्षता की दिशा में SEC का कड़ा संदेश
राज्य निर्वाचन आयोग के इस निर्णय को चुनावी निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं की रक्षा के तौर पर देखा जा रहा है. आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि कल्याणकारी योजनाओं का उपयोग चुनावी लाभ के लिए नहीं किया जा सकता, चाहे सरकार कोई भी हो.
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि महायुति सरकार इस फैसले के बाद क्या रुख अपनाती है और चुनावी रणनीति में किस तरह का बदलाव करती है.
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