- छह शिवसेना यूबीटी सांसद जल्द ही एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होंगे
- शिंदे गुट के लोकसभा सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो जाएगी, जिससे कांग्रेस के बराबर ताकत महाराष्ट्र में मिलेगी
- छह नए सांसद अगले लोकसभा चुनाव में टिकट की मांग कर रहे हैं, जिससे शिवसेना का सीटों पर दावा बढ़ सकता है
शिवसेना यूबीटी के छह सांसद जल्दी ही औपचारिक रूप से एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना का दामन थामने वाले हैं. लोकसभा अध्यक्ष को वे इस बारे में पत्र दे चुके हैं. उनके अलग गुट का शिवसेना में विलय एक औपचारिकता ही बची है, जो अगले सप्ताह पूरी की जा सकती है. इस घटनाक्रम का महाराष्ट्र की राजनीति पर दूरगामी परिणाम पड़ने की संभावना है.
अभी किसकी कितनी ताकत
छह सांसदों के विलय के बाद एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के लोकसभा में 13 सांसद हो जाएंगे. वह लोकसभा में संख्या बल के हिसाब से महाराष्ट्र में कांग्रेस की बराबरी पर पहुंच जाएगी. कांग्रेस के पिछले लोकसभा चुनाव में 13 सांसद जीत कर आए थे. वहीं बीजेपी 9 सीटों के साथ अब तीसरे नंबर पर पहुंच जाएगी. यह बीजेपी के लिए मनमाफिक स्थिति नहीं होगी, क्योंकि उसने राज्य में अब खुद को बड़े भाई की भूमिका में स्थापित कर लिया है.

लोकसभा चुनाव में लगे झटके से उबरकर पार्टी ने कुछ ही महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन करते हुए 132 सीटें जीती थीं. यही नहीं, स्थानीय निकाय के चुनाव में भी बीजेपी ने फडणवीस के नेतृत्व में झंडा गाड़ा. नगर परिषदों और नगर पंचायतों की कुल 6,859 वार्ड सीटों में बीजेपी ने अकेले 3,091 सीटों पर जीत दर्ज की. 288 नगर परिषद-नगर पंचायत अध्यक्ष पदों में से 117 पर बीजेपी, 53 पर शिवसेना शिंदे गुट और 37 पर एनसीपी ने जीत हासिल की. बीजेपी ने 29 नगर निगमों में से अधिकांश मेयर पदों पर कब्जा जमाया और सबसे प्रतिष्ठित बीएमसी का मेयर पद भी अपनी झोली में डाला. वैसे ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में एकनाथ शिंदे ने अपना वर्चस्व कायम रखा.
बीजेपी कर चुकी है पहले ऐसा
हालांकि, शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों की इस बगावत को बीजेपी का आशीर्वाद भी प्राप्त है. माना जा रहा है कि मॉनसून सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर संविधान संशोधन विधेयकों के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने के उद्देश्य से ही बीजेपी ने शिंदे को इस ऑपरेशन टाइगर के लिए हरी झंडी दी. शिवसेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम के एक दिन बाद महाराष्ट्र के दौरे पर गए गृह मंत्री अमित शाह ने यह कह कर शिंदे के हौसले बढ़ा दिए कि अब एक ही शिवसेना है. उन्होंने मुस्कराते हुए कहा कि 'पहले एकनाथ शिंदे के नाम के आगे 'शिंदे गुट' लगाना पड़ता था, लेकिन अब केवल एक ही 'शिवसेना' रह गई है, अब कोई अन्य गुट बाकी नहीं रहा है.' मॉनसून सत्र से पहले पश्चिम बंगाल में बीजेपी की निगरानी में टीएमसी का एक ऐसा ही ऑपरेशन हो चुका है, जिसमें 28 में से 20 सांसदों ने अलग होकर एक गुमनाम राजनीतिक दल एनसीपीआई में विलय कर लिया. इस बारे में स्पीकर के फैसले का इंतजार है.

शिंदे की नजरें मोदी मंत्रिपरिषद पर
महाराष्ट्र की राजनीति में एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच मतभेद की खबरें आती रहती हैं. शिंदे के दिल्ली दौरों में यह बात कही जाती है कि वे मतभेद के मुद्दों को पार्टी आलाकमान के साथ रखते हैं. वैसे भी 2024 में उन्हें मुख्यमंत्री पद नहीं मिलने से उनसे समर्थक आज भी हताश दिखते हैं. लेकिन अब बदली परिस्थितियों में शिंदे की मोलभाव करने की ताकत बढ़ने की संभावना है. शिंदे के इन तेवरों का परिचय बीजेपी को पहले ही मिल चुका है, जब लोकसभा और विधानसभा चुनावों में वे अपने हिस्से में ज्यादा से ज्यादा सीटें लेने के लिए बीजेपी पर दबाव डाल चुके हैं.

यह भी संभावना है कि 13 सांसदों के साथ उनकी नजरें मोदी मंत्रिपरिषद के संभावित फेरबदल पर होगी. अभी तक उनके पास एक ही मंत्रालय है. अभी सात सांसदों के हिसाब से उनके दल को राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार दिया गया है. पार्टी के प्रताप राव जाधव आयुष मंत्री बनाए गए हैं, लेकिन 13 सांसदों के साथ वह केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए दबाव बनाने से नहीं चूकेंगे. अभी 16 सांसदों वाली टीडीपी और 12 सांसदों वाली जेडीयू के पास एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री हैं. इस तरह बढ़ी ताकत के हिसाब से शिवसेना का दावा एक कैबिनेट पोस्ट पर बनता है. टीएमसी के बागी सांसदों को भी इसी फार्मूले के तहत एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री मिलने की बात कही जा रही है.
2029 पर नजर
शिंदे केवल केंद्र में अपनी ताकत बढ़ाने पर ही नहीं लगे हैं. वे राज्य में पार्टी के विस्तार की रणनीति को भी जमीन पर उतार रहे हैं. उनके बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे राज्य की 160 विधानसभाओं के दौरे पर हैं. साथ ही स्थानीय निकाय के चुनावों में भी उनकी पार्टी ने पूरी ताकत झोंकी. उनकी योजना संगठन को मजबूत करने की भी है और इसीलिए उनकी नजरें शिवसेना यूबीटी के सांगठनिक ढांचे पर लगी है. बड़ी संख्या में बीएमसी में पार्षदों के टूट की बात कही जा रही है. शिंदे अपनी पार्टी का विस्तार मुंबई और उसके आसपास के इलाकों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी करना चाहते हैं. वे काम करने वाले नेताओं को मौका देना चाहते हैं. इसीलिए पार्टी के स्थापना दिवस के कार्यक्रम में जब उनके बेटे के प्रमोशन की मांग की गई तो उन्होंने यह कहकर खारिज कर दिया कि यह उनके काम और प्रदर्शन पर निर्भर करेगा. यह शिवसेना यूबीटी के नेताओं को भी संदेश है, क्योंकि छह बागी सांसद इसलिए भी नाराज बताए जाते हैं कि वे आदित्य ठाकरे को आगे करने के उद्धव ठाकरे के फैसले से सहमत नहीं हैं.
शिंदे का स्ट्राइक रेट ज्यादा
एकनाथ शिंदे 2024 का लोकसभा चुनाव नहीं भूले होंगे, जब बीजेपी ने राज्य की 48 में से 28 सीटों पर चुनाव लड़ा और उन्हें केवल 15 सीटें दी गई थीं. जहां बीजेपी 32 प्रतिशत स्ट्राइक रेट के साथ 28 में से केवल 9 सीटें ही जीत सकी वहीं 46.66 प्रतिशत स्ट्राइक रेट के साथ शिवसेना शिंदे ने 15 में से सात सीटें जीती थीं. एनसीपी अजित पवार को चार सीटें दी गई थीं, जिनमें वह एक ही जीत सकी. एक सीट राष्ट्रीय समाज पक्ष को दी गई थी, जो वह नहीं जीत सकी.
2029 में कैसे होगा सीटों का बंटवारा
लेकिन अब एक नई चुनौती भी आएगी. शिवसेना यूबीटी के जो छह सांसद शिंदे के साथ आ रहे हैं, उनमें से तीन ने पिछले लोकसभा चुनाव में शिवसेना शिंदे के उम्मीदवारों को हराया था. हिंगोली से नागेश पाटिल-आष्टीकर ने शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के बाबूराव कदम कोहलीकर को 2,16,335 वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त दी थी. जबकि यवतमाल-वाशिम से संजय देशमुख ने शिवसेना (शिंदे गुट) की राजश्री पाटिल को 94,473 वोटों के अंतर से हराया और शिरडी से भाऊसाहेब ने शिवसेना (शिंदे गुट) के सदाशिव लोखंडे को 50,529 वोटों से मात दी थी. बाकी तीन की बात करें तो धाराशिव से ओमप्रकाश राजेनिंबालकर से सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी. इन्होंने एनसीपी (अजीत पवार गुट) की अर्चना पाटिल को 3,29,846 वोटों के भारी अंतर से हराया. जबकि परभणी से संजय जाधव ने महायुति समर्थित राष्ट्रीय समाज पक्ष आरएसपी के प्रमुख महादेव जानकर को 1,34,061 वोटों से पराजित किया. वहीं मुंबई उत्तर पूर्व से संजय दीना पाटिल ने कड़े मुकाबले में बीजेपी के उम्मीदवार मिहिर कोटेचा को 29,861 वोटों से हराया था.

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शिवसेना के एक नेता के अनुसार, यह सभी छह सांसद इस शर्त पर आ रहे हैं कि अगले लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट दिया जाए. इस नेता का दावा है कि बीजेपी ने भी इसके लिए हामी भरी है. पर ऐसा होने पर 2029 लोकसभा चुनाव के लिए शिवसेना का दावा 25 सीटों का हो जाएगा. यह शिंदे की बढ़ी ताकत का प्रदर्शन होगा, जिसे नजरअंदाज करना शायद बीजेपी के लिए मुश्किल हो. हालांकि, एक अन्य नेता का कहना है कि तब तक शायद परिसीमन के बाद बढ़ी हुई संख्या के हिसाब से चुनाव हो और ऐसे में शिंदे को एडजस्ट करना मुश्किल नहीं होगा. पर यह तय है कि ताजा घटनाक्रम के बाद शिंदे की बढ़ी ताकत से महाराष्ट्र में महायुति के भीतर आने वाले समय कुछ नए घटनाक्रम भी देखने को मिल सकते हैं.
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