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फ्रॉड के शिकार लोगों को पैसा वापस दिलाने पर ईडी का जोर, एक साल में लौटाए 63 हजार करोड़

ईडी की वित्तीय वर्ष 2025-26 की परफॉर्मेंस रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक ED ने 63,412 करोड़ रुपये की संपत्ति पीड़ितों को लौटाने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है. इसमें बैंक, आम निवेशक, होमबायर्स और पोंजी स्कीम के शिकार लोग शामिल हैं.

फ्रॉड के शिकार लोगों को पैसा वापस दिलाने पर ईडी का जोर, एक साल में लौटाए 63 हजार करोड़
  • प्रवर्तन निदेशालय ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में पीड़ितों को 63,412 करोड़ रुपये की जब्त संपत्ति लौटाने में मदद की
  • ईडी ने गिरफ्तारियां भले ही कम की हैं लेकिन पिछले दो सालों में ही 18 मामलों में 57 लोगों को सजा दिलाई है
  • इस वित्तीय वर्ष में ही भगोड़े आर्थिक अपराधियों के 28 नए आवेदन दाखिल किए और 9 लोगों को भगोड़ा घोषित किया
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देश में हजारों लोग बैंक फ्रॉड, धोखाधड़ी, पोंजी घोटालों और आर्थिक अपराधों में फंसकर अपनी जमा पूंजी लुटा बैठते हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) न सिर्फ आर्थिक अपराधियों पर शिकंजा कस रहा है, बल्कि पीड़ितों का पैसा लौटाने में भी मदद कर रहा है. एक साल में ही ईडी ने लोगों के 63 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम वापस लौटाने में मदद की है. 

हकदारों को दिलाया उनका हक

ईडी की वित्तीय वर्ष 2025-26 की परफॉर्मेंस रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक ED ने 63,412 करोड़ रुपये की संपत्ति पीड़ितों को लौटाने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है. इसमें बैंक, आम निवेशक, होमबायर्स और पोंजी स्कीम के शिकार लोग शामिल हैं. यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले ED की आलोचना होती थी कि वह सिर्फ संपत्ति जब्त करती है, लेकिन अब एजेंसी उस संपत्ति को सही हकदार तक पहुंचाने पर भी जोर दे रही है.

ईडी ने बताया, गिरफ्तारियां कम क्यों

ईडी के गिरफ्तारी के आंकड़ों में हल्की गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन इसे ED ने अपनी रणनीतिक सफलता बताया है. एजेंसी का तर्क है कि अब वह सिर्फ उन्हीं मामलों में गिरफ्तारी कर रही है, जहां पुख्ता सबूत मौजूद हैं. इससे अदालत में केस मजबूत रहता है और बेल मिलने की संभावना कम होती है. यानी अब कम लेकिन सटीक गिरफ्तारी की नीति अपनाई जा रही है.

2 साल में 57 लोगों को सजा दिलाई

सजा (Conviction) दिलाने के मामले में भी ईडी ने अपना तरीका बदला है. एक समय था जब 2009 से 2014 के बीच ED को एक भी केस में सजा नहीं मिल पाई थी. लेकिन 2014 के बाद से स्थिति बदली है. 2024 तक 38 मामलों में 67 लोगों को दोषी ठहराया गया. खास बात यह है कि पिछले दो सालों में ही 18 मामलों में 57 लोगों को सजा मिली है. यह संकेत देता है कि अब ED की जांच अदालत में टिक रही है और अभियोजन पक्ष मजबूत हो रहा है.

भगोड़े आर्थिक अपराधियों पर सख्ती 

भगोड़े आर्थिक अपराधियों पर ED की सख्ती भी लगातार बढ़ रही है. अब तक 54 लोगों के खिलाफ FEOA के तहत कार्रवाई शुरू की गई है, जिनमें से 21 को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है. सिर्फ इस वित्तीय वर्ष में ही 28 नए आवेदन दाखिल किए गए और 9 लोगों को भगोड़ा घोषित किया गया. यह दर्शाता है कि ED अब उन लोगों पर खास फोकस कर रही है जो देश छोड़कर कानून से बचने की कोशिश करते हैं.

FEMA के 81% मामलों का निपटारा

विदेशी मुद्रा कानून यानी FEMA के तहत कार्रवाई करते हुए ED ने 9347 शो-कॉज नोटिस जारी किए, जिनमें से 7588 मामलों का निपटारा किया गया. यानी करीब 81 प्रतिशत मामलों में फैसला हो चुका है. इन मामलों में कुल 2051 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया. इसके अलावा, एक खास अभियान चलाकर 1987 से लंबित पुराने FERA मामलों को लगभग खत्म कर दिया गया, जिससे सिस्टम में वर्षों से अटके केस क्लियर हो सके.

ED ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत की है. इंटरपोल के साथ सहयोग बढ़ा है. ब्लू नोटिस, सिल्वर नोटिस और पर्पल नोटिस जैसे टूल्स का इस्तेमाल कर संदिग्धों की लोकेशन ट्रैक की जा रही है और नए ट्रेंड्स पर नजर रखी जा रही है. इंटरनेशनल रिक्वेस्ट के निष्पादन की दर 92 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो वैश्विक सहयोग में ED की दक्षता को दिखाता है. इतना ही नहीं, 2026 में भारत को एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच की अध्यक्षता भी मिली है, जिससे ED की वैश्विक साख और मजबूत हुई है.
देखें - ED ने 2025-26 में पांच गुना ज्यादा मनी लॉन्ड्रिंग के मामले दर्ज किए, संपत्ति जब्ती में तोड़ा रिकॉर्ड

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