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दिल्ली से लेकर जम्मू तक हिली धरती, आखिर बार-बार अफगानिस्तान ही क्यों है भूकंपों का 'एपिसेंटर'

Earthquake Today: अफगानिस्तान में अक्सर भूकंप आता रहता है, जिसका असर दिल्ली-एनसीआर समेत भारत के कई राज्यों तक होता है. इसकी क्या वजह है? समझिए

दिल्ली से लेकर जम्मू तक हिली धरती, आखिर बार-बार अफगानिस्तान ही क्यों है भूकंपों का 'एपिसेंटर'
  • अफगानिस्तान में भूकंप का केंद्र हिंदुकुश क्षेत्र है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों का लगातार टकराव होता रहता है
  • अफगानिस्तान यूरेशियन, भारतीय और अरबियन प्लेटों के जटिल जंक्शन पर स्थित है, जिससे भूकंप की घटनाएं बढ़ती हैं
  • अफगानिस्तान कई सक्रिय फॉल्ट लाइनों पर टिका है, जो पृथ्वी के अंदर तनाव और भूकंप के कारण बनती हैं
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दिल्ली-एनसीआर से लेकर जम्मू-कश्मीर तक भूकंप के तेज झटके दर्ज किए हैं. भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में था. भूकंप के झटके चार देशों भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान में महसूस किए गए. भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान का हिंदुकुश था. जब-जब अफगानिस्तान की धरती कांपती है, तो उसकी गूंज हजारों किलोमीटर दूर दिल्ली और जम्मू की गलियों तक सुनाई देती है. आखिर ऐसा क्यों होता है. अफगानिस्तान के जमीन के भीतर ऐसा क्या छिपा है, जिसकी वजह से वहां अक्सर भूकंप आते हैं? आइए समझते हैं.

टेक्टोनिक प्लेटों का टकराव हिलाता है धरती

अफगानिस्तान में बार-बार भूकंप का केंद्र होने की वजह टेक्टोनिक प्लेटों का टकराव है. दरअसल अफगानिस्तान यूरेशियन प्लेट पर स्थित है. लेकिन इसके दक्षिण-पूर्व में भारतीय प्लेट और दक्षिण में अरबियन प्लेट है. भारतीय प्लेट लगातार उत्तर की ओर यूरेशियन प्लेट की तरफ खिसक रही है. इस निरंतर टकराव और घर्षण से जमीन के नीचे भारी तनाव पैदा होता है. जब यह तनाव अचानक मुक्त होता है, तो वह भूकंप के रूप में बाहर आता है.

फॉल्ट लाइन्स भी है एक वजह

इसके अलावा अफगानिस्तान कई प्रमुख और सक्रिय फॉल्ट लाइनों के जाल पर टिका है. ये एक तरह से वो दरारें हैं, जो जमीन के नीचे छिपी हुई हैं. इन दरारों में प्लेट आपस में रगड़ खाती हैं. इसके अलावा हिंदुकुश पर्वतमाला और पामीर नॉट जैसे क्षेत्रों में प्लेटों के जटिल जुड़ाव के कारण यहां बार-बार भूकंप आते हैं. वहीं अफगानिस्तान दुनिया की दूसरी सबसे सक्रिय भूकंपीय बेल्ट, अल्पाइड बेल्ट में स्थित है. यह बेल्ट अटलांटिक से लेकर हिमालय और दक्षिण-पूर्वी एशिया तक फैली हुई है. इसी वजह से अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तर भारत के क्षेत्रों में झटके महसूस किए जाते हैं. 

क्यों आते हैं भूकंप?

भूकंप पृथ्वी की सतह का अचानक हिलना या कांपना है. यह मुख्य रूप से प्लेट टेक्टॉनिक्स के सिद्धांत से जुड़ा है. इसके मुख्य कारणों की बात करें तो टेक्टोनिक प्लेटों की गति पृथ्वी की बाहरी परत (स्थलमंडल या लिथोस्फीयर) कई बड़ी-बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी हुई है  ये प्लेटें लगातार बहुत धीमी गति से (साल में कुछ सेंटीमीटर) घूमती या खिसकती रहती हैं. जब प्लेटों के किनारे फ्रिक्शन (घर्षण) के कारण अटक जाते हैं, तो तनाव लगातार बढ़ता रहता है. जब यह तनाव इतना ज्यादा हो जाता है कि चट्टानें सहन नहीं कर पातीं, तो वे अचानक टूटती या खिसकती हैं। इस अचानक ऊर्जा मुक्ति से भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं, जो पृथ्वी की सतह पर कंपन पैदा करती हैं, यही भूकंप है.

दिल्ली समेत कई राज्यों में भूकंप

बता दें कि दिल्ली-एनसीआर, जम्मू-कश्मीर समेत देश के कई राज्यों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं. भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा क्षेत्र में था. बताया जा रहा है कि अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा क्षेत्र में शुक्रवार को 5.9 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके झटके जम्मू-कश्मीर समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में महसूस किए गए. जानकारी के अनुसार, भूकंप का केंद्र 71.01 डिग्री पूर्वी देशांतर और 36.52 डिग्री उत्तरी अक्षांश पर था, जबकि इसकी गहराई 175 किलोमीटर दर्ज की गई.

जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मच गई. हालांकि, अभी तक किसी तरह के नुकसान या जनहानि की कोई खबर नहीं है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है. इससे पहले तिब्बत में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. शाम 8 बजकर 12 मिनट पर तिब्बत में भी धरती हिली थी. जिसकी तीव्रता 3.2 मापी गई थी. 

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