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This Article is From Feb 24, 2019

... तो इस वजह से हुई जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती

जम्मू कश्मीर में 10,000 अतिरिक्त अर्द्धसैनिक कर्मियों की तैनाती लोकसभा चुनाव से पहले एक नियमित चुनाव पूर्व अभ्यास है. गृह मंत्रालय सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी.

... तो इस वजह से हुई जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती
प्रतीकात्मक तस्वीर
  • जम्मू कश्मीर पहुंची अर्धसैनिक बलों की 100 की टुकड़ियां
  • बीएसएफ 14 साल बाद घाटी में तैनात हुई
  • अनुच्छेद 35 ए की सुनवाई से पहले हुई तैनाती
नई दिल्ली:

जम्मू कश्मीर में 10,000 अतिरिक्त अर्द्धसैनिक कर्मियों की तैनाती लोकसभा चुनाव से पहले एक नियमित चुनाव पूर्व अभ्यास है. गृह मंत्रालय सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी. अर्द्धसैनिक बलों की 100 अतिरिक्त कंपनियां (प्रत्येक कंपनी में 100 कर्मी होते हैं) कश्मीर घाटी में फौरी आधार पर केंद्र द्वारा भेजे जाने और अलगाववादियों पर कार्रवाई के तहत 150 लोगों के गिरफ्तार किए जाने के मद्देनजर अटकलें तेज हो गई है. एक सूत्र ने बताया, ‘‘अतिरिक्त बलों की तैनाती चुनाव पूर्व तैयारी से संबद्ध एक नियमित अभ्यास है.'' 

जम्मू कश्मीर: श्रीनगर में पहुंची अर्धसैनिक बलों की 100 टुकड़ियां

अर्द्धसैनिक बलों की 100 कंपनियों में 45 कंपनियां सीआरपीएफ से है, जबकि बीएसएफ से 35 और एसएसबी तथा आईटीबीपी से 10 - 10 कंपनियां हैं. सूत्रों ने बताया कि इन अतिरिक्त बलों को कानून व्यवस्था और अन्य कार्यों के लिए तैनात किया जाएगा. उच्चतम न्यायालय में संविधान के अनुच्छेद 35 ए पर होने वाली सुनवाई से पहले सुरक्षा बलों ने 150 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है. इनमें मुख्य रूप से जमात ए इस्लामी जम्मू एंड कश्मीर के प्रमुख अब्दुल हामिद फयाज सहित इसके अन्य लोग शामिल हैं. शीर्ष न्यायालय में यह सुनवाई सोमवार को होने की संभावना है. 

पुलिस ने इस कार्रवाई को नियमित बताते हुए कहा है कि अतीत में नेताओं और पथराव करने वाले लोगों को उठाया गया है. वहीं इस घटनाक्रम से नजदीकी रूप से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि यह जमात ए इस्लामी पर प्रथम बड़ी कार्रवाई है. कुछ सरकारी विभागों द्वारा जारी आदेशों से भी लोगों में डर समा गया है. श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज ने अपने संकाय सदस्यों की सर्दियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं और उन्हें सोमवार को अपने काम पर आने को कहा है.

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